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Navratri 2020: नवरात्र के पांचवे दिन ऐसे करें स्कंदमाता की पूजा, आएगी सुख-समृद्धि

Written by: India TV Lifestyle Desk Published : Oct 20, 2020 09:15 pm IST, Updated : Oct 21, 2020 06:53 am IST

शारदीय नवरात्र के पांचवे दिन देवी दुर्गा के स्कंदमाता स्वरूप की उपासना की जाएगी। इनकी उपासना से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।

Navratri 2020: नवरात्र का पांचव दिन, जानें स्कंदमाता की पूजा विधि, मंत्र और आरती - India TV Hindi
Image Source : INDIA TV Navratri 2020: नवरात्र का पांचव दिन, जानें स्कंदमाता की पूजा विधि, मंत्र और आरती 

आश्विन शुक्ल पक्ष की उदया तिथि पंचमी और बुधवार का दिन है। पंचमी तिथि सुबह 9 बजकर 8 मिनट तक रहेगी। उसके बाद षष्ठी तिथि लग जायेगी | इसके साथ ही नवरात्र उत्सव का पांचवा दिन पड़ रहा है। इस दिन देवी दुर्गा के स्कंदमाता स्वरूप की उपासना की जाएगी। इनकी उपासना से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। बता दूं कि देवताओं के सेनापति कहे जाने वाले स्कन्द कुमार, यानि कार्तिकेय की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है।  अतः देवी मां की कृपा बनाये रखने के लिये आज उनकी पूजा जरूर करनी चाहिए। साथ ही स्कंदमाता के मंत्र का जाप भी जरूर करना चाहिए। 

स्कंदमाता का स्वरूप

पुराणों के अनुसार, भगवान स्कंद के बालरूप को माता अपनी दाई तरफ की ऊपर वाली भुजा से गोद में बैठा हुए है। स्कंदमाता स्वरुपिणी देवी की चार भुजाएं हैं। ये दाहिनी तरफ की ऊपर वाली भुजा से भगवान स्कंद को गोद में पकड़े हुए हैं। बाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा वरमुद्रा में और नीचे वाली भुजा जो ऊपर की ओर उठी है, उसमें कमल-पुष्प लिए हुए हैं।

ऐसे करें स्कंदमाता की पूजा 

सबसे पहले चौकी पर स्कंदमाता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद गंगा जल या गोमूत्र से शुद्धिकरण करें। चौकी पर चांदी, तांबे या मिट्टी के घड़े में जल भरकर उस पर नारियल रखकर कलश स्थापना करें। इसके बाद उस चौकी में श्रीगणेश, वरुण, नवग्रह, षोडश मातृका (16 देवी), सप्त घृत मातृका(सात सिंदूर की बिंदी लगाएं) की स्थापना भी करें। फिर वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारा स्कंदमाता सहित समस्त स्थापित देवताओं की षोडशोपचार पूजा करें।

इसमें आवाहन, आसन, पाद्य, अ‌र्ध्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधित द्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्र पुष्पांजलि आदि करें। तत्पश्चात प्रसाद वितरण कर पूजन संपन्न करें।

स्कंदमाता का मंत्र

या देवी सर्वभू‍तेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

या फिर

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

मां की पूजा के बाद शिव शंकर और ब्रह्मा जी की पूजा करनी चाहिए। ऐसा शास्त्रों में कहा गया है। देवी स्कन्द माता की भक्ति-भाव सहित पूजन करते हैं उसे देवी की कृपा प्राप्त होती है। देवी की कृपा से भक्त की मुराद पूरी होती है और घर में सुख, शांति एवं समृद्धि रहती है। वात, पित्त, कफ जैसी बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति को स्कंदमाता की पूजा करनी चाहिए।

स्कंदमाता का भोग
मां को केले का भोग अति प्रिय है। इन्हें केसर डालकर खीर का प्रसाद भी चढ़ाना चाहिए।

स्कंदमाता की आरती

जय तेरी हो स्कंध माता
पांचवा नाम तुम्हारा आता
सब के मन की जानन हारी
जग जननी सब की महतारी
तेरी ज्योत जलाता रहू मै
हरदम तुम्हे ध्याता रहू मै
कई नामो से तुझे पुकारा
मुझे एक है तेरा सहारा
कही पहाड़ो पर है डेरा
कई शेहरो मै तेरा बसेरा
हर मंदिर मै तेरे नजारे
गुण गाये तेरे भगत प्यारे
भगति अपनी मुझे दिला दो
शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो
इन्दर आदी देवता मिल सारे
करे पुकार तुम्हारे द्वारे
दुष्ट दत्य जब चढ़ कर आये
तुम ही खंडा हाथ उठाये
दासो को सदा बचाने आई
'चमन' की आस पुजाने आई

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