1. Hindi News
  2. विदेश
  3. अमेरिका
  4. भारत-ईरान के बीच चाबहार डील पर अमेरिका की नजर

भारत-ईरान के बीच चाबहार डील पर अमेरिका की नजर

 Written By: India TV News Desk
 Published : May 25, 2016 02:07 pm IST,  Updated : May 25, 2016 02:07 pm IST

अमेरिकी सीनेटरों ने मंगलवार को ईरान के चाबहार बंदरगाह के विकास की भारत की योजना पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि व्यापार के विस्तार के लिए की जा रही यह कवायद कहीं अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का उल्लंघन तो नहीं है।

modi iran- India TV Hindi
modi iran

वाशिंगटन: अमेरिकी सीनेटरों ने मंगलवार को ईरान के चाबहार बंदरगाह के विकास की भारत की योजना पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि व्यापार के विस्तार के लिए की जा रही यह कवायद कहीं अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का उल्लंघन तो नहीं है। अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रशासन इस योजना पर बारीकी से निगाह जमाए हुए है।

दक्षिण तथा मध्य एशिया मामलों की विदेश उप मंत्री निशा देसाई विश्वाल ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन भारत को ईरान पर लगे प्रतिबंधों की जानकारी देता रहा है। उन्होंने सीनेट की विदेशी मामलों की समिति की बैठक में कहा, हमें चाबहार परियोजना के निर्माण पर विस्तार के साथ विचार करना होगा। विश्व के छह प्रमुख देशों को ईरान के साथ परमाणु समझौते के बाद यूरोप तथा अमेरिका ने तेहरान के विरूद्ध लगे प्रतिबंधों को जनवरी से उठा लिया था लेकिन कुछ प्रतिबंध जारी हैं, जो मानवाधिकार तथा आतंकवाद से जुड़े हैं।

पीएम नरेन्द्र मोदी ने चाबहार बंदरगाह परियोजना के निर्माण के समझौते पर ईरान तथा अफगानिस्तान के राष्ट्रपति के साथ हस्ताक्षर किया था और परियोजना के लिए 50 करोड़ डॉलर की रकम देने की घोषणा की थी। इससे भारत के लिए ईरान, अफगानिस्तान तथा मध्य एशिया के साथ व्यापार का रास्ता खुलेगा। पाकिस्तान ने भारत के लिये इस रास्ते को बंद कर रखा था।

बिस्वाल ने कहा कि उनका मानना है कि भारत के ईरान के साथ रिश्ते प्राथमिक तौर पर आर्थिक और ऊर्जा के मु्द्दे पर आधारित हैं और अमेरिकी प्रशासन व्‍यापारिक रास्ते (ट्रेड रूट) के लिए भारत की जरूरतों का भली भांति समझता हैं। उन्‍होंने कहा कि भारतीय परिप्रेक्ष्य में ईरान, भारत के लिए अफगानिस्तान और मध्‍य एशिया का द्वार खोलता हैं। यह भारत को वह 'पहुंच'  उपलब्‍ध कराता है जो किस अभी उसके पास नहीं है।

बिस्वाल के अनुसार, उन्‍हें भारत के ईरान के साथ सैन्य सहयोग जैसे किसी रिश्ते के संकेत नहीं मिले हैं जो कि निश्चित रूप से अमेरिका के लिए चिंता का विषय बन सकते थे। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अगले माह अमेरिका का दौरा करना है जहां वह अमेरिकी कांग्रेस की संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगे।

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। US से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें विदेश