चमकदार कांच की इमारतें, रोशन खिड़कियां और आधुनिक कॉर्पोरेट ऑफिस बाहर से जितने आकर्षक लगते हैं, अंदर की कहानियां उतनी ही अलग और गहरी होती हैं। हैदराबाद के एक युवा विरेन ने ठीक यही बात अपने वीडियो में कही है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। उनके नजरिए को देखकर हजारों लोग सहमत नजर आ रहे हैं। ऑनलाइन साझा किए गए एक वीडियो में, उन्होंने बताया कि कांच के कार्यालय की इमारतें हर शाम एक जैसी दिख सकती हैं, लेकिन प्रत्येक रोशन खिड़की एक अलग व्यक्तिगत और व्यावसायिक यात्रा का प्रतिनिधित्व करती है।
इंस्टाग्राम पर शेयर किया वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @bagpackbeatss नामक हैंडल से शेयर किया गया है। रोशनी, कांच की खिड़कियों और आसपास की कॉर्पोरेट इमारतों को देखते हुए, विरेन ने कहा कि यह दृश्य उन्हें उनके पीछे घट रही जिंदगियों के बारे में सोचने पर मजबूर करता है। वे बोले कि, 'जब हम किसी भी कॉर्पोरेट इमारत को देखते हैं, तो हम सभी को ये शीशे, रोशनी और ये कार्यालय दिखाई देते हैं। वहां बहुत चमक-दमक होती है। लेकिन, शायद इस इमारत में, हर एक डेस्क पर और हर एक मंजिल पर, किसी के जीवन का एक अलग अध्याय दर्शाया गया है। उन्होंने समझाया कि बाहर से देखने पर इमारत में कोई बदलाव नहीं दिखता, लेकिन इसके अंदर काम करने वालों के अनुभव लगातार विकसित होते रहते हैं। वे बोले कि, 'कोई अपने पहले दिन के उत्साह के साथ ऑफिस आ रहा है, तो कोई अपने आखिरी कामकाजी दिन के बाद इस इमारत से आखिरी बार विदा ले रहा है। एक मंजिल पर पदोन्नति का जश्न मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी मंजिल पर कोई चुपचाप अपना लिंक्डइन प्रोफाइल अपडेट कर रहा है।'
'कहीं केक कट रहे तो कहीं रिजाइन टाइप हो रहे'
विरन ने कहा कि, 'कैफेटेरिया में कहीं केक काटे जा रहे हैं, और कहीं किसी ने रिजाइन टाइप किया है। इमारत हर दिन एक जैसी रहती है वही कांच, वही रोशनी। लेकिन इसके अंदर घटित होने वाली कहानियां और किस्से हर दिन बदलते रहते हैं। हर चमकती खिड़की एक ऐसी कहानी छुपाती है जिसे दुनिया कभी नहीं देख पाएगी।' इस वीडियो को "दयालु बनो। आपको कभी नहीं पता कि कोई व्यक्ति अपने ऑफिस की खिड़की के पीछे कौन सी कहानी छिपाए हुए है" कैप्शन के साथ साझा किया गया था।
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
इस वीडियो पर कई लोगों ने सराहना भरी प्रतिक्रियाएं दीं। एक यूजर ने लिखा कि, 'कितना खूबसूरत नजरिया है। यह हमारे रोजमर्रा के जीवन में दिखने वाली चीजों को देखने का एक गहरा तरीका है। हर खिड़की में खुशी, दुख, उलझन, उम्मीद, दबाव और सपने छिपे हो सकते हैं।'
दूसरे यूजर ने लिखा कि, 'इन कांच की इमारतों के पीछे पले-बढ़े सभी लोगों को बधाई।'
तीसरे यूजर ने लिखा कि, 'बहुत खूबसूरती से समझाया गया है।'
चौथे यूजर ने लिखा कि, 'सुंदर दृष्टिकोण।'
गौरतलब है कि, इससे पहले एक शख्स ने शाम 7 बजे के बाद ऑफिस में अकेले रुकने को थेरेपी जैसा बताया था।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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