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चीन ने 11 लोगों को फांसी पर लटकाया, राष्ट्रपति जिनपिंग के अभियान से भ्रष्टाचारी अधिकारियों में मचा हड़कंप

 Edited By: Dharmendra Kumar Mishra
 Published : Jan 29, 2026 10:43 pm IST,  Updated : Jan 29, 2026 10:43 pm IST

चीन ने म्यांमार ऑनलाइन फ्रॉड से जुड़े 11 अपराधियों को फांसी पर लटका दिया है। चीन में हुई इस कार्रवाई से अन्य अपराधियों और भ्रष्टाचार का सामना कर रहे सैन्य अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।

शी जिनपिंग, चीन के राष्ट्रपति। - India TV Hindi
शी जिनपिंग, चीन के राष्ट्रपति। Image Source : AP

बीजिंगः राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों के दौरान चीन ने बृहस्पतिवार को आपराधिक गिरोह के 11 लोगों को फांसी देकर हड़कंप मचा दिया है। द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार यह कार्रवाई भ्रष्टाचार और अपराधों के खिलाफ जिनपिंग के जीरो टोलरेंस अभियान का हिस्सा है। चीन की इस कार्रवाई से सेना समेत अन्य विभागों में भ्रष्टाचार समेत अन्य अपराधों में कार्रवाई का सामने कर रहे अधिकारियों में खलबली मच गई है।

कौन थे 11 लोग, जिन्हें हुई फांसी

चीन ने गुरुवार को जिन 11 लोगों को फांसी के तख्ते पर लटकाया वह म्यांमार स्कैम से जुड़े थे। राज्य मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार फांसी पाने वालों में  इनमें स्कैम ऑपरेशंस में शामिल "मुख्य सदस्य" शामिल थे। ये 11 लोग म्यांमार के उत्तरी इलाकों में आधारित गिरोहों के सदस्य थे, जो मुख्य रूप से "मिंग फैमिली क्रिमिनल ग्रुप" से जुड़े थे। ये लोग 2015 से बड़े पैमाने पर क्रॉस-बॉर्डर टेलीकॉम फ्रॉड, अवैध जुआ, हत्या, गैरकानूनी हिरासत और अन्य अपराधों में शामिल थे। इन अपराधों से कम से कम 14 चीनी नागरिकों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए। गिरोह ने म्यांमार में स्कैम कंपाउंड्स चलाए, जो अरबों डॉलर के अवैध उद्योग का हिस्सा हैं।

सितंबर 2025 में कोर्ट ने दी थी मौत की सजा

इन सभी को झेजियांग प्रांत के वेनझोउ इंटरमीडिएट पीपुल्स कोर्ट ने सितंबर 2025 में मौत की सजा सुनाई थी। सुप्रीम पीपुल्स कोर्ट बीजिंग ने अपील खारिज करने के बाद सजा को मंजूरी दी, जिसमें सबूतों को "निश्चित और पर्याप्त" बताया गया। फांसी वेनझोउ कोर्ट द्वारा ही दी गई। फांसी से पहले अपराधियों के निकटतम रिश्तेदारों को उनसे मिलने की अनुमति दी गई। 

क्या था पूरा मामला

म्यांमार के सीमावर्ती इलाकों जैसे मायावाडी में KK पार्क में स्कैम सेंटर्स तेजी से फैले हैं, जहां विदेशी (खासकर चीनी) मजदूरों को ट्रैफिकिंग कर जबरन ऑनलाइन स्कैम करवाए जाते हैं। इसमें रोमांस स्कैम, निवेश धोखाधड़ी आदि शामिल हैं। ये सेंटर्स UNODC के अनुमान से सालाना 40 अरब डॉलर का अवैध उद्योग हैं। कई मजदूर भागने की कोशिश में मारे जाते हैं। बीजिंग ने हाल के वर्षों में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों (म्यांमार, लाओस, कंबोडिया) के साथ सहयोग बढ़ाया है। हजारों लोगों को चीन वापस लाया गया और ट्रायल किया गया। जनवरी 2026 में "प्रिंस ग्रुप" के प्रमुख चेन झी को गिरफ्तार कर चीन प्रत्यर्पित किया गया। यह कार्रवाई चीन की सख्त एंटी-स्कैम मुहिम का हिस्सा है, जो नागरिकों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क को तोड़ने पर केंद्रित है।

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