काठमांडू: नेपाल की बालेन शाह सरकार ने भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति के आरोपों पर लगाम लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 2006 से अब तक सार्वजनिक पदों पर रहे नेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों की संपत्ति की जांच के लिए एक विशेष आयोग का गठन किया है। यह फैसला प्रधानमंत्री कार्यालय में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया और इसे एक 'मास्टरस्ट्रोक' माना गया है। सरकार के प्रवक्ता और शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री सस्मित पोखरेल ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि 2006 से अब तक सभी अफसरों और नेताओं की संपत्ति की जांच की जाएगी।।
जानें सरकार ने किन्हें सौंपी ये अहम जिम्मेदारी
सरकार द्वारा गठित 5 सदस्यीय ‘प्रॉपर्टी इन्वेस्टिगेशन कमीशन’ की अध्यक्षता पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज राजेन्द्र कुमार भंडारी करेंगे। आयोग के अन्य सदस्यों में पूर्व जज चंडी राज ढकाल और पुरुषोत्तम पराजुली, नेपाल पुलिस के पूर्व डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल गणेश केसी और चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रकाश लम्साल शामिल हैं। इस आयोग को 2006 से लेकर मौजूदा वित्त वर्ष 2025-26 तक के दौरान प्रमुख राजनीतिक पदाधिकारियों और वरिष्ठ अधिकारियों की संपत्ति का ब्योरा जुटाने और उसकी जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है। साल 2006 नेपाल के लिए अहम रहा था, जब वहां ‘पीपुल्स मूवमेंट-2’ के जरिए बड़े राजनीतिक बदलाव हुए थे।
पीएम बालेन शाह ने पूरा किया अपना वादा
यह आयोग प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार के उस वादे को पूरा करता है, जो उन्होंने सत्ता संभालने के तुरंत बाद किया था। 27 मार्च को कैबिनेट ने 15 दिनों के भीतर इस तरह की व्यवस्था बनाने का निर्णय लिया था। नेपाल में लंबे समय से सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों की संपत्ति को लेकर पारदर्शिता का मुद्दा विवादों में रहा है। अक्सर भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और बिना हिसाब वाली संपत्ति जमा करने के आरोप सामने आते रहे हैं। सरकार का मानना है कि इस आयोग के जरिए न केवल संपत्ति की पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि जनता का भरोसा भी मजबूत होगा और प्रशासन में जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकेगी।