भारत के बड़े शहरों में खराब सड़कें, टूटे फुटपाथ और कचरे की समस्या अक्सर चर्चा में रहती है। इन समस्याओं के लिए जहां नागरिक नगर निगम और सरकार को जिम्मेदार ठहराते हैं, वहीं कनाडाई डिजिटल क्रिएटर कालेब फ्रीसेन ने लोगों से खुद भी आगे आकर बदलाव लाने की अपील की है। बेंगलुरु में रहने वाले फ्रिसेन की टिप्पणी, ‘भारत को देशभक्तों की जरूरत है, परजीवियों की नहीं’, सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन गई है।
एक्स पर शेयर की पोस्ट
इस पोस्ट को एक्स पर @caleb_friesen हैंडल से शेयर किया गया है। फ्रिसेन ने यह टिप्पणी बेंगलुरु की नागरिक सुविधाओं को लेकर शुरू हुई ऑनलाइन चर्चा के जवाब में की। उनकी बात को कुछ लोगों ने नागरिक जिम्मेदारी का संदेश बताया, जबकि अन्य ने सवाल उठाया कि जब लोग टैक्स देते हैं, तो सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी क्यों न हो?
अधिकारियों से संपर्क की दी सलाह
फ्रीसेन ने अपनी पोस्ट में इस सोच की आलोचना की कि टैक्स चुकाने के बाद नागरिकों की सार्वजनिक समस्याओं को सुलझाने में कोई भूमिका नहीं रह जाती। उनका कहना था कि यदि किसी इलाके का फुटपाथ टूटा हुआ है, सड़क पर गड्ढा है या कोई अन्य नागरिक समस्या है, तो लोगों को संबंधित अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए और समाधान मिलने तक लगातार प्रयास करना चाहिए। उन्होंने नागरिकों से समस्याओं के प्रति उदासीन रहने के बजाय सक्रिय, मुखर और रचनात्मक बनने की अपील की। उनके मुताबिक, शहरों को बेहतर बनाने के लिए केवल शिकायत करना पर्याप्त नहीं है; नागरिकों को समाधान की प्रक्रिया में भी भाग लेना चाहिए। उन्होंने X पर अपनी पोस्ट में लिखा, "मुझे लगता है कि असल में जरूरत इस बात की है कि भारतीय लोग अपने शहरों और साथी नागरिकों की परवाह करें। जो कोई भी 'मैं टैक्स देता हूँ, मुझे कुछ नहीं करना चाहिए' का बहाना इस्तेमाल करता है, उसे दूसरे देश में जाकर रहना चाहिए।"
कचरे के ढेर को फुटपाथ में बदलने की मिसाल
अपनी बात समझाने के लिए फ्रीसेन ने बेंगलुरु के स्थानीय निवासियों वीरेंद्र और अरुण पई के प्रयासों का उदाहरण दिया। स्थानीय नागरिकों, स्वयंसेवकों और ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के सहयोग से कचरे के ढेर में तब्दील हो चुकी जगह को साफ करके पैदल चलने योग्य फुटपाथ में बदलने का काम किया गया। जानकारी के अनुसार, इस पहल में लगभग 10 दिन लगे। इलाके को साफ करने के साथ दीवारों पर पेंटिंग भी बनाई गई। इनमें भारतीय तिरंगे और HAL तेजस लड़ाकू विमान से संबंधित चित्र शामिल थे। फ्रीसेन ने इस प्रयास को उदाहरण के तौर पर पेश किया कि जब स्थानीय लोग किसी समस्या को लेकर संगठित होते हैं और संबंधित संस्थाओं के साथ मिलकर काम करते हैं, तो सार्वजनिक स्थानों में बदलाव संभव हो सकता है।
सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
फ्रीसेन की टिप्पणी पर कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने सहमति जताई। उनका मानना था कि नागरिकों को केवल सरकार या पुलिस को दोष देने के बजाय अपने व्यवहार और जिम्मेदारियों पर भी ध्यान देना चाहिए। सार्वजनिक जगहों पर कचरा न फैलाना, यातायात नियमों का पालन करना और समस्याओं की शिकायत करना भी नागरिक भागीदारी का हिस्सा है। हालांकि, कई लोगों ने उनकी दलील पर असहमति जताई। आलोचकों का कहना था कि सड़कों, फुटपाथों और अन्य बुनियादी सुविधाओं का निर्माण तथा रखरखाव नागरिकों के बजाय संबंधित सरकारी विभागों और नगर निकायों की जिम्मेदारी है। कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि हर व्यक्ति के पास अपना समय और पैसा सामुदायिक परियोजनाओं में लगाने की सुविधा नहीं होती। मजदूरों, कम आय वाले परिवारों और लंबे समय तक काम करने वाले लोगों से ऐसी पहल की उम्मीद करना व्यावहारिक नहीं है।
गौरतलब है कि, इससे पहले इसी व्लॉगर ने बेंगलुरु में फुटपाथों की मरम्मत से जुड़ी पोस्ट शेयर की थी जो कि काफी वायरल हुई थी।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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