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फीस के तौर पर छात्रों से नारियल और पत्ते भी ले रहा है यह कॉलेज

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Nov 04, 2020 06:03 pm IST,  Updated : Nov 04, 2020 06:03 pm IST

कोरोना वायरस के कहर के चलते दुनिया के कई देश भारी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। कई देशों की अर्थव्यवस्था सिकुड़ गई है, और लोगों को रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने के लिए भी जूझना पड़ रहा है।

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इंडोनेशिया के बाली में स्थित एक हॉस्पिटैलिटी कॉलेज अपने छात्रों से फीस के तौर पर नारियल और अन्य प्राकृतिक उत्पादों को भी ले रहा है। Image Source : PIXABAY REPRESENTATIONAL

जकार्ता: कोरोना वायरस के कहर के चलते दुनिया के कई देश भारी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। कई देशों की अर्थव्यवस्था सिकुड़ गई है, और लोगों को रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने के लिए भी जूझना पड़ रहा है। कई देशों की सरकारों ने अपने यहां स्कूल फीस में भी कटौती की है, और इंडोनेशिया में तो एक कॉलेज गजब का ही ऑफर लेकर आया है। इंडोनेशिया के बाली में स्थित एक हॉस्पिटैलिटी कॉलेज अपने छात्रों से फीस के तौर पर नारियल और अन्य प्राकृतिक उत्पादों को भी ले रहा है।

फीस के बदले ये पत्ते भी दे सकते हैं छात्र

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंडोनेशिया के बाली स्थित हॉस्पिटैलिटी कॉलेज ने आर्थिक दिक्कतों का सामना कर रहे अपने छात्रों को अपनी ट्यूशन फीस नारियल से चुकाने का भी विकल्प दिया है। कॉलेज ने कहा है कि छात्र अपनी ट्यूशन फीस एवं अन्य खर्चों के लिए नारियल के रूप में भुगतान कर सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कॉलेज इन नारियल का इस्तेमाल तेल निकालने के लिए करेगा। इसके अलावा छात्रों को अपनी फीस मोरिंगा (सहजन) के पत्तों या गोटू काला के पत्तों के रूप में चुकाने का भी विकल्प दिया गया है। बता दें कि इनके पत्तों से हर्बल साबुन समेत कई तरह के उत्पाद तैयार होते हैं।

‘कॉलेज के कैंपस में ही बेचे जाएंगे प्रॉडक्ट्स’
स्कूल के एक अधिकारी ने मीडिया को बताया कि छात्रों को दिए गए इस ऑप्शन से एक तो उनकी दिक्कतें कम होगी, दूसरी तरफ उनके अंदर आंत्रप्रिन्योरशिप के लिए ललक जगेगी। अधिकारी ने बताया कि नारियल एवं अन्य वस्तुओं से तैयार उत्पादों को कॉलेज के कैंपस में बेचा जाएगा, ताकि फंड इकट्ठा हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए उसने कई तरह के सुरक्षा उपाय भी अपनाए हैं। इसके तहत स्कूल में मास्क का पहनना अनिवार्य है, और कक्षाओं में छात्रों की संख्या को कम किया गया है। साथ ही यहां समय-समय पर लोगों के शरीर का तापमान भी मापा जाता है।

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