कटिहार: कटिहार पुलिस ने सीमांचल में स्मैक की तस्करी के काले खेल का पर्दाफाश करते हुए एक महिला को गिरफ्तार कर 800 ग्राम स्मैक बरामद की है। बरामद स्मैक की बाजार में कीमत 8 से 10 लाख रुपये बताई जा रही है। बताया जाता है कि महिला पहले स्मैक की कालाबाजारी में अपने पति का साथ देती थी और बाद में खुद स्मैक डिलीवरी में उतर चुकी है।
पति की गैरमौजूदगी में पत्नी संभाल रही थी काला कारोबार
कटिहार पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर रौतारा थाना क्षेत्र से 800 ग्राम स्मैक के साथ एक महिला तस्कर को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि छोटू नामक युवक की गैरमौजूदगी में उसकी पत्नी ही तस्करी का पूरा काम संभाल रही थी। इस मामले ने एक बार फिर दिखा दिया कि कैसे यह ज़हर सीमांचल में फैलाया जा रहा है।
पति पहले भी स्मैक तस्करी के मामले में जा चुका है जेल
एएसपी अभिजीत कुमार सिंह ने इस मामले का खुलासा करते हुए बताया कि इस महिला का पति छोटू पासवान पहले भी स्मैक तस्करी को लेकर जेल जा चुका है और हाल के दिनों में वह जेल से बेल पर छूटने के बाद फिर से स्मैक तस्करी के मामले में ही प्राणपुर थाना क्षेत्र से गिरफ्तार होने के बाद फिलहाल जेल में है।
बंगाल के रास्ते सीमांचल में फैल रहा है सफेद नशा
पुलिस की मानें तो छोटू के गैर मौजूदगी में उनकी पत्नी ही स्मैक डिलीवरी के काम को संभाल रही थी। पुलिस ने खुफिया सूचना के आधार पर छापा मारकर 800 ग्राम स्मैक के साथ महिला को गिरफ्तार कर लिया। बरामद स्मैक का बाजार मूल्य लगभग 8 से 10 लाख रुपये बताई जा रहा है। सफेद नशा के इस काला खेल में एक बार फिर बंगाल के रास्ते सीमांचल के इलाके तक स्मैक तस्करी के मामला सामने आया है।
स्मैक एक जानलेवा नशा
बता दें कि स्मैक एक जानलेवा नशा है जो व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से पूरी तरह खत्म कर देता है। रासायनिक रूप से इसे डाई-एसिटिल-मॉर्फीन (Diacetylmorphine) कहा जाता है। यह एक ओपिओइड (Opioid) ड्रग है, जिसका मतलब है कि यह सीधे व्यक्ति के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System) पर असर डालता है। स्मैक को मॉर्फीन से बनाया जाता है, जिसे अफीम के पौधे (Poppy Plant) के दूध (लेटेक्स) से निकाला जाता है। मॉर्फीन के एसिटिलीकरण (Acetylation) की प्रक्रिया से हेरोइन यानी स्मैक बनती है। यह आमतौर पर एक सफेद या भूरे रंग के पाउडर के रूप में मिलती है।
रिपोर्ट-निरंजन सिंह, कटिहार