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पश्चिम बंगाल: हावड़ा में काली पूजा से पहले ब्लास्ट, घर के गैराज में पटाखे बनाते समय हादसा, एक शख्स घायल

 Written By: Rituraj Tripathi @riturajfbd
 Published : Oct 11, 2025 11:29 pm IST,  Updated : Oct 12, 2025 12:41 am IST

हावड़ा के रामराजा तल्ला इलाके में स्थित अंबिका कुंडू लेन में एक घर में ब्लास्ट हो गया। घर के गैराज में पटाखे बनाते समय ये हादसा हुआ है। इस हादसे में एक शख्स घायल हुआ है।

Blast in Howrah- India TV Hindi
घर में ब्लास्ट Image Source : REPORTER INPUT

हावड़ा: पश्चिम बंगाल के हावड़ा में काली पूजा से पहले ब्लास्ट हो गया है। इस घटना में एक शख्स घायल है। मिली जानकारी के मुताबिक, घर के गैराज में पटाखे बनाते समय ये ब्लास्ट हुआ है। घायल शख्स को गंभीर हालत में हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया है।

क्या है पूरा मामला?

हावड़ा के रामराजा तल्ला इलाके में स्थित अंबिका कुंडू लेन में एक घर में ब्लास्ट होने से एक शख्स घायल हो गया है। घटना शनिवार दोपहर हावड़ा के रामराजतला स्थित अंबिका कुंडू लेन में घटी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आकाश हेला (35) नामक युवक शाम करीब साढ़े पांच बजे एक घर के गैराज में पटाखे बना रहा था। उसी दौरान अचानक आग लग गई। स्टॉक में रखे सभी पटाखे जलने लगे। 

घटना में युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे गंभीर हालत में एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सूचना मिलते ही चटर्जीहाट थाने की पुलिस और दमकल की एक गाड़ी मौके पर पहुंची। करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया। पुलिस पूरी घटना की जांच में जुट गई है। 

बंगाल में क्या है काली पूजा का महत्व?

बंगाल में काली पूजा आमतौर पर दीपावली के दौरान ही मनाई जाती है। बंगाल में काली पूजा का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह मां काली, जो शक्ति, विनाश और परिवर्तन की देवी हैं, को समर्पित है। बंगाल में यह त्योहार दीपावली के समय, विशेष रूप से अमावस्या की रात को, बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। 

काली पूजा बंगाल की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है, खासकर कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों में। यह दुर्गा पूजा के बाद दूसरा सबसे बड़ा त्योहार है। यह समुदाय को एक साथ लाता है और कला, संगीत और परंपराओं को प्रदर्शित करता है।

इस दौरान मां काली की मूर्तियां पंडालों, मंदिरों और घरों में स्थापित की जाती हैं। मूर्तियां आमतौर पर काले रंग की होती हैं, जिसमें मां काली को तलवार, खोपड़ी की माला और उग्र रूप में दर्शाया जाता है। पूजा रात में शुरू होती है, क्योंकि यह अमावस्या की रात से जुड़ी होती है। मंत्रों, भजनों और तांत्रिक अनुष्ठानों के साथ पूजा की जाती है। दीपावली के साथ संयोग होने के कारण, घरों और मंदिरों में दीये जलाए जाते हैं, जो अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक हैं। काली पूजा के पंडालों में रंग-बिरंगी रोशनी और सजावट की जाती है। (इनपुट: शुभेंदु)

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