महाराष्ट्र की आर्थिक राजधानी मुंबई में बिजली के बिल हमेशा से चर्चा का विषय रहे हैं, लेकिन एक शख्स के सोशल मीडिया पोस्ट ने इस मुद्दे को फिर से गर्म कर दिया है। एक्स (पूर्व में ट्विटर) यूजर प्रीतिश पोसवाल ने अपने हालिया बिजली बिल को लेकर सवाल उठाया कि मुंबई और नवी मुंबई में बिजली इतनी महंगी क्यों है। उन्होंने राजस्थान, दिल्ली एनसीआर और बेंगलुरु से तुलना करते हुए दावा किया कि यहां के रेट्स बाकी शहरों से काफी ज्यादा हैं।
एक्स पर शेयर की पोस्ट
इस पोस्ट को एक्स पर @pritishposwal नामक हैंडल से शेयर किया गया है। यूजर ने बिजली की ऊंची कीमतों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने लिखा, 'भाई, मुंबई/नवी मुंबई में बिजली इतनी महंगी क्यों है? मैंने राजस्थान, दिल्ली एनसीआर या बेंगलुरु में कभी बिजली की इतनी बेतहाशा दरें नहीं देखीं।' उन्होंने अपने बिल में दिखाई देने वाले अतिरिक्त शुल्कों पर प्रकाश डालते हुए लिखा, 'महंगी बिजली, अपर से व्हीलिंग चार्ज, बिजली शुल्क और ईंधन समायोजन। बिल मेरे अनुमान से लगभग 2.5 गुना अधिक है।' एक कमेंट में उन्होंने कहा कि सभी शुल्कों को शामिल करने के बाद, प्रभावी लागत लगभग 14 से 15 रुपये प्रति यूनिट बैठती है। उनकी तुलना ने तुरंत यूजर्स का ध्यान आकर्षित किया, जिन्होंने या तो उनके अवलोकन से सहमति जताई या मुंबई में उच्च बिजली बिलों का भुगतान करने के अपने अनुभव साझा किए।
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
इस पोस्ट को वायरल होने में देर नहीं लगी और इस पर यूजर्स की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। एक यूजर ने लिखा कि, 'मुंबई की भावना के नाम पर इसे स्वीकार करो।'
दूसरे यूजर ने लिखा कि, 'किराया, बिजली, लोकल...अब क्या ले स्पिरिट ऑफ मुंबई के नाम पर? बेंगलुरु, हैदराबाद और गुड़गांव/नोएडा ही ठीक हैं।'
तीसरे यूजर ने लिखा कि, 'हां, यह अन्य शहरों की तुलना में 2.5 गुना अधिक है।'
चौथे यूजर ने लिखा कि, 'हां, इसमें ढुलाई शुल्क और अन्य सभी शुल्क मिलाकर लगभग 16 रुपये प्रति यूनिट है।'
पांचवें यूजर ने लिखा कि, 'नव-शहरों में, विश्वगोरिल्ला मूलभूत सिद्धांतों के आधार पर सोचता है और उन चीजों के लिए शुल्क लेता है जिनके लिए अन्यथा शुल्क नहीं लिया जाता था।'
गौरतलब है कि, इससे पहले एक महिला ने मुंबई में अपने एक महीने के खर्च पर वीडियो बनाया था। साथ ही बताया था कि, वहां रहना कितना मुश्किल है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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