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'कुर्सी बचाओ की तर्ज पर ये बजट, NDA का मतलब नायडू-नीतीश डेवलपमेंट...', केंद्र पर फूटा रेवंत रेड्डी का गुस्सा

 Published : Jul 23, 2024 06:15 pm IST,  Updated : Jul 23, 2024 07:07 pm IST

संसद में आज पेश हुए बजट पर विपक्षी नेता जमकर निशाना साध रहे हैं। सरकार की योजनाओं पर सवाल खड़े रहे हैं। तेंलगाना के सीएम ने आरोप लगाया कि उनके राज्य के लिए बजट में कुछ खास नहीं है।

तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी- India TV Hindi
तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी Image Source : FILE PHOTO-PTI

केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में बजट पेश किया। इस बजट पर विपक्षी नेता सवाल खड़े कर रहे हैं। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा कि ये बजट विकसित भारत या सबका साथ, सबका विकास के नारे पे नहीं ब्लकि कुर्सी बचाओ के तर्ज पर है। संसद में 2024 का बजट पेश होने के बाद ऐसा ही लग रहा है। रेड्डी ने कहा कि तेलंगाना से चुने 8 बीजेपी सांसदों की मदद से नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने हैं लेकिन उन्हीं वोटरों के लिए कुछ नहीं किया है।

राज्यों के लिए PM होता है बड़े भाई जैसा- रेड्डी

सीएम रेड्डी ने कहा कि हम बड़े भाई की तरह देख रहे हैं लेकिन वो हमारे राज्य के खिलाफ काम कर रहे हैं। आंध्र विभाजन का मतलब केवल आंध्र के लिए नहीं बल्कि तेलंगाना की जरूरतों को देखना भी केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है। एनडीए का मतलब नायडू, नीतीश डेवलपमेंट अलायंस है। राज्यों के लिए पीएम बड़ा भाई जैसा होता है, लेकिन वो ऐसा नहीं मान रहे हैं।

दक्षिण राज्यों को वोट के लिए इस्तेमाल कर रहे PM मोदी

तेलंगाना के सीएम ने कहा कि वह दक्षिण राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मुलाकात करना चाहते हैं। तमिलनाडु और केरला के मुख्यमंत्रियों से संपर्क में हैं। पीएम मोदी दक्षिण राज्यों को वोट के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। हमारे संसाधनों का अपने राजनीतिक जरूरतों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।

बजट में आयकर मोर्चे पर किए गए बदलाव

बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट में आयकर मोर्चे पर कुछ बदलावों की घोषणा करते हुए मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों को राहत दी है। साथ ही अगले पांच साल में रोजगार सृजन से जुड़ी योजनाओं के लिए दो लाख करोड़ रुपये के व्यय और नए गठबंधन सहयोगियों के राज्यों के लिए अधिक राशि का प्रावधान किया गया है। 

ग्रामीण विकास के लिए 2.66 लाख करोड़ रुपये का बजट

भाजपा को लोकसभा में चुनाव में बहुमत नहीं मिलने के लिए ग्रामीण संकट और बेरोजगारी को जिम्मेदार ठहराया गया था। इसके बीच सीतारमण ने बजट में ग्रामीण विकास के लिए 2.66 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया और आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए 11. 11 लाख करोड़ रुपये रखे हैं। 

भाषा के इनपुट के साथ

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