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INSV कौंडिन्य ने पूरी की 18 दिनों की ऐतिहासिक यात्रा, पोरबंदर से मस्कट पहुंचा ये खास जहाज

भारतीय नौसेना का पारंपरिक पाल जहाज INSV कौंडिन्य ने 18 दिनों की ऐतिहासिक समुद्री यात्रा पूरी कर पोरबंदर से मस्कट तक सफल सफर तय किया। यह अभियान भारत की प्राचीन नौवहन कला, समुद्री व्यापार और सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने का प्रतीक है।

Edited By: Vineet Kumar Singh @VickyOnX
Published : Jan 14, 2026 02:48 pm IST, Updated : Jan 14, 2026 02:48 pm IST
INSV Kaundinya voyage, Indian Navy historic ship, Porbandar to Muscat journey- India TV Hindi
Image Source : ANI INSV कौंडिन्य को पारंपरिक रूप से बनाया गया है।

मस्कट: भारतीय नौसेना का प्राचीन पाल विधि से निर्मित जहाज INSV 'कौंडिन्य' ने ऐतिहासिक 18 दिनों की यात्रा पूरी कर ली है। यह जहाज 29 दिसंबर 2025 को गुजरात के पोरबंदर से रवाना हुआ था और बुधवार को ओमान की राजधानी मस्कट पहुंच गया। यह यात्रा भारत की प्राचीन समुद्री परंपराओं को जीवंत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। कौंडिन्य एक महान भारतीय नाविक थे, जिन्होंने हिंद महासागर को पार करके दक्षिण पूर्व एशिया की यात्रा की थी। उन्हीं के नाम पर जहाज का नाम रखा गया। यह जहाज अजंता की गुफाओं में चित्रित 5वीं शताब्दी ईस्वी के एक जहाज पर आधारित है।

पारंपरिक तरीके से बनाया गया है जहाज

INSV कौंडिन्य के कैप्टन कमांडर विकास श्योरन हैं, जबकि कमांडर वाई हेमंत कुमार अभियान के प्रभारी अधिकारी हैं। दल में 4 अधिकारी और 13 नौसैनिक शामिल हैं। प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल भी टीम में शामिल थे और उन्होंने सोशल मीडिया पर रोजाना अपडेट साझा किए। जहाज की बनावट पूरी तरह पारंपरिक तरीके से की गई है। लकड़ी के तख्तों को सिलाई (स्टिचिंग) की विधि से जोड़ा गया, जिसमें कोयर रस्सी, नारियल के रेशे और प्राकृतिक रेजिन का इस्तेमाल हुआ। केरल के कुशल कारीगरों की टीम ने इसे बनाया, जिसके मास्टर शिपराइट बाबू शंकरन थे।

INSV Kaundinya voyage, Indian Navy historic ship, Porbandar to Muscat journey

Image Source : X.COM/SANJEEVSANYAL
INSV कौंडिन्य को गोवा में लॉन्च किया गया था।

फरवरी 2025 में गोवा में हुई थी लॉन्चिंग

INSV कौंडिन्य के प्रोजेक्ट के लिए जुलाई 2023 में संस्कृति मंत्रालय, भारतीय नौसेना और एम/एस होडी इनोवेशंस के बीच समझौता हुआ था। जहाज के निर्माण के लिए संस्कृति मंत्रालय ने फंडिंग की थी। जहाज की तली सितंबर 2023 में बनाई गई थी और फरवरी 2025 में इसे गोवा में लॉन्च किया गया। भारतीय नौसेना ने डिजाइन, तकनीकी जांच और निर्माण की देखरेख की। कोई पुराना ब्लूप्रिंट नहीं होने के कारण अजंता गुफाओं के चित्रों से डिजाइन तैयार किया गया। आईआईटी मद्रास के ओशन इंजीनियरिंग विभाग में हाइड्रोडायनामिक टेस्टिंग की गई।

INSV कौंडिन्य में कई सांस्कृतिक प्रतीक

INSV कौंडिन्य में कई खास और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण प्रतीक हैं।

  1. इसके पालों पर गंडभेरुंड (दो सिर वाला पक्षी) और सूर्य की खूबसूरत आकृतियां बनी हैं।  
  2. इसके धनुष (bow/front part) पर एक शानदार सिंह-यली (शेर जैसा पौराणिक प्राणी) उकेरा गया है।  
  3. जहाज के डेक पर एक खास हड़प्पा शैली का पत्थर का लंगर (anchor) लगा है, जो बहुत प्रतीकात्मक है।

इन सब चीजों से प्राचीन भारत की समृद्ध समुद्री परंपरा और संस्कृति की झलक मिलती है।

जांच और मरम्मत के बाद भारत लौटेगा जहाज

भारतीय नौसेना के कमोडोर अमित श्रीवास्तव ने कहा, 'इस जहाज के निर्माण में भारतीय नौसेना, डीआरडीओ और अन्य के आर्किटेक्ट्स व अधिकारी शामिल थे। इसकी टेस्टिंग नौसेना की टीमों ने की। पोरबंदर से मस्कट तक की यात्रा पूरी करना ऐतिहासिक पल है। भारतीय नौसेना द्वारा प्रशिक्षित दल किसी भी चुनौती का सामना कर सकता है। जरूरी जांच और मरम्मत के बाद जहाज भारत वापस लौटेगा।'

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