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भारत से बातचीत के जरिये पाकिस्तान के शांति प्रयासों का चीन ने किया समर्थन

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Nov 04, 2018 07:52 pm IST,  Updated : Nov 04, 2018 07:52 pm IST

चीन ने रविवार को कहा कि उसने भारत के साथ लंबित विवादों को सुलझाने के लिए पाकिस्तान के "बातचीत के जरिये शांति की तलाश" का समर्थन किया है और परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) के साथ इस्लामाबाद की वार्ता की हिमायत की है।

China backs Pakistan's 'quest for peace through dialogue' with India- India TV Hindi
China backs Pakistan's 'quest for peace through dialogue' with India

बीजिंग: चीन ने रविवार को कहा कि उसने भारत के साथ लंबित विवादों को सुलझाने के लिए पाकिस्तान के "बातचीत के जरिये शांति की तलाश" का समर्थन किया है और परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) के साथ इस्लामाबाद की वार्ता की हिमायत की है। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और प्रधानमंत्री ली क्विंग के साथ यहां पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की वार्ता के बाद जारी एक संयुक्त बयान में कश्मीर मुद्दे का बिना कोई सीधे उल्लेख करते हुए चीन ने भारत के साथ ‘‘लंबित विवादों’’ के समाधान के वास्ते संबंध सुधारने के पाकिस्तान के प्रयासों का समर्थन किया।

संयुक्त बयान में कहा गया है, ‘‘चीन परस्पर सम्मान और समानता के आधार पर वार्ता, सहयोग और बातचीत के जरिये शांति की पाकिस्तान की तलाश की प्रशंसा करता है। वह पाकिस्तान..भारत संबंधों में सुधार और दोनों देशों के बीच लंबित मुद्दों के समाधान के लिए पाकिस्तान के प्रयासों भी का समर्थन करता है।’’ पाकिस्तानी सरजमीन में सरगर्म समूहों का 2016 में आतंकवादी हमलों और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में भारत की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद दोनों देशों के संबंधों में तल्खी आ गई।

कश्मीर मुद्दे पर चीन का बार-बार दोहराया जाने वाला रूख यह है कि यह बातचीत के जरिये शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जाना चाहिए। भारत इस मुद्दे को बातचीत के जरिये सुलझाने का समर्थन करता है लेकिन उसका यह भी कहना है कि वार्ता और आतंकवाद साथ-साथ नहीं चल सकते हैं। पाकिस्तान अपनी ओर से दक्षेस के मंच पर चीन की सक्रिय भागीदारी का समर्थन करता है। इसके अलावा चीन ने एनएसजी की सदस्यता प्राप्त करने के पाकिस्तान के प्रयासों का मौन समर्थन किया है। 

चीन एनएसजी में भारत का प्रवेश इस आधार पर बाधित कर रहा है कि भारत ने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं किये हैं। वैसे, 48 सदस्यीय समूह के अधिकतर सदस्यों ने इसमें भारत के प्रवेश का समर्थन किया है। पाकिस्तान ने भी एनएसजी की सदस्यता के लिए आवेदन किया है। संयुक्त बयान में कहा गया, ‘‘दोनों पक्ष बहुपक्षीय, गैर-भेदभावपूर्ण हथियार नियंत्रण और परमाणु अप्रसार प्रयासों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं।’’ इसमें कहा गया है, ‘‘वे परमाणु अप्रसार मानदंडों और प्रक्रियाओं में लगतार दोहरे मानकों अपनाए जाने पर चिंता जताते हैं और कानून के शासन और  दीर्घकालिक नियमों को बरकरार रखने वाली नीतियों का आह्वान करते हैं।’’ इसमें कहा गया है कि चीन वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था को मजबूती प्रदान करने में पाकिस्तान की ओर से उठाये गए कदमों की प्रशंसा और समर्थन करता है।

बयान में कहा गया है कि इस परिप्रेक्ष्य में चीन परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह के साथ पाकिस्तान के जुड़ने का समर्थन करता है और एनएसजी दिशानिर्देशों का उसके द्वारा अनुपालन का स्वागत करता है। बयान के अनुसार चीन ने आतंकवाद से मुकाबले में पाकिस्तान के प्रयासों की प्रशंसा की और सभी संबंधित पक्षों का आह्वान किया कि वे पाकिस्तान के आतंकवाद निरोधक प्रयासों को वस्तुनिष्ठ और निष्पक्ष तरीके से देखें। बयान में कहा गया है, ‘‘पाकिस्तान ने चीन को उसकी संप्रभुता, सुरक्षा और अलगाववाद तथा आतंकवाद एवं ईस्ट तुर्कीस्तान इस्लामिक मूवमेंट सहित चरमपंथ से रक्षा के लिए अपना समर्थन दोहराया।’’

बयान में कहा गया है कि दोनों पक्षों ने चीन..पाकिस्तान रक्षा एवं प्रतिरक्षा मशविरा तंत्र का पूरा इस्तेमाल करने तथा सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण सहयोग, उपकरण एवं प्रौद्योगिकी सहयोग में सहयोग गहरा करने पर सहमति जतायी। खान ने अपनी चीन यात्रा के दौरान राष्ट्रपति शी और प्रधानमंत्री लीसे बातचीत की। यह बातचीत पाकिस्तान द्वारा सामना किये जाने वाले वित्तीय संकट से पार पाने के वास्ते चीन से रिण प्राप्त करने पर केंद्रित रही। चीन ने पाकिस्तान को जरूरी सहयोग देने की बात करते हुए कथित तौर पर उसे छह अरब डालर देने का वादा किया है लेकिन इसकी अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

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