Viral Video: दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु समेत देश के अन्य बड़े हिस्सों में घरेलू सहायिका ढूंढ़ना किसी बड़े टास्क से कम नहीं है। हालांकि, कई 'बाई' तो ऐसी भी होती हैं जो ज्यादा काम देखने के बाद ही चकरा जाती हैं। मगर इस बीच एक ऐसी घरेलू सहायिका वायरल हो गई है जिसे घर की मालकिन से 45 हजार रुपये की तनख्वाह मिलती है। जी हां, ये सुनने के बाद शायद आप भी यकीन न कर पाएं मगर ये सच है। इसका खुलासा खुद उस रूसी महिला ने किया जो उन काम वाली दीदी की मालकिन हैं। इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए वीडियो में उन्होंने इसकी वजह भी बताई है।
इंस्टाग्राम पर वायरल हो रहा वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @yulia_bangalore नामक हैंडल से एक रूसी महिला ने शेयर किया जो बेंगलुरु में रहती हैं। वीडियो शेयर कर कैप्शन में वे लिखती हैं कि, '11 साल पहले जब मैं अपने वर्क प्रोजेक्ट के लिए बेंगलुरु आई थी तो मेरे लिए सब कुछ बहुत किफायती था। शायद इसलिए क्योंकि मेरे अपने देश की करेंसी बहुत मजबूत थी और मैं सभी कीमतों को आधा-आधा बांट रही थी। मुझे अभी भी याद है कि एचएसआर के आसपास एक गेटेड कम्युनिटी में सभी सुविधाओं से युक्त एक सुंदर 2 बीएचके घर 25 हजार रुपये में किराए पर मिल सकता था और हवाई अड्डे तक जाने के लिए मेरु कैब का किराया लगभग 700 रुपये था।' इसके बाद अपनी पोस्ट में उन्होंने खर्चों के बारे में बताते हुए और उसका ब्योरा दिया। जो इस प्रकार है -
किराया 1,25,000 रुपये
स्कूल 30,000 रुपये
भोजन और घरेलू खर्च 75,000 रुपये
घरेलू सहायिका 45,000 रुपये
स्वास्थ्य और फिटनेस 30,000 रुपये
पेट्रोल 5,000 रुपये
इन सब खर्चों में घरेलू सहायिका के खर्च ने सभी यूजर्स का ध्यान खींचा। हालांकि, महिला की एक पुरानी पोस्ट देखने पर पता चलता है कि, वे घरेलू सहायिका पर इतना खर्च क्यों करती हैं। दरअसल, उन्होंने अपने एक पुराने वीडियो में बताया था कि, उनकी हाउसहेल्प उनकी बेटी को भी संभालती है साथ ही काफी भरोसेमंद है। इसलिए उन्हें दोगुना पैसे देने में कोई दु:ख नहीं है।
यूजर्स ने दी प्रतिक्रिया
इस पोस्ट को देखने के बाद इस पर तमाम यूजर्स की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। एक यूजर ने लिखा कि, 'आपके खर्चे यहां के अधिकांश भारतीयों की तुलना में निश्चित रूप से अधिक हैं, लेकिन मुझे यकीन है कि आपकी जीवनशैली भी अलग हैं।' दूसरे यूजर ने लिखा कि, 'घरेलू सहायक 45000 रुपये। आप वास्तव में अधिक भुगतान कर रहे हैं और यह स्थानीय लोगों के लिए समस्या होगी।' तीसरे यूजर ने लिखा कि, '20 से अधिक वर्षों से बेंगलुरु में रहते हुए मैंने कभी भी एक महीने में यहां बताई गई राशि का आधा भी खर्च नहीं किया है।'
नोट: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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