ओडिशा के पुरी समुद्र तट पर प्रसिद्ध रेत कलाकार और पद्मश्री सम्मानित सुदर्शन पटनायक ने दुर्गा पूजा के अवसर पर एक अनोखी कलाकृति तैयार की है। उन्होंने रेत के साथ फलों और सब्जियों का इस्तेमाल कर मां दुर्गा की 10 फुट ऊंची मूर्ति बनाई, जो देखने वालों को आकर्षित कर रही है। यह कृति न सिर्फ कला का नमूना है, बल्कि प्रकृति और परंपरा का सुंदर मेल भी है।
एक्स पर शेयर की गई पोस्ट
इस पोस्ट को एक्स पर @sudarsansand नामक हैंडल से शेयर किया गया है। सुदर्शन पटनायक ने इस इंस्टॉलेशन में करीब आठ टन रेत का इस्तेमाल किया। इसमें कुल 32 किस्मों के फल और सब्जियां शामिल हैं—22 तरह की सब्जियां और 10 तरह के फल। इनमें संतरे, सेब, अंगूर, केले, खीरे, नींबू, भिंडी, करेला, बीन्स और गाजर जैसी चीजें प्रमुख हैं। इन प्राकृतिक सामग्रियों को रेत के साथ जोड़कर मां दुर्गा की आकृति गढ़ी गई है। कलाकृति पर “हैप्पी दुर्गा पूजा” का संदेश भी लिखा गया है।
5 घंटे में तैयार शानदार आकृति
यह कलाकृति तैयार करने में लगभग पांच घंटे का समय लगा। सुदर्शन पटनायक के साथ उनके सैंड आर्ट इंस्टीट्यूट के छात्रों ने भी सहयोग किया। कलाकार ने सोशल मीडिया पर वीडियो और तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, “मैंने पुरी बीच पर 32 किस्मों के फल और सब्जियों (22 सब्जियां और 10 फल) का इस्तेमाल कर सैंड आर्ट इंस्टॉलेशन बनाया है। मां दुर्गा सबको शक्ति, खुशी, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद दें।”
आर्टिस्ट ने कही ये बात
सुदर्शन पटनायक ने इस आकृति के पीछे का भाव स्पष्ट करते हुए कहा कि दुर्गा पूजा अलग-अलग रूपों में मनाई जाती है। कलाकार के रूप में वे मां दुर्गा को अनोखे अंदाज में पेश करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने बताया, “हमने 32 अलग-अलग तरह के फल और सब्जियों का इस्तेमाल किया है और उन्हें रेत के साथ जोड़ा है। हर कोई मां को अलग रूप में देखना चाहता है, इसलिए हमने रेत और प्रकृति को एक साथ लाया है। हम मां से प्रार्थना करते हैं कि वे सब पर आशीर्वाद बरसाती रहें।”
दर्शकों को आर्ट ने किया इंप्रेस
यह कलाकृति महा सप्तमी के आसपास बनाई गई और पर्यटकों तथा स्थानीय लोगों को आकर्षित कर रही है। सुदर्शन पटनायक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाने-माने रेत कलाकार हैं। उन्होंने 65 से अधिक अंतरराष्ट्रीय सैंड स्कल्पचर चैंपियनशिप और फेस्टिवल में भारत का प्रतिनिधित्व किया है तथा कई पुरस्कार जीते हैं। उनकी कलाकृतियां अक्सर सामाजिक संदेश भी देती हैं। इस बार की कृति प्रकृति की सुंदरता और उसके रचनात्मक उपयोग का संदेश देती है। फलों और सब्जियों जैसे रोजमर्रा के पदार्थों से देवी की मूर्ति गढ़ना न सिर्फ नवीनता दिखाता है, बल्कि पर्यावरण और परंपरा के प्रति सम्मान भी दर्शाता है। पुरी बीच पर बनी यह 10 फुट ऊंची कलाकृति दुर्गा पूजा 2026 की यादगार घटना बन गई है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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