1. Hindi News
  2. धर्म
  3. वैष्णो देवी के पुराने मार्ग से नया मार्ग कैसे है अलग? जानें कितनी कम है दूरी

वैष्णो देवी के पुराने मार्ग से नया मार्ग कैसे है अलग? जानें कितनी कम है दूरी

 Written By: Naveen Khantwal
 Published : Aug 27, 2025 03:16 pm IST,  Updated : Aug 27, 2025 03:50 pm IST

माता वैष्णो देवी के दरबार में पहुंचने के लिए अब दो मार्ग हैं। पुराना मार्ग जिसमें हाथीमाथा जैसी कठिन चढ़ाई आती है वहीं नए मार्ग में तीर्थयात्रियों को रिक्शा से यात्रा करने की सुविधा भी मिलती है। ऐसे में आइए जान लेते हैं कि माता वैष्णो देवी जाने के नए और पुराने मार्ग में क्या अंतर है।

Vaishno Devi Marg- India TV Hindi
वैष्णो देवी मार्ग Image Source : PTI

माता वैष्णो देवी के दर्शन हर साल लाखों भक्त करते हैं। समय के साथ-साथ माता वैष्णो मंदिर का रास्ता सुगम और सरल हो रहा है। हालांकि प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में वैष्णो देवी मार्ग अक्सर आ जाता है। ऐसी ही एक दुर्घटना 26 अगस्त को भी हुई जब माता वैष्णो देवी मार्ग पर भीषण भूस्खलन हुआ और जानमाल का नुकसान भी हुआ, बताया जा रहा है कि यह दुर्घटना पुराने मार्ग पर हुई है। ऐसे में आज हम आपको बताने वाले हैं कि वैष्णो देवी के नए मार्ग और पुराने मार्ग में क्या अंतर है। 

वैष्णो देवी मंदिर जाने का पुराना रास्ता

वैष्णो देवी के पुराने रास्ते की शुरुआत कटरा में बाणगंगा से होती है। इस मार्ग में चरण पादुका के बाद अर्धकुंवारी पहुंचते हैं। यह वैष्णो देवी तक पहुंचने का मूल मार्ग है। इस मार्ग में चलते हुए तीर्थयात्रियों को हाथीमाथा जैसी कठिन चढ़ाई भी करनी पड़ती है। हालांकि इस रास्ते में अब कुछ वैकल्पिक मार्ग भी बनाए गए हैं जो यात्रा को पहले के मुकाबले थोड़ा आसान कर देते हैं। हालांकि तब भी यह रास्ता नए रास्ते से अधिक कठिन है। अर्धकुंवारी के बाद सांझी छत होते हुए भक्त वैष्णो देवी के दरबार पहुंचते हैं। इस मार्ग पर घोड़े, खच्चर तीर्थयात्रियों के द्वारा इस्तेमाल किए जाते हैं।  

Vaishno Devi Marg
Image Source : INDIA TV वैष्णो देवी मार्ग

वैष्णो देवी मंदिर जानें का नया रास्ता

वैष्णो देवी के मंदिर जाने का नया मार्ग भी शुरू कटरा से ही होता है। बाणगंगा होते हुए भक्त तारकोट मार्ग के रास्ते अर्धकुंवारी पहुंचते हैं। यानि नए और पुराने दोनों ही मार्गों से अर्धकुंवारी पहुंचा जाता है। अर्धकुंवारी के बाद हिमकोटी होते हुए भक्त वैष्णो देवी माता के भवन पहुंचते हैं, इसके बाद अंत में भैरव घाटी भक्त जाते हैं। यह मार्ग पुराने मार्ग से काफी सुगम है। इस मार्ग पर यात्रियों को बैटरी रिक्शा की सुविधा भी मिलती है। यह मार्ग पुराने मार्ग की तुलना में चौड़ा और कम चढ़ाई वाला है। आपका बता दें कि पुराने मार्ग से नया रास्ता 500 मीटर यानि आधा किलोमीटर कम है। 

ये भी पढ़ें- 

Rishi Panchami Puja Samagri 2025: ऋषि पंचमी की पूजा में क्या-क्या सामान लगेगा, यहां चेक करें पूरी सामग्री लिस्ट

हिंदू धर्म में कौन से भगवान सबसे बड़े हैं? आप की अदालत में बागेश्वर बाबा ने दूर किया भक्तों का कन्फ्यूजन

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। धर्म से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।