त्योहारी सीजन के दौरान कुछ उपभोक्ता-केंद्रित क्षेत्रों में तेजी देखी गई, जबकि शहरी उपभोक्ता भावना में थोड़ी गिरावट आई, तथा खनन और बिजली जैसे अन्य क्षेत्रों में पिछली तिमाही में मौसम संबंधी चुनौतियों के बाद सुधार देखा गया।
अर्थशास्त्रीने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत के लिए विकास के दृष्टिकोण से वैश्विक बाजार कम प्रासंगिक हो गया है, और कहा कि वैश्विक घटनाएं विपरीत हैं, लेकिन अर्थव्यवस्था उनके बीच लचीली हो सकती है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) 28 फरवरी को अक्टूबर-दिसंबर के वृद्धि अनुमान जारी करेगा। यह चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी का दूसरा अग्रिम अनुमान भी जारी करेगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में 2025-26 का बजट पेश करते हुए कहा कि नई कर व्यवस्था में छूट के माध्यम से मध्यम वर्ग के करों में काफी कमी आएगी और उनके हाथ में अधिक पैसा बचेगा, जिससे घरेलू उपभोग, बचत और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्य आर्थिक सलाहकार का कहना है कि ग्लोबलाइजेशन यानी वैश्वीकरण का युग खत्म हो चुका है। ग्लोबलाइजेशन की अनुकूल हवाएं प्रतिकूल होती जा रही हैं। निवेश के मोर्चे पर और व्यापार के मोर्चे पर भू-राजनीतिक और नीतिगत अनिश्चितता है, और वृद्धि अनुमान भी इसे दर्शाते हैं।
Economic Survey 2025: वित्त वर्ष 2024-25 का इकोनॉमिक सर्वे संसद में पेश हो गया है। इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 6.3 फीसदी से 6.8 फीसदी के बीच रह सकती है।
मूडीज एनालिटिक्स में सह-अर्थशास्त्री अदिति रमण ने कहा कि भारत 2025 में मुश्किल हालात का सामना कर रहा है। रुपये में आ रही कमजोरी, घटता विदेशी निवेश और अस्थिर मुद्रास्फीति सबसे बड़े आर्थिक जोखिम वाले क्षेत्र हैं।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ का कहना है कि भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट अपेक्षा से अधिक धीमी हो गई है। आईएमएफ ने बताया कि साल 2023 में भारत की वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत थी।
वर्ल्ड बैंक का अनुमान है कि अगले दो वित्त वर्षों में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 6.7 फीसदी पर स्टेबल रहेगी। वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 में साउथ एशिया की ग्रोथ रेट 6.2 फीसदी रहने का अनुमान है।
शर्मा ने कहा, आज 15 लाख रुपये एक मध्यम आय है और हम इसपर उच्चतम कर दर लगा रहे हैं। इस तरह की मध्यम आय पर कोई उच्चतम दर नहीं होनी चाहिए और यदि हम उपभोग अर्थव्यवस्था हैं तो उच्चतम दर भी 25 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष द्वारा लिखित रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रति व्यक्ति नाममात्र जीडीपी में मार्च 2025 को खत्म होने वाले चालू वित्त वर्ष में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।
वित्त वर्ष 2025 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर चार साल के निचले स्तर 6.4% रहने का अनुमान है। पिछले साल जीडीपी ग्रोथ 8.2% थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की संभावनाएं उज्ज्वल हैं, क्योंकि व्यापक आर्थिक बुनियादी मजबूत है। वित्त वर्ष 2024-25 के लिए वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि 6.6 प्रतिशत और वित्ती वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
आरबीआई ने वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (एफएसआर) का दिसंबर 2024 का अंक जारी किया है, जो भारतीय वित्तीय प्रणाली के लचीलेपन और वित्तीय स्थिरता के जोखिमों पर वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (एफएसडीसी) की उप-समिति के सामूहिक मूल्यांकन को दर्शाता है।
आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) में सचिव अजय सेठ ने सोमवार को कहा कि दूसरी तिमाही में 5.4 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि अनुमान से कम है लेकिन दूसरी छमाही बेहतर रहने का भरोसा है।
ग्रामीण मांग मजबूत बनी हुई है। अक्टूबर-नवंबर, 2024 के दौरान दोपहिया और तिपहिया वाहनों की बिक्री और घरेलू ट्रैक्टर की बिक्री में क्रमशः 23.2 प्रतिशत और 9.8 प्रतिशत की वृद्धि से इसका अनुमान लगाया जा सकता है। शहरी मांग बढ़ रही है।
‘ईवाई इकनॉमी वॉच दिसंबर’ 2024 में वित्त वर्ष 2024-25 (अप्रैल 2024 से मार्च 2024 वित्तीय वर्ष) और वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है।
2024-25 की तीसरी तिमाही के लिए उच्च आवृत्ति संकेतक (एचएफआई) संकेत देते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था दूसरी तिमाही में देखी गई मंदी से उबर रही है, जो मजबूत त्योहारी गतिविधि और ग्रामीण मांग में निरंतर वृद्धि से प्रेरित है।
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मौद्रिक, राजकोषीय और बाहरी सख्ती का सामना कर रही है। एजेंसी ने कहा कि हालांकि अब मौद्रिक स्थितियों में नरमी आने की उम्मीद है, लेकिन वित्तीय और सख्ती वित्त वर्ष 2026 में भी जारी रहने की उम्मीद है।
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कोलकाता में कहा कि 'एक राष्ट्र एक चुनाव' का प्रस्ताव चुनाव प्रक्रिया को प्रोत्साहन देगा और देश के आर्थिक विकास में मददगार साबित होगा।
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