सियोल: उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच संबंध जगजाहिर हैं। हाल ही में दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया के साथ तनाव कम करने के संकेत दिए थे। इसी क्रम में अब दक्षिण कोरिया की सेना ने सोमवार को कहा कि उसने उत्तर कोरिया के साथ लगती अपनी सीमा पर लगे लाउडस्पीकर को हटाना शुरू कर दिया है, जो दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की दिशा में एक कदम है। दक्षिण कोरिया की ओर से उठाए जा रहे इस तरह के कदमों का क्या प्रभाव देखने के मिलेगा यह तो आने वाले समय में ही साफ हो पाएगा।
कैसे होता था लाउडस्पीकर का प्रयोग?
लाउडस्पीकर पहले सीमा पार उत्तर कोरिया विरोधी प्रचार सामग्री प्रसारित करने के लिए उपयोग किए जाते थे, लेकिन दक्षिण कोरिया की नई उदारवादी सरकार ने जून में इनका इस्तेमाल रोक दिया था। यह कदम आपसी विश्वास बहाल करने और उत्तर कोरिया के साथ संवाद फिर से शुरू करने की कोशिश के तहत उठाया गया था। उत्तर कोरिया ने हाल के वर्षों में दक्षिण कोरिया के साथ सहयोग लगभग पूरी तरह से बंद कर दिया है।
उत्तर कोरिया ने नहीं दी प्रतिक्रिया
दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि सीमा से इन लाउडस्पीकर को हटाना एक और 'व्यावहारिक कदम' है, जो युद्ध से विभाजित कोरियाई देशों के बीच तनाव कम करने के लिए उठाया गया है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि इससे दक्षिण कोरिया की सैन्य तत्परता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया के इस कदम पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

कब हुआ कोरिया का विभाजन?
उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच विवाद की बात करें तो कोरिया का विभाजन द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वर्ष 1945 में हुआ था। जापान, जिसने 1910 से कोरिया पर कब्जा कर रखा था, युद्ध में हार गया था। इसके बाद अमेरिका और सोवियत संघ ने कोरिया को अस्थायी रूप से दो भागों में बांट दिया। उत्तर में सोवियत संघ का प्रभाव और दक्षिण में अमेरिका का प्रभाव रहा। 1948 में दोनों क्षेत्रों में अलग-अलग सरकारों का गठन हुआ।
कोरियाई युद्ध (1950-1953)
वर्ष 1950 में उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया पर आक्रमण कर दिया, जिससे कोरियाई युद्ध शुरू हुआ। यह युद्ध तीन वर्षों तक चला और लगभग 30 लाख लोगों की जान गई। संयुक्त राष्ट्र, मुख्यरूप से अमेरिका की अगुआई में, दक्षिण कोरिया की सहायता के लिए आया, जबकि चीन ने उत्तर कोरिया का समर्थन किया। 1953 में एक युद्धविराम समझौता हुआ, लेकिन आज तक कोई औपचारिक शांति संधि नहीं हुई है, जिससे दोनों देश तकनीकी रूप से आज भी युद्ध की स्थिति में हैं। (एपी)
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