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Russia-Ukraine War: रूस-यूक्रेन युद्ध के वैश्विक प्रभावों से निपटने के लिए जुगत लगा रहे हैं G-20 देश

 Written By: Pankaj Yadav
 Published : Jul 08, 2022 04:53 pm IST,  Updated : Jul 08, 2022 04:53 pm IST

Russia-Ukraine War: इंडोनेशिया के बाली में चल रहे G-20 देशों की बैठक में दुनिया के शीर्ष देशों ने रूस-यूक्रेन के वैश्विक प्रभावों पर चिंता जताई। इस युद्ध से पैदा हुए खाद्य सामग्री और ऊर्जा संकट से निपटने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ेगी।

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Highlights

  • G-20 बैठक में शीर्ष राजनयिकों देशों ने यूक्रेन युद्ध को लेकर चिंता जताई
  • युद्ध के बाद पहली बार अमेरिका और रूस के विदेश मंत्रियों ने एक मंच को साझा किया
  • बैठक के दौरान ही शिंजों को गोली मारने की खबर आई, G-20 देशों ने दुख जताया

Russia-Ukraine War: विश्व के अमीर और बड़े विकासशील देशों के शीर्ष राजनयिकों को यूक्रेन में रूस के युद्ध को लेकर एक साझा आधार पाने और इसके वैश्विक प्रभावों से निपटने के तरीके ढूंढने में शुक्रवार को मशक्कत करनी पड़ी। इंडोनेशिया के बाली में हो रही बैठक में जी-20 देशों के विदेश मंत्रियों ने अपने इंडोनेशियाई मेजबान से एकजुट होने और युद्ध समाप्त करने की एक भावुक अपील सुनी। चीन और रूस के एक ओर रहने तथा अमेरिका और यूरोप के दूसरी ओर रहने के चलते पूर्व-पश्चिम के बीच दूरियां बढ़ने के मद्देनजर आम सहमति तक पहुंचना अभी बाकी है। 

बैठक में शिंजो आबे की हत्या पर G-20 देशों ने दुख जताया

यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद से पहली बार अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव तथा कई अन्य नेता एक मंच पर आए हैं। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के गुरुवार को अपने इस्तीफे की घोषणा करने के कुछ ही घंटों बाद यह बैठक शुरू हुई। हालांकि, उनके इस्तीफे की घोषणा के बाद ब्रिटेन की विदेश मंत्री लिज ट्रस को यहां से जाना पड़ गया। वहीं, बैठक जारी रहने के बीच जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे को गोली मार दी गई । आबे और जॉनसन जी-20 की बैठकों में शामिल हुआ करते थे। उन्होंने अतीत में इस तरह के कई सम्मेलनों और शिखर बैठकों में हिस्सा लिया था। शुक्रवार की बैठक का एक लक्ष्य आगामी जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए बुनियाद तैयार करना है जिसकी मेजबानी नवंबर में इंडोनेशिया करेगा। बैठक में शामिल हो रहे कई नेताओं ने आबे की गोली मार कर हत्या किए जाने की घटना पर दुख जताया है। 

दुनिया कोरोना की मार झेल ही रही थी कि अब यूक्रेन युद्ध ने एक और मुश्किल पैदा कर दी है -रेंटो मारसुदी, विदेश मंत्री, इंडोनेशिया

यह घटना उस वक्त हुई जब वे बहुपक्षवाद बहाल करने और वैश्विक नियम आधारित व्यवस्था के महत्व पर प्रथम दो पूर्ण सत्र का आयोजन कर रहे हैं। इंडोनेशिया की विदेश मंत्री रेंटो मारसुदी ने जी-20 विदेश मंत्रियों के समूह से धरती की खातिर वह अविश्वास खत्म करने की अपील की, जो कोरोना वायरस से लेकर जलवायु परिवर्तन तक और यूक्रेन संकट जैसी चुनौतियों की वजह से उत्पन्न हुआ है। इस समूह में लावरोव, चीनी विदेश मंत्री वांग यी, अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकन और उनके कई अन्य यूरोपीय समकक्ष शामिल हैं। मारसुदी ने कहा कि विश्व का महामारी से उबरना अभी बाकी है लेकिन हम एक अन्य संकट का सामना कर रहे हैं और वो है यूक्रेन में युद्ध। इसके प्रभाव खाद्य सामग्री और ऊर्जा पर विश्व भर में महसूस किए जा रहे हैं। उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि गरीब और विकासशील देश अब ईंधन एवं अनाज की कमी का सामना कर रहे हैं तथा यह स्थिति यूक्रेन में युद्ध के चलते पैदा हुई है। उन्होंने कहा कि जी-20 की यह जिम्मेदारी है कि वह इसका हल करने के लिए कदम उठाये ताकि नियम आधारित विश्व व्यवस्था प्रासंगिक बनी रह सके। उन्होंने कहा कि यूक्रेन में युद्ध ने विश्व व्यवस्था को हिला कर रख दिया है। 

ब्लिंकन ने मारसुदी के भाषण की सराहना की

लावरोव सउदी अरब और मेक्सिको के विदेश मंत्रियों के बीच अपनी सीट पर बैठे और चेहरे पर कोई भाव प्रकट किये बगैर पन्ने पलटते नजर आए। मारसुदी ने कहा, ‘‘हम इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि एकसाथ बैठना दुनिया के लिए मुश्किल हो गया है। ’’ इस बीच, बैठक के उद्घाटन के लिए एक गोलमेज के चारों ओर बैठे नेताओं में शामिल लावरोव और ब्लिंकन ने एक दूसरे से बात करने में कोई रूचि नहीं दिखाई और दोनों की मुलाकात करने की कोई योजना नहीं है। ब्लिंकन ने मारसुदी के भाषण की सराहना की। उन्होंने मारसुदी से कहा, ‘‘हम कोविड के प्रभाव अब भी विश्व पर मंडराते हुए देख रहे हैं, दुर्भाग्य से हम यूक्रेन के खिलाफ रूस के आक्रमण के प्रभावों को भी देख रहे हैं जिससे पहले की तुलना में चीजें अधिक मुश्किल हो गई हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि वे बाली वार्ता के मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकने नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि इस वार्ता का एजेंडा यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के कारण दुनिया के सामने पैदा हुए खाद्य एवं ऊर्जा संकट पर बात करना, इसके लिए रूस को जिम्मेदार ठहराना और भविष्य में ऐसी किल्लत से मिलकर निपटने के मुद्दे पर बात करना है। जी-20 समूह की तरफ से जारी एक संयुक्त बयान में आतंकवाद, अपराध, जलवायु और आर्थिक मुद्दों पर जोर दिया गया है।

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