1. Hindi News
  2. वायरल न्‍यूज
  3. अमेरिका के हाईटेक कबाड़ी कमाते हैं मोटा पैसा, यकीन न हो तो ये Video देख लें; सच्चाई जानकर हैरत में पड़ जाएंगे

अमेरिका के हाईटेक कबाड़ी कमाते हैं मोटा पैसा, यकीन न हो तो ये Video देख लें; सच्चाई जानकर हैरत में पड़ जाएंगे

 Written By: Shaswat Gupta
 Published : Oct 18, 2026 07:58 am IST,  Updated : Oct 18, 2026 07:58 am IST

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में अमेरिका के हाईटेक कबाड़ी वाले की कमाई का खुलासा किया गया है।

Americas high tech kabadi video, Americas high tech kabaddi income, Americas high tech kabadi viral - India TV Hindi
अमेरिका के हाईटेक कबाड़ी का वीडियो वायरल। Image Source : IG/@CHILLOUT_1588_USA

भारत में कबाड़ी का नजारा आम है। गली-मोहल्ले में “लोहा, रद्दी-पेपर, ले आओ” का नारा लगाते हुए वे घर-घर घूमते हैं। लेकिन अमेरिका में कबाड़ी का सिस्टम पूरी तरह अलग और हाई-टेक है। इस अंतर को दिखाते हुए इंस्टाग्राम अकाउंट @chillout_1588_usa पर शेयर किए गए एक वीडियो ने सोशल मीडिया पर चर्चा छेड़ दी है। गौरतलब है कि, ये अकाउंट अमेरिका में रहने वाले भारतीयों और नए आने वालों को रोजमर्रा की टिप्स देता है। उनका यह वीडियो भारत और अमेरिका के कबाड़ी सिस्टम के अंतर को साफ दर्शाता है। जहां भारत में पारंपरिक तरीका चलता है, वहीं अमेरिका में टेक्नोलॉजी और नियमों ने इसे आधुनिक बना दिया है। 

कमाई का जरिया भी बताया

वीडियो में अमेरिका में रहने वालीं भारतीय मूल की कंटेंट क्रिएटर स्वाति अग्रवाल गुप्ता (@chillout_1588_usa) बताती हैं कि वहां कबाड़ी वाले “कैनर्स” कहलाते हैं। वे नारा नहीं लगाते। सरकारी नियमों के मुताबिक घर के बाहर रखे कूड़े से अपनी जरूरत की चीजें उठा लेते हैं। खासकर प्लास्टिक की पानी और सोडा की बोतलें इकट्ठा करते हैं। न्यूयॉर्क में एक खाली बोतल की कीमत फिक्स 5 सेंट है। भारत में जहां कई प्लास्टिक बोतलें बेकार समझी जाती हैं, वहां उनसे पैसा कमाया जा सकता है।  

बुजुर्ग आंटी ने कबाड़ का क्या कहा 

स्वाति अपने इलाके के कबाड़ियों का जिक्र करती हैं। एक बुजुर्ग आंटी और एक भाई नियमित रूप से आते हैं। आंटी दिनभर बोतलें इकट्ठा करती हैं, कार्ट पर रखती हैं और शाम को अच्छी खासी रकम लेकर घर लौटती हैं। यहां बोतलों को तौला नहीं जाता। उन्हें सुपरमार्केट के पास लगी रिवर्स वेंडिंग मशीन में डाला जाता है। मशीन एक-एक बोतल लेती है और पर्ची निकाल देती है। पर्ची को काउंटर पर जमा कर कैश मिल जाता है। पूरा सिस्टम डिजिटल और व्यवस्थित है।

'फुल डिजिटल इंडिया फी​ल'

वीडियो में स्वाति कहती हैं कि अमेरिका में कबाड़ बेचने में भी “फुल डिजिटल इंडिया से आगे” वाली फीलिंग आती है। वे खुद आंटी को बोतलें इकट्ठा करके दे देती हैं। उनका कहना है, “भले ही डॉलर वाली दुनिया हो, लेकिन दुआएं तो देशी ही काम आती हैं।” यह वीडियो देखकर यूजर्स हैरान हैं। कई कमेंट में लोग लिख रहे हैं कि अमेरिका का सिस्टम एडवांस है। कुछ कह रहे हैं कि यहां के कबाड़ी असली कबाड़ी नहीं लगते, क्योंकि वे चुपचाप काम करते हैं। भारत में कबाड़ी गली में आ जाते हैं और सबको आवाज देते हैं, जबकि अमेरिका में सिस्टम ने पूरे प्रोसेस को आसान और सम्मानजनक बना दिया है। 

अमेरिका में क्या है सिस्टम  

अमेरिका में रीसाइक्लिंग को प्रोत्साहन देने के लिए ऐसे सिस्टम बनाए गए हैं। बोतल डिपॉजिट लॉ कई राज्यों में लागू है, जिससे लोग खाली बोतलें लौटाकर पैसे वापस पा सकते हैं। कैनर्स इसी सिस्टम का फायदा उठाते हैं। बड़े स्तर पर स्क्रैप यार्ड और ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग प्लांट्स भी एआई, रोबोट और सेंसर तकनीक से लैस हैं, जहां धातुओं और इलेक्ट्रॉनिक्स से अच्छी कमाई होती है। लेकिन इस वीडियो में रोजमर्रा के छोटे कबाड़ियों का हाई-टेक और व्यवस्थित तरीका दिखाया गया है।

गौरतलब है कि, इससे पहले एक शख्स ने US में कार के बिना आने वाली दिक्कतों के बारे में वीडियो बनाकर शेयर किया था। 

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
ये भी पढ़ें -

Video: भारत से कितना अलग है अमेरिका के ऑफिस का वर्क कल्चर? भारतीय शख्स के दावों पर यूजर्स ने किया रिएक्ट 

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। वायरल न्‍यूज से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।