Iran US War: ईरान-अमेरिका युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी से हुई। इस युद्ध की शुरुआत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चलाए गए ऑपरेशन एपिक फ्यूरी से हुई। अमेरिका और इज़रायल ने ईरान पर 28 फरवरी को संयुक्त हवाई हमले शुरू किए। पहले 12 घंटों में ईरान पर लगभग 900 हमले किए गए। इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और लीडरों की मौत हो गई। इस दौरान इजरायल और अमेरिका ने ईरान की मिसाइल साइटों, एयर डिफेंस सिस्टम, सैन्य ठिकाने और परमाणु सुविधाओं पर घातक हमला किया।
ईरान का जवाबी हमला
अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के सु्प्रीम लीडर खामेनेई की हत्या किए जाने से तेहरान बौखला गया। इस बड़े हमले ने पूरी दुनिया को हिला दिया। ईरान ने अपने दुश्मनों यानी अमेरिका और इजरायल के खिलाफ तत्काल जवाबी हमले शुरू कर दिए। ईरान ने इज़रायल, अमेरिकी ठिकानों और मध्य-पूर्व के उसके क्षेत्रीय सहयोगी देशों पर सैकड़ों मिसाइलें व हजारों ड्रोन से हमला किया। ईरान के इस आक्रामक जवाब से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों का आवागमन बाधित हो गया, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई। इसके बाद यूरोप समेत पूरी दुनिया में तेल और गैस की कीमतें आसमान छूने लगीं।
मार्च में मिडिल-ईस्ट ईरानी हमले से हुआ तबाह
मध्य-पूर्व में अमेरिकी सैन्य और ऊर्जा ठिकानों पर ईरान के जवाबी हमले से यह युद्ध तेजी से और फैल गया। इससे पूरा मिडिल-ईस्ट युद्ध की भयानक चपेट में आ गया। ईरान ने अमेरिका और और उसके समर्थक इज़रायल समेत गल्फ देशों और अमेरिकी ठिकानों पर लगातार हमले किए। दोनों पक्षों की ओर हजारों मौतें हुईं और भारी संख्या में लोग घायल भी हुए। इस दौरान लाखों लोग विस्थापित हुए।
अमेरिका-इजरायल ने मचाई ईरान में तबाही
अमेरिका-इज़रायल ने मिलकर ईरान की सैन्य क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचाया, लेकिन ईरान ने भी मिडिल-ईस्ट अमेरिका भारी क्षति पहुंचाई। अमेरिका के एफ-35, एफ-16 और एफ-16 जैसे फाइटर जेट, ए-10 जैसे कई एयरक्राफ्ट कैरियर, हेलीकॉप्टर और एमक्यू-9 ड्रोन तबाह हो गए। इस दौरान वहीं अमेरिका और इजरायल ने ईरान के ऊर्जा ढांचों समेत उसके ऐतिहासिक इमारतों व रिहाइशी इलाकों में हमलों से भारी नुकसान पहुंचाया। ईरान यूनिवर्सिटी खंडहर में बदल गई। ईरान के गैस, बिजली और अन्य ऊर्जा संयंत्रों पर बडे़ हमले हुए।
ट्रंप रोज करते रहे अजीबोगरीब दावे
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार ईरान को लेकर अजीबोगरीब दावे करते रहे। उन्होंने कई बार कहा कि युद्ध 4-6 सप्ताह में समाप्त हो जाएगा और अमेरिका अपने सैन्य उद्देश्यों को पूरा कर चुका है। कभी वह ईरान को कुछ घंटों का अल्टीमेटम देते तो कभी उससे पीछे हट जाते। इससे ट्रंप की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी नुकसान पहुंचा। तमाम अमेरिका सांसद उनके विरोध में उतर आए, जिनमें कुछ रिपब्लिकन भी शामिल थे।
होर्मुज को नहीं खुलवा सके ट्रंप
पूरे युद्ध के दौरान ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखा, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा। ट्रंप ईरान पर कई बड़े हमले करने, उससे भी बड़े हमले की धमकी देने और नाटो समेत दुनिया के अन्य देशों से अपनी सेनाएं भेजने की अपील के बावजूद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नहीं खुलवा सके। लिहाजा उन्होंने अपना अल्टीमेटम वापस ले लिया और नाटो समेत अन्य देशों पर बुरी तरह भड़क गए। अंत में उन्होंने कह दिया कि होर्मुज खुलवाना अमेरिका का काम नहीं है, जिसकी जहाजों को दिक्कत हो वह देश होर्मुज खुलवाने का प्रयास करें। ट्रंप ने कह दिया कि होर्मुज से उनका कोई लेना-देना नहीं है।
ईरान की सभ्यता मिटाने की धमकी
धीरे-धीरे युद्ध की अवधि लंबी होती गई। इस दौरान अमेरिका ने ईरान के साथ जंग में भारी नुकसान उठाया। युद्ध का कोई हल नहीं निकलने देख ट्रंप ने ईरान को नया अल्टीमेटम दिया। ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि होर्मुज खोलो वरना “सभ्यता मिटा देंगे”। एक तरह से ट्रंप द्वारा ईरान को दी गई यह परमाणु हमले की धमकी थी। इससे पहले ट्रंप ने एक पोस्ट में ईरान को पागल और बास्टर्ड कहा। साथ ही कई अन्य अभद्र भाषाओं का इस्तेमाल किया। ट्रंप ने 7 अप्रैल को ईरान पर बहुत बड़ा हमला करने की धमकी दी और कहा कि इसे ईरान में ब्रिज डे के नाम से जाना जाएगा।
8 अप्रैल को सीजफायर का ऐलान
आखिरकार ट्रंप अपने अल्टीमेटम से फिर पीछे हट गए। उन्होंने बुधवार यानी 8 अप्रैल को ईरान के साथ 2 हफ्ते की सीजफायर का ऐलान कर दिया। ट्रंप ने इस दौरान एक पोस्ट में कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर के अनुरोध पर उन्होंने 2 हफ्तों तक ईरान पर हमला रोक दिया है। साथ ही ईरान के 10 सूत्रीय प्रस्ताव को भी प्राप्त किया है, जिस पर उन्होंने शुरुआती सहमति जताते हुए युद्ध विराम का ऐलान कर दिया। साथ ही ट्रंप ने इसे ईरान पर अमेरिका की बड़ी और ऐतिहासिक जीत बताया। वहीं ईरान ने इसे अमेरिका पर अपनी जीत बताया। साथ ही दावा किया कि ट्रंप ने ईरान के 10 शर्तों को मान लिया है, जिसमें ईरान पर भविष्य में हमला न करने की गारंटी, यूरेनियम संवर्धन की स्वीकृति, सभी तरह के बैन हटाने और होर्मुज पर ईरान के नियंत्रण जैसी प्रमुख शर्तें शामिल हैं।
अमेरिका सें जग में ईरान के किन प्रमुख नेताओं की हुई मौत
नाम पद
- अयातुल्लाह अली खामेनेई ईरान के सुप्रीम लीडर
- अली शमखानी सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव व खामेनेई के शीर्ष सुरक्षा सलाहकार
- मोहम्मद पाकपूर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर-इन-चीफ
- अब्दोलरहीम मुसावी ईरानी सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ
- अज़ीज़ नासिरजादेह रक्षा मंत्री
- अली लारिजानी ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव
- ग़ोलामरेज़ा सोलैमानी बसीज पैरामिलिट्री फोर्स के कमांडर
- इस्माइल ख़ातिब ईरान के खुफिया मंत्री
- मजीद ख़ादेमी IRGC के इंटेलिजेंस चीफ
- अली तंगसीरी ईरान के चीफ नेवी कमांडर