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SCO शिखर वार्ता में भारत की दहाड़, पाकिस्तान को उसकी ही सरजमीं पर जयशंकर ने किया पस्त; चीन भी हो गया चित्त

 Published : Oct 16, 2024 05:33 pm IST,  Updated : Oct 16, 2024 05:42 pm IST

पाकिस्तान को उसी की धरती पर विदेश मंत्री जयशंकर ने पस्त कर दिया है। आतंकवाद, उग्रवाद और बुरी नीयत के मसले पर उन्होंने पाकिस्तान के साथ चीन को भी निशाने पर लिया है। साथ ही दोनों देशों का नाम लिए बिना उनको आत्मावलोकन की सलाह भी दी है।

एस जयशंकर, भारतीय विदेश मंत्री। - India TV Hindi
एस जयशंकर, भारतीय विदेश मंत्री। Image Source : PTI

इस्लामाबाद: संघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर वार्ता में भारत की दहाड़ से पाकिस्तान और चीन दोनों की बोलती बंद हो गई है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एससीओ शिखर वार्ता में पाकिस्तान को जबरदस्त तरीके से रगड़ दिया है। साथी ही उसके दोस्त चीन को भी नहीं बख्शा। जयशंकर ने पाकिस्तान को उसी की धरती से इतना कड़ा संदेश दिया है, जिससे उसका जिगरी दोस्त चीन भी परेशान हो उठा है। जयशंकर ने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर परोक्ष रूप से उसे बड़ा संदेश दे डाला है। उन्होंने कहा कि यदि सीमा पार की गतिविधियां आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद की ‘‘तीन बुराइयों’’ पर आधारित होंगी तो व्यापार, ऊर्जा और संपर्क सुविधा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने की संभावना नहीं है।

इसके साथ ही जयशंकर ने चीन को भी अपने प्रहार से चित्त कर दिया। जयशंकर ने पूर्वी लद्दाख में भारत और चीनी सैनिकों के बीच जारी सैन्य गतिरोध के साथ हिंद महासागर एवं अन्य रणनीतिक जलक्षेत्रों में चीन की बढ़ती सैन्य ताकत को लेकर उसे चेतावनी दी। उन्होंने कहा, ‘‘यदि सीमा पार की गतिविधियां आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद से जुड़ी हैं तो उनके साथ-साथ व्यापार, ऊर्जा प्रवाह, संपर्क और लोगों के बीच आपसी लेन-देन को बढ़ावा मिलने की संभावना कतई नहीं हो सकती है।’’ भारत के इस कड़े जवाब से चीन भी चकरा गया। 

जयशंकर की मुख्य बातें

जयशंकर ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि व्यापार और संपर्क पहलों में क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता को मान्यता दी जानी चाहिए और भरोसे की कमी पर ‘‘ईमानदारी से बातचीत’’ करना आवश्यक है। विदेश मंत्री ने इस्लामाबाद में आयोजित एससीओ देशों के शासन प्रमुखों की परिषद (सीएचजी) के 23वें शिखर सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। इस सम्मेलन की अध्यक्षता पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने की। जयशंकर मंगलवार को इस्लामाबाद पहुंचने वाले एक दशक में पहले भारतीय विदेश मंत्री हैं। पहले पाक पीएम शहबाज शरीफ ने एससीओ के सम्मेलन को संबोधित किया। इसके तुरंत बाद जयशंकर ने भी अपना संबोधन दिया। इस सम्मेलन में चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग भी शामिल हुए। सम्मेलन आरंभ होने से पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शरीफ ने जयशंकर से हाथ मिलाया और ‘जिन्ना कन्वेंशन सेंटर’ में उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। 

क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता पर रहा जोर

जयशंकर ने कहा कि एससीओ का सहयोग आपसी सम्मान और संप्रभुता की समानता पर आधारित होना चाहिए। यदि समूह आपसी भरोसे के आधार पर मिलकर आगे बढ़ता है तो एससीओ सदस्य देशों को काफी लाभ हो सकता है। विदेश मंत्री ने एससीओ के प्रत्येक सदस्य राष्ट्र द्वारा समूह के चार्टर का सख्ती से पालन किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने आपसी विश्वास, मित्रता और अच्छे पड़ोसी के भाव को मजबूत करने के इसके सार पर प्रकाश डालते कहा, ‘‘इसमें क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता को मान्यता दी जानी चाहिए। इसे वास्तविक साझेदारी पर आधारित होना चाहिए, न कि एकतरफा एजेंडे पर। अगर हम वैश्विक व्यवस्थाओं, खासकर व्यापार और पारगमन के क्षेत्रों में अपने फायदे के हिसाब से चयन करेंगे तो यह (सहयोग) आगे नहीं बढ़ सकता।’’

पाकिस्तान और चीन को दिया इन लाइनों से गहरा संदेश

विदेश मंत्री ने पाकिस्तान और चीन को परोक्ष रूप से गहरा संदेश देते कहा, ‘‘यदि भरोसे की कमी है या पर्याप्त सहयोग नहीं है, यदि मित्रता कम हो गई है और अच्छे पड़ोसी की भावना गायब है तो निश्चित रूप से उसके लिए आत्मावलोकन करने और समाधान खोजने की आवश्यकता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यदि हम चार्टर के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पूरी ईमानदारी से पुष्टि करें, तभी हम उस सहयोग और एकीकरण के उन लाभों को पूरी तरह से हासिल कर सकते हैं, जिनकी इसमें परिकल्पना की गई है।’’ जयशंकर ने कहा कि एससीओ का उद्देश्य आपसी विश्वास, मित्रता और अच्छे पड़ोसी के रूप में संबंधों को मजबूत करना है। उन्होंने कहा, ‘‘इसका उद्देश्य खासकर क्षेत्रीय प्रकृति का बहुआयामी सहयोग विकसित करना है। इसका मकसद संतुलित विकास, एकीकरण और संघर्ष की रोकथाम के मामले में एक सकारात्मक शक्ति बनना है।’’ जयशंकर ने कहा, ‘‘चार्टर में यह भी स्पष्ट था कि मुख्य चुनौतियां क्या थीं। मुख्य रूप से तीन चुनौतियां थीं जिनका मुकाबला करने के लिए एससीओ प्रतिबद्ध था: पहली- आतंकवाद, दूसरी- अलगाववाद और तीसरी चुनौती-उग्रवाद।’’ (भाषा)

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