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Saraswati Ashtottara Shatnam Namavali PDF: सरस्वती अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र क्या है, इसका पाठ करने से क्या फल मिलता है

 Written By: Naveen Khantwal
 Published : Sep 28, 2025 01:07 pm IST,  Updated : Sep 29, 2025 10:41 am IST

Sarasvati Ashtottara Shatnam Namavali PDF: श्री सरस्वती अष्टोत्तरनामावली में माता ज्ञान और बुद्धि की देवी माता सरस्वती के 108 नाम हैं। इन नामों को जप करने से माता सरस्वती की कृपा भक्तों पर बरसती है।

Saraswati Ashtotar Shatnam Stotra- India TV Hindi
सरस्वती अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र Image Source : FREEPIK

Sarasvati Ashtottara Shatnam Namavali: श्री सरस्वती अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र में माता सरस्वती के 108 नाम हैं। इस नामावली का पाठ यूं तो हमेशा करना ही शुभ होता है लेकिन सरस्वती पूजन के दौरान इसका जप करने से बेहद शुभ फलों की प्राप्ति भक्तों को होती है। शारदीय नवरात्रि के दौरान चार दिवसीय सरस्वती पूजन के दौरान भी श्री सरस्वती अष्टोत्तरनामावली का पाठ करना चाहिए। आपको बता दें कि 29 सितंबर 2025 से 2 अक्टूबर 2025 तक सरस्वती पूजा है। नीचे पढ़ें श्री सरस्वती अष्टोत्तरनामावली और इसके लाभ के बारे में। 

श्री सरस्वती अष्टोत्तर शतनाम नामावली

ॐ सरस्वत्यै नमः।

ॐ महाभद्रायै नमः।
ॐ महामायायै नमः।
ॐ श्रीप्रदायै नमः।
ॐ वरप्रदायै नमः।
ॐ पद्मनिलयायै नमः।
ॐ पद्माक्ष्यै नमः।
ॐ पद्मवक्त्रायै नमः।
ॐ शिवानुजायै नमः।
ॐ पुस्तकभृते नमः ॥10॥

ॐ ज्ञानमुद्रायै नमः।
ॐ रमायै नमः।
ॐ परायै नमः।
ॐ कामरूपायै नमः।
ॐ महाविद्यायै नमः।
ॐ महापातक नाशिन्यै नमः।
ॐ महाश्रयायै नमः।
ॐ मालिन्यै नमः।
ॐ महाभोगायै नमः।
ॐ महाभुजायै नमः ॥20॥

ॐ महाभागायै नमः।
ॐ महोत्साहायै नमः।
ॐ दिव्याङ्गायै नमः।
ॐ सुरवन्दितायै नमः।
ॐ महाकाल्यै नमः।
ॐ महापाशायै नमः।
ॐ महाकारायै नमः।
ॐ महांकुशायै नमः।
ॐ पीतायै नमः।
ॐ विमलायै नमः ॥30॥

ॐ विश्वायै नमः।
ॐ विद्युन्मालायै नमः।
ॐ वैष्णव्यै नमः।
ॐ चन्द्रिकायै नमः।
ॐ चन्द्रवदनायै नमः।
ॐ चन्द्रलेखाविभूषितायै नमः।
ॐ सावित्र्यै नमः।
ॐ सुरसायै नमः।
ॐ देव्यै नमः।
ॐ दिव्यालंकारभूषितायै नमः ॥40॥

ॐ वाग्देव्यै नमः।
ॐ वसुधायै नमः।
ॐ तीव्रायै नमः।
ॐ महाभद्रायै नमः।
ॐ महाबलायै नमः।
ॐ भोगदायै नमः।
ॐ भारत्यै नमः।
ॐ भामायै नमः।
ॐ गोविन्दायै नमः।
ॐ गोमत्यै नमः ॥50॥

ॐ शिवायै नमः।
ॐ जटिलायै नमः।
ॐ विन्ध्यावासायै नमः।
ॐ विन्ध्याचलविराजितायै नमः।
ॐ चण्डिकायै नमः।
ॐ वैष्णव्यै नमः।
ॐ ब्राह्मयै नमः।
ॐ ब्रह्मज्ञानैकसाधनायै नमः।
ॐ सौदामिन्यै नमः।
ॐ सुधामूर्त्यै नमः ॥60॥

ॐ सुभद्रायै नमः।
ॐ सुरपूजितायै नमः।
ॐ सुवासिन्यै नमः।
ॐ सुनासायै नमः।
ॐ विनिद्रायै नमः।
ॐ पद्मलोचनायै नमः।
ॐ विद्यारूपायै नमः।
ॐ विशालाक्ष्यै नमः।
ॐ ब्रह्मजायायै नमः।
ॐ महाफलायै नमः ॥70॥

ॐ त्रयीमूर्त्यै नमः।
ॐ त्रिकालज्ञायै नमः।
ॐ त्रिगुणायै नमः।
ॐ शास्त्ररूपिण्यै नमः।
ॐ शुम्भासुरप्रमथिन्यै नमः।
ॐ शुभदायै नमः।
ॐ स्वरात्मिकायै नमः।
ॐ रक्तबीजनिहन्त्र्यै नमः।
ॐ चामुण्डायै नमः।
ॐ अम्बिकायै नमः ॥80॥

ॐ मुण्डकायप्रहरणायै नमः।
ॐ धूम्रलोचनमर्दनायै नमः।
ॐ सर्वदेवस्तुतायै नमः।
ॐ सौम्यायै नमः।
ॐ सुरासुर नमस्कृतायै नमः।
ॐ कालरात्र्यै नमः।
ॐ कलाधारायै नमः।
ॐ रूपसौभाग्यदायिन्यै नमः।
ॐ वाग्देव्यै नमः।
ॐ वरारोहायै नमः ॥90॥

ॐ वाराह्यै नमः।
ॐ वारिजासनायै नमः।
ॐ चित्राम्बरायै नमः।
ॐ चित्रगन्धायै नमः।
ॐ चित्रमाल्यविभूषितायै नमः।
ॐ कान्तायै नमः।
ॐ कामप्रदायै नमः।
ॐ वन्द्यायै नमः।
ॐ विद्याधरसुपूजितायै नमः।
ॐ श्वेताननायै नमः ॥100॥

ॐ नीलभुजायै नमः।
ॐ चतुर्वर्गफलप्रदायै नमः।
ॐ चतुरानन साम्राज्यायै नमः।
ॐ रक्तमध्यायै नमः।
ॐ निरंजनायै नमः।
ॐ हंसासनायै नमः।
ॐ नीलजङ्घायै नमः।
ॐ ब्रह्मविष्णुशिवान्मिकायै नमः ॥108॥

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श्री सरस्वती अष्टोत्तरनामावली पाठ के लाभ 

श्री सरस्वती अष्टोत्तर नामावली का पाठ करने से माता सरस्वती की कृपा भक्तों पर बरसती है। इसका पाठ करने से ज्ञान और बुद्धि का विकास होता है। कला के क्षत्रों में आपको सफलता मिलती है और आपकी रचनात्मकता को नया आयम मिलता है। श्री सरस्वती अष्टोत्तरनामावली के पाठ से आपका आत्मविश्वास भी बढ़ता है। अगर आप आध्यात्मिक पथ पर अग्रसर हैं तो आपको अलौकिक अनुभव प्राप्त होते हैं। विद्यार्थी इसका पाठ करके शिक्षा क्षेत्र में आशातीत फल प्राप्त कर सकते हैं। 

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