
रावलपिंडी में Fearless — *हम हैं तख़लीक़-ए- ख़ुदा (हम हैं ईश्वर की रचना)*
इन तीनों के लिये रावलपिंडी सबसे दिलचस्प अनुभव रहा। ये पता लगने पर कि नैशनल कॉलेज ऑफ़ आर्ट ने एक किन्नर को नौकरी दी है, इन तीनों ने किन्नरों से मिलने का और उनके साथ वर्कशॉप करने का फ़ैसला किया।
उन्होने किन्नरों से उनके बारे में बोलने को कहा। “हमने बीच में कोयले रख दिये। हर किन्नर ने पहले कोयले से नज़र उतारी और फिर अपने बारे में और लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं, अपने विचार रखे।

शीलो ने बताया कि ''दूसरे दौर में हमने हमने शादी का सिंहासन रखा। हर कोई (किन्नर) सिंहासन के पास गया, दुपट्टा पहना और फ़िर अपना हाथ अपने सिर पर रखकर ख़ुद को आशीर्वाद दिया और आशीर्वाद लिया। ये सब बहुत भावुक करने वाला था।”
निदा ने कहा कि वे भी औरों की तरह प्यार चाहते हैं, चाहते हैं कि उन्हें भी समाज स्वीकार करे। “उन्होंने कहा ‘हम भी तो हैं तख़लीक़-ए-ख़ुदा (हम भी तो ईश्वर की रचना हैं)। इस पर हमने कहा कि ‘भी’ से लगता कि वे (किन्नर) किसी और के वजूद मौजूद को मान रही हैं। तभी हमें ये लाइन सूझी “हम हैं तख़लीक़-ए-ख़ुदा'' (हम ईश्वर की रचना हैं)।”

किन्नर का चित्र बनाना वहां मौजूद किन्नरों के लिये विस्मय करने वाला था क्योंकि बाइक की वजह से पहले उन्हें लगा कि ये पुरुष है, फिर शलवार की वजह से लगा कि महिला है। लेकिन जब उन्होंने बालों वाली कलाई देखी तो कनफ़्यूज़ हो गए। लेकिन उनकी खुशी का तब कोई ठिकाना नहीं रहा जब उन्होंने देखा कि ये तो उनके गुरु जी बबली का चित्र है।
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