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Iran Protests: ईरान में हिजाब के खिलाफ 80 शहरों तक फैला प्रदर्शन, जिस 'सुप्रीम लीडर' को मानते थे खुदा उसी के फाड़े पोस्टर, क्या हैं ताजा हालात?

 Written By: Shilpa
 Published : Sep 25, 2022 07:51 am IST,  Updated : Sep 25, 2022 02:07 pm IST

Iran Hijab Protests: माहसा अमीनी की मौत के बाद सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतर कर सरकार विरोधी नारे लगाए, जो इस्लामिक शासन को और देश के सर्वोच्च नेता अयातोल्ला अली खामेनेई के प्रति लक्षित थे। प्रदर्शनकारियों में ज्यादातर महिलाएं हैं।

Iran Hijab Protest Against Government- India TV Hindi
Iran Hijab Protest Against Government Image Source : INDIA TV

Highlights

  • ईरान में हिजाब के खिलाफ प्रदर्शन
  • सरकार के खिलाफ सड़कों पर लोग
  • सुप्रीम लीडर के पोस्टर फाड़े गए

Iran Hijab Protests: ईरान में दिन ब दिन हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। स्थिति कितनी खराब है इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि प्रदर्शनों को शांत कराने के लिए सेना ने पुलिस का साथ देने की बात कही है। यानी सरकार लोगों पर सैन्य बल का इस्तेमाल कर सकती है। लोगों में सरकार के खिलाफ इस कदर तक गुस्सा बढ़ गया है कि वह उसी सर्वोच्च धार्मिक नेता यानी सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के पोस्टर फाड़ रहे हैं, जिनकी कही किसी भी बात को वह सिर झुकाकर मानते आए हैं। यहां एक 22 वर्षीय कुर्द महिला की हिरासत में हुई मौत को लेकर सरकार के खिलाफ व्यापक स्तर पर हो रहा प्रदर्शन करीब 80 शहरों में फैल गया है। उक्त महिला को पुलिस ने हिजाब से जुड़े सख्त कानून का कथित तौर पर उल्लंघन करने को लेकर गिरफ्तार किया था। 

माहसा अमीनी की मौत के बाद सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतर कर सरकार विरोधी नारे लगाए, जो इस्लामिक शासन को और देश के सर्वोच्च नेता अयातोल्ला अली खामेनेई के प्रति लक्षित थे। प्रदर्शनकारियों में ज्यादातर महिलाएं हैं। ईरानी सरकारी टेलीविजन ने शुक्रवार को कहा कि सुरक्षा बलों के साथ हिंसक झड़पों में मरने वालों की संख्या बढ़ कर 26 पहुंच गई है। बताया जाता है कि यह अशांति हाल के वर्षों में सबसे व्यापक है, जो करीब 80 ईरानी शहरों में फैल गई है।

सुरक्षाकर्मियों की भी हुई मौत

इसने बताया कि मशहद, कुचान, शिराज, तबरीज और कराज में प्रदर्शकारियों को नियंत्रित करने की कोशिश के दौरान कम से कम पांच सुरक्षा कर्मी मारे गए हैं और कई अन्य घायल हो गए। अमीनी की मौत ने इस्लामी राष्ट्र में व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर पाबंदियों को लेकर लंबे समय से व्याप्त रोष को भड़का दिया है। पिछले कुछ दिनों में, कुछ प्रदर्शनकारी महिलाओं ने सड़कों पर अपने हिजाब जला दिये, जिसे एक अवज्ञा की एक अभूतपूर्व गतिविधि के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, प्रदर्शनकारी पुरुषों ने धार्मिक नगरी कोम और इस्फहान सहित कई शहरों में सर्वोच्च नेता के पोस्टर जलाए।

प्रदर्शनकारियों ने रिवोल्युशनरी गार्ड के कमांडर कासिम सुलेमानी के पोस्टर फाड़ डाले और जला दिए। सुलेमानी जनवरी 2000 में अमेरिका के एक ड्रोन हमले में अपने गृह नगर केरमान में मारे गए थे। ईरानी कानून यह प्रावधान करता है कि सभी महिलाएं सार्वजनिक स्थानों पर सिर को कपड़ों से ढंक कर रखेंगी और ढीले परिधान पहनेंगी। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से यह नियम लागू है। यह देश में हर महिला पर लागू होता है। उत्तर-पश्चिमी शहर साकेज की रहने वाली अमीनी की तीन दिनों तक कोमा में रहने के बाद 16 सितंबर को मौत हो गई थी। वह तेहरान में अपने भाई के साथ थी, जब उसे सैन्य पुलिस ने गिरफ्तार किया था। वह एक हिरासत केंद्र में गिरने के कुछ ही देर बाद कोमा में चली गई थी।

Iran Hijab Protest Against Government
Image Source : APIran Hijab Protest Against Government

मानवाधिकारों के लिए संयुक्त राष्ट्र के कार्यवाहक आयुक्त नदा अल नशीफ ने कहा कि खबरों में दावा किया गया था कि पुलिस ने अमीनी के सिर पर एक डंडे से वार किया और उसका सिर एक वाहन से टकरा दिया। हालांकि, पुलिस ने आरोपों से इनकार किया और कहा कि उसे दिल का दौरा पड़ा था। इस बीच, ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ने कहा है कि पुलिस हिरासत में हुई मौत की शीघ्रता से जांच कराई जाएगी।

किसके खिलाफ लगाए जा रहे नारे?

प्रदर्शनकारी देश के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्लाह अली खामनेई के खिलाफ भी नारेबाजी कर रहे हैं। जिसके चलते उनपर पुलिस ने गोलीबारी की। इस देश में चुनाव होते हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था भी है, लेकिन बावजूद इसके सभी अहम फैसले खामनेई लेते हैं। यहां की सरकार के लिए एक हैरान करने वाली बात ये भी है कि महिलाओं के साथ पुरुष भी बढ़ चढ़कर इन प्रदर्शनों में हिस्सा ले रहे हैं। कुर्द आबादी वाले इलाकों में सुरक्षाबलों की लोगों के साथ झड़प होने की खबर आई हैं। मृतका माहसा के शहर में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की है। उनके अंतिम संस्कार के बाद प्रदर्शनकारी गवर्नर हाउस के बाहर एकत्रित हुए थे। जहां सुरक्षाकर्मियों ने उनपर गोलियां चलाना शुरू कर दिया।

ईरान का हिजाब कानून क्या है?

इस्लामी क्रांति (1978-79) के बाद ईरान ने 1981 में एक अनिवार्य हिजाब कानून पारित किया था। इस्लामी दंड संहिता के अनुच्छेद 638 में कहा गया है कि महिलाओं का सार्वजनिक रूप से या सड़कों पर हिजाब के बिना दिखाई देना अपराध है। द गार्जियन ने इस महीने की शुरुआत में बताया था कि ईरानी अधिकारी उन महिलाओं की पहचान करने के लिए सार्वजनिक परिवहन में फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी का उपयोग करने की योजना बना रहे हैं, जो हिजाब नियमों का ठीक से पालन नहीं कर रही हैं। 

इसी साल जुलाई में नेशनल हिजाब और चैसटिटी डे (राष्ट्रीय हिजाब और शुद्धता दिवस) पर ईरान में व्यापक विरोध देखा गया, जहां महिलाओं ने सार्वजनिक रूप से अपने हिजाब को हटाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया था। कई लोगों ने सार्वजनिक परिवहन में हिजाब नहीं पहनने की तस्वीरें और वीडियो भी पोस्ट किए थे।

ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी ने जुलाई में ईरान के हिजाब और शुद्धता कानून को नए प्रतिबंधों के साथ लागू करने के लिए एक आदेश पारित किया था। सरकार ने 'अनुचित तरीके से हिजाब' पहनने जैसे मामलों को रोकने के लिए हाई हील्स और मोजा पहनने के खिलाफ भी आदेश जारी किया। इस आदेश में महिलाओं के लिए अपनी गर्दन और कंधों को ढंकना अनिवार्य कर दिया गया। 

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