सर्दियों के महीनों में इंफेक्शन की दर में वृद्धि, व्यायाम की कमी और हाई ब्लड प्रैशर, स्ट्रोक की बढ़ी हुई घटनाओं का कारण थे। सर्दियों के दौरान वायु काफी हद तक प्रदूषित रहती है। प्रदूषित वायु के कारण लोगों की छाती और हृदय की स्थिति और भी बिगड़ जाती है।
हवा में घुल चुके प्रदूषण से किसी भारतीय की उम्र डेढ़ साल तक कम हो जाती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि हवा की बेहतर गुणवत्ता से दुनियाभर में मनुष्य की उम्र बढ़ सकती है।
भारत में हर साल एक अनुमान के मुताबिक 18 लाख से ज्यादा स्ट्रोक के मामले सामने आते हैं। इनमें से लगभग 15 प्रतिशत मामले 30 और 40 वर्ष से ऊपर के लोगों को प्रभावित करते हैं।
धूम्रपान और शराब का अधिक सेवन जीवन भर के लिए तीव्र व अनियमित हृदय गति के जोखिम को बढ़ाता है, जो आगे चलकर स्ट्रोक, डिमेंशिया, दिल की विफलता और अन्य जटिलताओं का कारण बन सकता है जिसे एट्रियल फाइब्रिलेशन के रूप में जाना जाता हैं। एक नये अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है।
एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि हर साल 795,000 लोग कई तरह के स्ट्रोक का शिकार होते हैं। इनमें से 600,000 तो स्ट्रोक के साथ-साथ ब्लड प्रेशर, कॉलेस्ट्रोल जैसी बीमारी से ग्रसित हो जाते हैं।
भारत में ब्रेन स्ट्रोक मौत का दूसरा सबसे प्रमुख कारण है, देश में हर तीसरे सेकंड किसी को ब्रेन स्ट्रोक होता है और तीन मिनट में किसी की मृत्यु भी इसके कारण होती है। जानइए कैसे करें इसकी पहचान...
हर साल लगभग 18 लाख भारतीय इस हालत से पीड़ित हैं। जीवनशैली बदलने के चलते अब 40 साल से कम उम्र के युवाओं में भी यह बीमारी घर करती जा रही है। जानिए लक्षण, कारण और बचने के उपाय....
डॉक्टर्स का कहना है कि सर्दी के मौसम में विशेष सावधानी की जरूरत है। सर्दी शुरू होते ही ही हॉस्पिटल्स में ब्रेन स्ट्रोक, दमा, हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों की भीड़ लग रही है। वहीं दिल के मरीजों में 25 फीसदी इजाफा हुआ है। जानिए किन बातों का रखें ख्याल...
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