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बिहार के प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर सीएम सम्राट चौधरी सख्त, फीस और अन्य चीजों को लेकर उठाया बड़ा कदम

 Reported By: Nitish Chandra, Edited By: Mangal Yadav
 Published : May 12, 2026 09:11 pm IST,  Updated : May 12, 2026 09:18 pm IST

सीएम सम्राट चौधरी ने निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की घोषणा की है। अब निजी स्कूल के छात्र-छात्राओं के अभिभावक अपनी सुविधानुसार किसी भी दुकान या बिक्रेता से पुस्तकें एवं पठन-पाठन सामग्री और अन्य सामग्री खरीद सकते हैं।

सीएम सम्राट चौधरी- India TV Hindi
सीएम सम्राट चौधरी। फाइल Image Source : ANI

पटनाः मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य के निजी स्कूलों में मनमानी रोकने, फीस को नियंत्रित करने और छात्रों और अभिभावकों के हितों की रक्षा करने के लिये बड़ा कदम उठाया है। अब निजी विद्यालयों को सभी प्रकार के शुल्कों का विवरण सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा। निजी विद्यालयों द्वारा पुनर्नामांकन शुल्क एवं अन्य प्रतिबंधित शुल्क नहीं लिया जायेगा। इससे निजी स्कूलों के द्वारा फीस की मनमानी बढ़ोतर एवं अनावश्यक शुल्क पर रोक लगेगा। 

 निजी शिक्षण संस्थानों में जवाबदेही और पारदर्शिता के लिए उठाया कदम

अब निजी स्कूल के छात्र-छात्राओं के अभिभावक अपनी सुविधानुसार किसी भी दुकान या बिक्रेता से पुस्तकें एवं पठन-पाठन सामग्री तथा अन्य सामग्री खरीद सकते हैं। संबंधित निजी विद्यालय किसी दुकान से और किसी ब्रांड का सामान खरीदने के लिये बाध्य नहीं कर सकता है। साथ ही अब अभिभावक अपनी सुविधानुसार किसी भी दुकान या बिक्रेता से पोशाक खरीद सकते हैं। छात्र-छात्राओं के शुल्क बकाया रहने की स्थिति में भी कक्षा, परीक्षा अथवा परिणाम से वंचित नहीं किया जायेगा। अगर कोई सरकार के आदेश का उल्लंघन किया तो कार्रवाई की जाएगी।

मंगलवार को X पर शेयर की गई एक पोस्ट में, चौधरी ने कहा कि सरकार निजी शिक्षण संस्थानों में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार, अब निजी स्कूलों को अपनी पूरी फीस संरचना सार्वजनिक रूप से बतानी होगी। फीस में मनमानी बढ़ोतरी की अनुमति नहीं होगी। अनावश्यक शुल्क पर रोक होगी।

स्कूलों की मनमानी से अभिभावक परेशान

यह कदम बिहार में निजी स्कूलों के तौर-तरीकों को लेकर बढ़ती सार्वजनिक आलोचना के बीच उठाया गया है। सरकारी स्कूलों में शिक्षण और सीखने की गुणवत्ता को लेकर लगातार बनी चिंताओं के कारण, पूरे राज्य में निजी शिक्षण संस्थानों पर निर्भरता काफी बढ़ गई है। हालांकि, कई माता-पिता ने कुछ स्कूलों पर शिक्षण संस्थानों के बजाय व्यावसायिक उद्यमों की तरह काम करने का आरोप लगाया है। 

अधिकारियों ने कहा कि बिहार के कई हिस्सों में जिला प्रशासन ने माता-पिता की शिकायतों के बाद पहले ही कार्रवाई शुरू कर दी है।  इस पृष्ठभूमि में, राज्य सरकार ने एक व्यापक नियामक ढांचा पेश करने का निर्णय लिया है, जिसका उद्देश्य निजी स्कूलों पर निगरानी को मजबूत करना और छात्रों तथा अभिभावकों के हितों की रक्षा करना है।

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