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Spam Call पर TRAI की सख्ती, जारी हुए नए नियम, फर्जी ऑटोमैटेड कॉल्स पर लगेगी लगाम

 Written By: Harshit Harsh
 Published : Sep 21, 2026 12:11 pm IST,  Updated : Sep 21, 2026 12:11 pm IST

TRAI ने ऑटोमैटेड स्पैम कॉल्स के लिए नियमों में बदलाव किया है। नए नियम के मुताबिक, टेलीकॉम ऑपरेटर्स को ऐसे नंबरों की निगरानी करनी होगी, जिनका इस्तेमा ऑटोमैटेड कमर्शियल कॉलिंग के लिए होता है।

Spam Calls- India TV Hindi
स्पैम कॉल का नया नियम Image Source : UNSPLASH

TRAI ने फर्जी कमर्शियल कॉल्स से निपटने के लिए अपने नियमों को और सख्त कर दिया है। नए नियम के तहत संदिग्ध स्पैम की पहचान के लिए एआई बेस्ड तरीकों को शामिल किया गया है। साथ ही, ऑटोमैटेड कॉल्स के लिए नए नियम लागू किए गए हैं। संशोधित नियमों के मुताबिक, टेलीकॉम ऑपरेटर्स को संदिग्ध स्पैम एक्टिविटी से जुड़े नंबरों की जानकारी शेयर करनी होगी। यही नहीं, एक्टिविटी से जुड़े कई नंबरों पर संदेह होने पर आगे की जांच की अनुमति दी गई है।

सख्त हुए स्पैम कॉल्स के नियम

नए फ्रेमवर्क में ऑटोमैटेड कॉल्स के लिए टर्मिनेशन चार्ज भी लागू किया गया है। इसके अलावा कंज्यूमर्स को अपील करने की भी सुविधा दी गई है। इसके अलावा कॉल मैनेजमैंट ऐप्स पर भी नए नए प्रतिबंध लगाए गए हैं। दूरसंचार नियामक ने टेलीकॉम ऑपरेटर्स को अपने नए आदेश में कहा है कि AI बेस्ड मॉडल का इस्तेमाल करके उन नंबरों की पहचान करें और जानकारी शेयर करें, जिनपर उन्हें संदेह हो। जांच के बाद टेलीकॉम ऑपरेटर्स को उन नंबरों पर एक्शन लेने की भी अनुमति दी गई है।

ब्लॉक होंगे नंबर

TRAI के मुताबिक, अगर टेलीकॉम ऑपरेटर्स ऐसे 5 या इससे ज्यादा नंबर 10 दिनों के अंदर फ्लैग करते हैं तो उनका री-वेरिफिकेशन और फिजिकल वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा। इसके बाद आउटगोइंग सर्विस के ब्लॉक करने जैसा एक्शन भी लिया जाएगा। नए नियम में ऑटोमैटेड कमर्शियल कॉल्स वाले नंबर को भी शामिल किया गया है।

दूरसंचार नियामक ने इसे ऐप टू पर्सन (A2P) कम्युनिकेशन का नाम दिया है। ये कॉल्स सॉफ्टवेयर सिस्टम और ऑटोमैटेड प्लेटफॉर्म्स के जरिए किए जाते हैं। इसमें कोई पर्सन नंबर डायल नहीं करता है। मशीन के द्वारा नंबर डायल करके लोगों को कॉल किया जाता है। ये ऑटोमैटेड, रोबोकॉल्स, प्री-रिकॉर्डेड मैसेज और कॉल्स की श्रेणी में आते हैं।

टेलीकॉम ऑपरेटर से साझा करनी होगी जानकारी

बिजनेस या अन्य एंटिटी को अपने A2P कॉलिंग सिस्टम की जानकारी टेलीकॉम ऑपरेटर को देनी होगी। साथ ही, उन्हें उन नंबरों की जानकारी साझा करनी होगी, जिनके जरिए इस तरह के कॉल्स ग्राहकों को किए जाते हैं। अगर, बिजनेस या एंटिटी ऐसा करने में नाकाम होते हैं, तो उन नंबरों और कॉल्स को अनसोलिसिटेड कमर्शियल कम्युनिकेशन की तरह ट्रीट किया जाएगा और एक्शन लिया जाएगा।

नए नियम के तहत A2P कम्युनिकेशन में इस्तेमाल किए गए नंबरों से 5 पैसे प्रति मिनट की दर से टर्मिनेशन चार्ज भी वसूला जाएगा। हालांकि, ट्राई उन नंबरों को इनमें शामिल नहीं करेगा, जो पहले से ही रेगुलेटेड कमर्शियल कम्युनिकेशन के लिए डिजाइन किए गए हैं। ग्राहकों को नए नियम से ये फायदा मिलने वाला है कि वो अपने नंबर पर आने वाले फर्जी A2P कॉल्स को रिपोर्ट कर सकते हैं। इसके बाद दूरसंचार नियामक द्वारा इन नंबरों पर एक्शन लिया जाएगा।

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