1. Hindi News
  2. खेल
  3. अन्य खेल
  4. भारतीय मुक्केबाजी के पहले द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता कोच ओ पी भारद्वाज का हुआ निधन

भारतीय मुक्केबाजी के पहले द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता कोच ओ पी भारद्वाज का हुआ निधन

 Edited By: Bhasha
 Published : May 21, 2021 12:39 pm IST,  Updated : May 21, 2021 12:39 pm IST

भारद्वाज को 1985 में द्रोणाचार्य पुरस्कार शुरू किये जाने पर बालचंद्र भास्कर भागवत (कुश्ती) और ओ एम नांबियार (एथलेटिक्स) के साथ प्रशिक्षकों को दिये जाने वाले इस सर्वोच्च पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

Dronacharya Award, OP Bhardwaj, Sports, Boxing  - India TV Hindi
Boxing   Image Source : GETTY

मुक्केबाजी में भारत के पहले द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता कोच ओ पी भारद्वाज का लंबी बीमारी और उम्र संबंधी परेशानियों के कारण शुक्रवार को निधन हो गया। वह 82 वर्ष के थे। उनकी पत्नी संतोष का 10 दिन पहले ही बीमारी के कारण निधन हो गया था। भारद्वाज को 1985 में द्रोणाचार्य पुरस्कार शुरू किये जाने पर बालचंद्र भास्कर भागवत (कुश्ती) और ओ एम नांबियार (एथलेटिक्स) के साथ प्रशिक्षकों को दिये जाने वाले इस सर्वोच्च पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

पूर्व मुक्केबाजी कोच और भारद्वाज के परिवार के करीबी मित्र टी एल गुप्ता ने पीटीआई -भाषा से कहा, ''स्वास्थ्य संबंधी कई परेशानियों के कारण वह पिछले कई दिनों से अस्वस्थ थे और अस्पताल में भर्ती थे। उम्र संबंधी परेशानियां भी थी और 10 दिन पहले अपनी पत्नी के निधन से भी उन्हें आघात पहुंचा था। '' 

यह भी पढ़ें- इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड का बड़ा बयान, टेस्ट सीरीज में बदलाव के लिए बीसीसीआई ने नहीं किया है आग्रह

भारद्वाज 1968 से 1989 तक भारतीय राष्ट्रीय मुक्केबाजी टीम के कोच थे। वह राष्ट्रीय चयनकर्ता भी रहे। उनके कोच रहते हुए भारतीय मुक्केबाजों ने एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल और दक्षिण एशियाई खेलों में पदक जीते। 

गुप्ता ने कहा, ‘‘उन्होंने पुणे में सेना स्कूल एवं शारीरिक प्रशिक्षण केंद्र में अपना करियर शुरू किया और सेना मशहूर कोच बने। राष्ट्रीय खेल संस्थान (एनआईएस) ने 1975 में जब मुक्केबाजी में कोचिंग डिप्लोमा का प्रस्ताव रखा तो भारद्वाज को पाठ्यक्रम की शुरुआत के लिय चुना गया था। मुझे गर्व है कि मैं उनके शुरुआती शिष्यों में शामिल था।’’ 

यह भी पढ़ें- साउथ अफ्रीका के पूर्व कप्तान ग्रीम स्मिथ पर लगा नस्लवाद का गंभीर आरोप

उन्होंने 2008 में कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी को भी दो महीने तक मुक्केबाजी के गुर सिखाये थे। पूर्व राष्ट्रीय कोच गुरबख्श सिंह भी उनके शुरुआती शिष्यों में शामिल थे। सिंह ने कहा, ‘‘मेरी भारद्वाज जी के साथ बहुत अच्छी दोस्ती थी। मैं एनआईएस में उनका शिष्य और सहायक था। उन्होंने ही भारतीय मुक्केबाजों को आगे तक पहुंचाने की नींव रखी थी। ’’ 

राष्ट्रीय महासंघ के पूर्व महासचिव ब्रिगेडियर (सेवानिवृत) पी के एम राजा ने कहा कि भारद्वाज का खेल में अपने योगदान के लिये बहुत सम्मान था। उन्होंने कहा, ‘‘वह सेना खेल नियंत्रण बोर्ड के दिग्गज थे। सही मायनों में वह बेहतरीन कोच और प्रभावशाली व्यक्ति थे। ’’ 

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Other Sports से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें खेल