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भारत से किन मायनों में बेहतर है यूरोप, जर्मनी में रहने वाले भारतीय व्यक्ति ने बताया; Video Viral

 Written By: Shaswat Gupta
 Published : Jul 26, 2026 04:11 pm IST,  Updated : Jul 26, 2026 04:11 pm IST

सोशल मीडिया पर इन दिनों जर्मनी में रह रहे भारतीय का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें उसने यूरोप की क्वालिटी ऑफ लाइफ पर चर्चा की है।

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भारतीय शख्स का वीडियो वायरल। Image Source : IG/@BUILDWITHSATYAM

जर्मनी में रहने वाले एक भारतीय व्यक्ति ने यह बताकर एक बहस छेड़ दी है कि यूरोप में क्वालिटी ऑफ लाइफ कैसे बेहतर है। उनका मानना है कि, क्वालिटी ऑफ लाइफ को केवल उच्च वेतन, उन्नत प्रौद्योगिकी या स्वास्थ्य सुविधाओं से नहीं मापा जा सकता। उनके अनुसार, असली अंतर रोजमर्रा के बुनियादी ढांचे, सार्वजनिक स्थानों और शहरों द्वारा पैदल चलने वालों और साइकिल चालकों के साथ किए जाने वाले व्यवहार में दिखाई देता है। सत्यम सिंह नामक इंस्टाग्राम यूजर ने अपने घर के पास एक पार्क में बैठे हुए एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने यूरोप की की तुलना भारत में आमतौर पर देखी जाने वाली स्थितियों से की। 

इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया वीडियो 

इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @buildwithsatyam नामक हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो में उन्होंने ​कहा कि, 'अगर मैं आपसे कहूं कि यूरोप में क्वालिटी ऑफ लाइफ का रहस्य न तो उसकी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली है और न ही वहाँ के उच्च वेतन? तो फिर क्या है? आइए आज मैं आपको एक छोटा सा उदाहरण देता हूं। एक साधारण सी बात जो यूरोप को भारत से इतना अलग बनाती है।' पार्क को साफ-सुथरा और सुव्यवस्थित बताते हुए उन्होंने कहा कि वह आराम से अपनी डायरी लिख सकते थे जबकि बच्चे पास में खेल रहे थे और लोग शांत वातावरण में घूम रहे थे। उन्होंने आगे कहा, 'सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहां का बुनियादी ढांचा केवल कारों के लिए नहीं, बल्कि लोगों के लिए बनाया गया है। फुटपाथ इतने चौड़े हैं कि कभी-कभी वे सड़कों से भी अधिक चौड़े लगते हैं, और साइकिल चालकों के लिए अलग लेन हैं।' उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि वाहन चालक साइकिल चालकों से तब तक सुरक्षित दूरी बनाए रखते हैं जब तक कि उन्हें ओवरटेक करने के लिए पर्याप्त जगह न मिल जाए। उन्होंने कहा कि वाहन का आकार, कीमत या लग्जरी चाहे जो भी हो, पैदल यात्रियों के ज़ेब्रा क्रॉसिंग पार करते समय वाहनों को रुकना अनिवार्य है।

भारत के साथ की यूरोप की तुलना 

भारत से तुलना करते हुए उन्होंने दावा किया कि महंगी या बड़ी गाड़ियां चलाने वाले लोग अक्सर पैदल चलने वालों और साइकिल सवारों की परवाह नहीं करते। उन्होंने आगे कहा कि लापरवाही से गाड़ी चलाने के कारण कभी-कभी गंभीर दुर्घटनाएं हो जाती हैं। उन्होंने कहा, 'इसीलिए लोग कहते हैं कि यूरोप में क्वालिटी ऑफ लाइफ अलग है। यह सिर्फ पैसे की बात नहीं है; यह रोजमर्रा की जिंदगी, सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की बात है। जब शहर कारों की बजाय लोगों को प्राथमिकता देते हैं, तो जीवन अपने आप बेहतर लगने लगता है।' कैप्शन में ​वे लिखते हैं कि, 'प्रगति हमेशा भव्य इमारतों या बड़ी परियोजनाओं में ही नहीं झलकती। इसमें कहा गया था कि सुव्यवस्थित सार्वजनिक स्थान, पैदल यात्रियों की सुरक्षा और यहां तक ​​कि एक साधारण फुटपाथ भी यह दर्शा सकता है कि कोई शहर अपने निवासियों को कितनी गंभीरता से लेता है।' 

यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं 

इस वीडियो को देखने के बाद यूजर्स ने कई तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। एक यूजर ने लिखा कि, 'मैं पूरी तरह सहमत हूं।'

दूसरे यूजर ने लिखा कि, 'भाई, मैंने पूरे भारत में काफी यात्रा की है, लेकिन मुझे कहीं भी ऐसा पार्क देखने को नहीं मिला।'
तीसरे यूजर ने लिखा कि, 'हां, यह सच ।'
चौथे यूजर ने लिखा कि, 'हां, मैं आपसे सहमत हूं।'
गौरतलब है कि, इसे पहले एक महिला ने भारत और यूरोप में गृहप्रवेश के अंतर को वीडियो में दिखाया था। 

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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