TRAI के सस्ते रिचार्ज प्लान लाने के प्रस्ताव पर टेलीकॉम ऑपरेटर्स की प्रतिक्रिया सामने आई है। देश की तीनों निजी टेलीकॉम कंपनियां जियो, एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया ने ग्राहकों को सस्ते वॉइस कॉलिंग और SMS वाले प्लान लाने वाले TRAI के प्रस्ताव पर अपनी प्रतिक्रिया दी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, निजी कंपनियां सरकार के इस प्रस्ताव से सहमत नहीं हैं और उन्होंने रेगुलेटर को इसके नुकसान बताए हैं।
प्रस्ताव मानने से इनकार
TRAI ने पिछले दिनों टेलीकॉम कंपनियों को प्रस्ताव दिया था कि वो यूजर्स के लिए ऐसे सस्ते प्लान लेकर आएं, जिनमें केवल कॉलिंग और मैसेज की सुविधा हो और डेटा यानी इंटरनेट की सुविधा न हो। हालांकि, दूरसंचार नियामक के इस प्रस्ताव को निजी टेलीकॉम कंपनियों ने मानने से साफ इनकार कर दिया है और इसकी वजह भी बताई है। टेलीकॉम ऑपरेटर्स का कहना है कि इससे साइबर क्राइम के मामले में तेजी से इजाफा हो सकता है।
दूरसंचार नियामक ने टेलीकॉम ऑपरेटर्स को प्रस्ताव दिया था कि वो ऐसे कुछ सस्ते प्लान लेकर आएं, जिनमें वैलिडिटी भले ही कम हो लेकिन यूजर्स को वॉइस कॉलिंग और मैसेज की सुविधा मिल सके। ET Telecom की रिपोर्ट के मुताबिक, टेलीकॉम ऑपरेटर्स टैरिफ में फिलहाल किसी बदलाव के मूड में नहीं हैं। ऑपरेटर्स का कहना है कि जो प्लान फिलहाल चल रहा है उसे ऐसे ही रहने दिया जाए।
बढ़ जाएंगे साइबर क्राइम के मामले
टेलीकॉम ऑपरेटर्स का तर्क है कि अगर सिर्फ कॉलिंग और मैसेज करने वाले सस्ते और कम वैलिडिटी वाले प्लान अनिवार्य कर दिए गए तो इससे ऑनलाइन फ्रॉड वाले आपराधिक एक्टिविटीज तेजी से बढ़ सकते हैं। ऑपरेटर्स का मानना है कि सस्ते प्लान मिलने से साइबर क्रिमिनल्स आसानी से कई सिम खरीद लेंगे और यूजर्स को फर्जी विज्ञापन, कॉल्स और फ्रॉड लिंक मैसेज के जरिए भेजकर ठगी का शिकार बना सकते हैं। ऐसा करने से देश में साइबर क्राइम के मामलों में तेजी से इजाफा हो सकता है।
बता दें 15 जून यानी कल TRAI ने कंज्यूमर प्रोटेक्शन रेगुलेशन में बदलाव के लिए एक ओपन-हाउस डिस्कशन का आयोजन किया था। इसमें टेलीकॉम रेगुलेटर ने सिर्फ वॉइस और कॉलिंग वाले प्लान को सस्ते में लाने का प्रस्ताव रखा गया। टेलीकॉम ऑपरेटर्स का कहना है कि यह प्रस्तावित बदलाव प्रैक्टिकल तौर पर संभव नहीं है।
तकनीकी समस्या
आज की 4G और 5G सर्विस पूरी तरह से इंटरनेट प्रोटोकॉल पर बेस्ड हैं। वॉइस केवल एक एप्लीकेशन है, जो पूरी तरह से इंटरनेट प्रोटोकॉल पर बेस्ड है। ऐसे में डेटा नेटवर्क से कॉल को अलग करना मुमकिन नहीं है।
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