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पितृपक्ष की नवमी और अमावस्या तिथि को क्यों माना जाता है अहम? जानें इन दिनों का महत्व

 Written By: Naveen Khantwal
 Published : Sep 19, 2026 11:16 am IST,  Updated : Sep 19, 2026 11:16 am IST

पितृपक्ष के दौरान नवमी और अमावस्या तिथियों के श्राद्ध को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इन दोनों दिनों में किए गए श्राद्ध से मातृ पितृ और भूले-बिसरे पितरों की आत्मा भी तृप्त होती है। आइए जान लेते हैं नवमी और अमावस्या तिथियों के महत्व के बारे में।

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पितृपक्ष Image Source : PINTEREST

साल 2026 में पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर से हो रही है। पितृपक्ष में हम अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण, दान और पिंडदान आदि करते हैं। वहीं पितृपक्ष में आने वाली सभी तिथियों में से नवमी और अमावस्या तिथि को बेहद खास माना जाता है। इन दोनों दिनों में किए गए श्राद्ध और तर्पण से मातृ पितरों और भूले-बिसरे पितरों को हम तृप्त कर सकते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं इन तिथियों के महत्व को। 

मातृ नवमी श्राद्ध का महत्व 

पितृपक्ष की नवमी तिथि को मातृ पितरों को समर्पित किया गया है। इस दिन उन माताओं, बहनों, बेटियों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु पति के जीवित रहते ही हो गई हो। वहीं जिन मातृ पितरों की मृत्यु की तिथि का पता न हो उनका श्राद्ध भी इस दिन किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मातृ नवमी के दिन श्राद्ध करने से सभी दिवंगत मातृ पितृ तृप्त हो जाते हैं और जीवन में आपको सुख समृद्धि प्राप्त होती है। इस दिन अगर आप श्राद्ध कर रहे हैं तो आपको महिलाओं को भोजन करवाना चाहिए या उन्हें उपहार देना चाहिए। खासकर ब्राह्मण पत्नी को भोजन करवाने का इस दिन विधान है। साल 2026 पितृपक्ष के दौरान नवमी तिथि का श्राद्ध 4 अक्टूबर को किया जाएगा। 

अमावस्या तिथि का महत्व 

पितृपक्ष की समाप्ति अमावस्या के श्राद्ध के साथ ही होती है। इस दिन को पितृपक्ष में सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। इस दिन उन पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु की तिथि ज्ञात न हो, जिनकी मृत्यु किसी दुर्घटना या फिर प्राकृतिक आपदा के दौरान हुई हो। इसके साथ ही सभी भूले-बिसरे पितरों की आत्मा को शांत करने के लिए भी अमावस्या तिथि का श्राद्ध किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्राद्ध करने से पितृदोष से मुक्ति तो मिलती ही है साथ ही पारिवारिक जीवन में भी सुखद बदलाव आने लगते हैं। अमावस्या श्राद्ध वाले दिन दान-पुण्य करना और गाय, कुत्ता, कौवा, चींटी आदि को भोजन करना भी शुभ माना गया है। आपको बता दें कि साल 2026 में पितृपक्ष की अमावस्या तिथि 10 अक्टूबर को है। 

अमावस्या पितृपक्ष की अंतिम तिथि होती है और इस दिन पितृ पृथ्वी लोक से विदा लेते हैं, ऐसे में अगर आप श्राद्ध या तर्पण भले ही न करें लेकिन पितरों के निमित्त दक्षिण दिशा में आपको दीपक अवश्य जलाना चाहिए। ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद आपको प्राप्त हो सकता है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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