Amazon जल्द ही अपनी नई D2D सर्विस लॉन्च करने वाला है। अमेजन की यह सैटेलाइट बेस्ड सर्विस Starlink के डायरेक्ट-टू-डिवाइस सर्विस की तरह ही होगा, जिसमें इंटरनेट सर्विस डायरेक्ट फोन में एक्सेस किया जा सकेगा। स्टारलिंक ने इससे पहले अमेरिकी टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर T-Mobile के साथ मिलकर डायरेक्ट-टू-डिवाइस (D2D) सर्विस टेस्ट की थी। अमेजन भी अपनी इसी सर्विस को टेस्ट कर रहा है।
सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, अमेजन ने इस साल अप्रैल में ही अपनी सैटेलाइट बेस्ड डायरेक्ट-टू-डिवाइस सर्विस को लॉन्च करने को लेकर संकेत दे दिए थे। कंपनी इसके लिए प्रमुख सैटेलाइट ऑपरेटर ग्लोबलस्टार का अधिग्रहण करने वाली है।
क्या है D2D टेक्नोलॉजी?
जैसा कि नाम से ही साफ है कि D2D यानी डायरेक्ट-टू-डिवाइस टेक्नोलॉजी में किसी मोबाइल टावर का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। यह टेक्नोलॉजी एक मोबाइल फोन या डिवाइस को दूसरे डिवाइस के साथ डायरेक्ट सैटेलाइट के माध्यम से कनेक्टिविटी प्रदान करती है। इसमें मोबाइल को डायरेक्ट अंतरिक्ष में घूम रहे LEO यानी लो अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट से सिग्नल प्राप्त होता है।
इस टेक्नोलॉजी का फायदा ये है कि आपको हर जगह कनेक्टिविटी मिलेगी। आप चाहे जंगल में हो या समंदर के किनारे या किसी रेगिस्तान में ही क्यों न हो, आपको मोबाइल पर सिग्नल मिलेगी। आप अपने फोन से किसी के साथ संपर्क कर सकेंगे। स्टारलिंक ने D2D सर्विस के लिए अमेरिकी मोबाइल ऑपरेटर T-Mobile और Verizon के साथ साझेदारी की है।
क्या है अमेजन की तैयारी?
अमेजन अपने LEO सैटेलाइट्स को Globalstar के इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ जोड़ने वाला है, जिसके जरिए यूजर्स को डायरेक्ट सैटेलाइट से सिग्नल मिलेंगे। इस सर्विस का फायदा दूर-दराज में रहने वाले लोगों को मिलने वाला है। खास तौर पर उन एरिया में जहां मोबाइल नेटवर्क या तो मौजूद नहीं है या फिर नेटवर्क का सिग्नल काफी कमजोर है।
सैटेलाइट बेस्ड कनेक्टिविटी का सबसे बड़ा फायदा इमरजेंसी के समय मिलेगा, जब लोगों को रेसक्यू करने के लिए संपर्क किया जा सकेगा। हालांकि, D2D सर्विस सैटेलाइट इंटरनेट से बिलकुल अलग होगी। इसमें किसी राउटर या छतरी की जरूरत नहीं होगी, जो सैटेलाइट से आने वाले सिग्नल को कैच कर सके। इसमें सीधे मोबाइल डिवाइस में ही सैटेलाइट से सिग्नल मिलेंगे।
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