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अफगानिस्तान में भूकंप, दहशत में घरों से भागे लोग, रिक्टर स्केल पर 4.5 रही तीव्रता

 Edited By: Shakti Singh
 Published : May 24, 2025 05:51 pm IST,  Updated : May 24, 2025 06:06 pm IST

रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.5 मैग्नीट्यूड आंकी गई। हालांकि, इस तीव्रता के भूकंप ज्यादा खतरनाक नहीं होते हैं, लेकिन पुरानी और कमजोर इमारतें गिरने का खतरा रहता है।

Representative Image- India TV Hindi
प्रतीकात्मक तस्वीर Image Source : FILE PHOTO

अफगानिस्तान में एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। शनिवार को भूकंप के झटकों के कारण लोगों में दहशत फैल गई। जानकारी के अनुसार, अफगानिस्तान में आए भूकंप की तीव्रता 4.5 रही। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, भूकंप का केंद्र धरती की सतह से 120 किलोमीटर नीचे था।

इससे पहले 19 मई को अफगानिस्तान में 4.2 तीव्रता का भूकंप आया था, जो पिछले चार दिनों में देश में आया लगातार चौथा भूकंप था। एनसीएस ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि भूकंप भारतीय समयानुसार सुबह 8:54 बजे आया था। भूकंप का केंद्र धरती की सतह से 140 किलोमीटर नीचे था। इससे पहले 18 मई को अफ़गानिस्तान में 4.5 तीव्रता का भूकंप आया था। एनसीएस के अनुसार, भूकंप 150 किलोमीटर की गहराई पर आया था। 17 मई को इस क्षेत्र में 4.2 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसका केंद्र धरती के 120 किलोमीटर अंदर था।

अफगानिस्तान में क्यों आते हैं भूकंप

रेड क्रॉस के अनुसार, अफगानिस्तान में शक्तिशाली भूकंपों का इतिहास रहा है और हिंदू कुश पर्वत श्रृंखला भूगर्भीय रूप से सक्रिय क्षेत्र है, जहां हर साल भूकंप आते हैं। अफगानिस्तान भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच कई फॉल्ट लाइनों पर स्थित है, जिसमें एक फॉल्ट लाइन सीधे हेरात से होकर गुजरती है। भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच टकराव वाले क्षेत्र में कई सक्रिय फॉल्ट लाइनों पर इसका स्थान इसे भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्र बनाता है। ये प्लेटें आपस में मिलती हैं और टकराती हैं, जिससे अक्सर भूकंपीय गतिविधि होती है।

अफगानिस्तान प्राकृतिक आपदाओं के लिए संवेदनशील

मानवीय मामलों के समन्वय हेतु संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के अनुसार, अफगानिस्तान मौसमी बाढ़, भूस्खलन और भूकंप सहित प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बना हुआ है। यूएनओसीएचए ने कहा कि अफगानिस्तान में लगातार आने वाले भूकंप से कमजोर समुदायों को नुकसान पहुंचता है, जो पहले से ही दशकों के संघर्ष और पिछड़ेपन से जूझ रहे हैं और उनके पास एक साथ आने वाले कई झटकों से निपटने के लिए बहुत कम लचीलापन बचा है। (इनपुट- एएनआई)

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