पश्चिम बंगाल में 293 सीटों पर लगभग सभी वोटों की गिनती हो चुकी है। इस चुनाव में BJP ने अप्रत्याशित जीत दर्ज की और दो-तिहाई से ज्यादा सीटें अपने नाम की। खबर लिखे जाने तक बीजेपी 208 सीटों पर आगे है या जीत चुकी है, जबकि तृणमूल कांग्रेस 79 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है। बाकी अन्य पार्टियों का प्रदर्शन कुछ ज्यादा प्रभावशाली नहीं रहा। इस आर्टिकल में पश्चिम बंगाल में हुमायूं कबीर की पार्टी AJUP और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के परफॉर्मेंस के बारे में जानें।
अलायंस तोड़कर चुनाव में अलग-अलग उतरे AJUP और AIMIM
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दौरान, दो पार्टियां काफी चर्चा में रहीं- आम जनता उन्नयन पार्टी और AIMIM। दोनों ने शुरुआत में अलायंस किया था, लेकिन बाद में दोनों अलग-अलग होकर इलेक्शन लड़े। AJUP के चीफ हुमायूं कबीर ने 2025 में TMC छोड़कर अपनी नई पार्टी बनाई थी। इस पार्टी ने 294 में से 182 सीटों पर अपने कैंडिडेट उतारे थे।
महज दो सीटों तक ही सीमित रहा हुमायूं कबीर का 'जादू'
परिणाम आए तो हुमायूं कबीर की पार्टी महज दो सीटों- रेजीनगर और नवदा पर जीत दर्ज कर पाई। दिलचस्प बात रही कि इन दोनों सीटों से खुद हुमायूं कबीर ही चुनाव लड़ रहे थे। रेजीनगर में हुमायूं कबीर ने बड़ी जीत दर्ज की और 1 लाख 23 हजार 536 वोट पाकर BJP प्रत्याशी को 58 हजार 876 वोटों से हरा दिया। जबकि नवदा में भी हुमायूं कबीर ने बीजेपी को हरा दिया। यहां उन्होंने 27 हजार 943 वोटों से जीत दर्ज की। हालांकि, बाकी 180 सीटों पर हुमायूं की पार्टी कोई खास प्रदर्शन करती नहीं दिखी। ज्यादातर जगहों पर उनके प्रत्याशियों की जमानत जब्त हुई।
AIMIM के सारे उम्मीदवार मिलाकर पाए महज 56 हजार वोट
वहीं, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने AJUP से गठबंधन तोड़ने के बाद पश्चिम बंगाल में 12 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। इनमें सुजापुर, सूती, मोथाबाड़ी, रघुनाथगंज, कांडी, मुरारई, आसनसोल उत्तर, नलहाटी, हाबरा, बारासात, करंदीघी और बसीरहाट दक्षिण सीट शामिल हैं। हालांकि, AIMIM पार्टी किसी भी विधानसभा सीट पर बढ़त बनाती हुई भी नजर आई। AIMIM को 12 सीटों पर महज 0.09 प्रतिशत वोट मिले, जो सिर्फ 56 हजार 731 वोटों के बराबर हैं। ओवैसी की पार्टी के 12 प्रत्याशी मिलकर सिर्फ इतने वोट ही हासिल कर पाए। सभी सीटों पर AIMIM के उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई।
बंगाल चुनाव में छोटी पार्टियां नहीं छोड़ पाईं खास प्रभाव
गौरतलब है कि इस बार पश्चिम बंगाल चुनाव दो फेज- 23 और 29 अप्रैल- में हुआ था, जिसमें रिकॉर्ड 92.47 फीसदी मतदान हुआ था। चुनावी मुकाबला टक्कर का लग रहा था लेकिन परिणाम आए तो बीजेपी ने बंगाल में दो तिहाई से ज्यादा का बहुमत पा लिया। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम से साफ है कि यहां छोटी पार्टियां कोई बड़ा असर नहीं डाल पाईं। सीधा मुकाबला TMC और BJP के बीच ही था।