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कश्मीर के कुलगाम में आतंकी हमला, छत्तीसगढ़ के 2 श्रमिकों की मौत, सीएम साय ने दुख जताया, कहा- 'सरकार पीड़ित परिवारों के साथ'

 Reported By: Manzoor Mir Written By: Shakti Singh
 Published : Aug 01, 2026 08:10 am IST,  Updated : Aug 01, 2026 10:06 am IST

कश्मीर में बाहरी श्रमिकों पर हुए हमले में छत्तीसगढ़ के दो श्रमिकों की मौत हुई है। सीएम साय ने कहा कि सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है। वहीं, सुरक्षाबल आतंकियों की तलाश में सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं।

Jammu Kashmir- India TV Hindi
चेकिंग में खड़े सुरक्षाकर्मी (बाएं), घायलों को अस्पताल ले जाती मेडिकल टीम (दाएं) Image Source : PTI

जम्मू कश्मीर के कुलगाम में शुक्रवार शाम आतंकियों ने प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाते हुए हमला कर दिया। इस हमले में छत्तीसगढ़ के दो श्रमिकों की मौत हो गई। वआतंकियों ने गोलीबारी कर दोनों को घायल कर दिया था। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने दीपक नाम के व्यक्ति को मृत घोषित कर दिया। वहीं, भूपेंद्र कुमार ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस घटना पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दुख जताया और कहा कि सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है।

सीएम साय के पोस्ट करते समय एक मजदूर का इलाज जारी था। ऐसे में उन्होंने एक्स पर लिखा, "कश्मीर के कुलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले में छत्तीसगढ़ के एक श्रमिक की दुखद मृत्यु एवं एक श्रमिक के घायल होने की खबर अत्यंत पीड़ादायक है। घायल श्रमिक का स्थानीय अस्पताल में समुचित इलाज जारी है। अधिकारियों को इस संदर्भ में आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। छत्तीसगढ़ सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है। मृतक श्रमिक को विनम्र श्रद्धांजलि एवं घायल श्रमिक के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना।"

इलाज के दौरान भूपेंद्र ने भी दम तोड़ा

कुलगाम में हमलावरों ने देर शाम केलम स्थित ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे मजदूरों को निशाना बनाकर गोलीबारी की। इसमें 24 साल के दीपक रात्रे की मौत हो गई। वहीं, 28 साल के भूपेंद्र गंभीर रूप से घायल हुए थे। भूपेंद्र को पहले जीएमसी अनंतनाग ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे सौरा के एसकेआईएमएस अस्पताल में रेफर कर दिया। हालांकि, इलाज के दौरान भूपेंद्र की भी मौत हो गई।

10 दिन पहले हुई थी पुलिसकर्मी की हत्या

कश्मीर में आतंकियों ने 10 दिन पहले एक पुलिसकर्मी की हत्या कर दी थी।  आतंकवादियों ने अनंतनाग शहर में एक पुलिस अधिकारी की गोली मार दी थी, जिससे उनकी मौत हो गई थी। अब इसी तरह की घटना में मजदूरों को निशाना बनाया गया है। घटना के बाद सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को घेर लिया है और सर्च ऑपरेशन जारी है। श्रीनगर में वाहनों की जांच के लिए चेकपॉइंट बनाया गया था। इस दौरान एक बिना नंबर प्लेट की कार वहां पहुंची और सुरक्षाकर्मियों को देख ड्राइवर भागने की कोशिश करने लगा। ट्रैफिक पुलिस के जवानों ने कार को रोकने की कोशिश की, लेकिन असफल रहे। हालांकि, बाद में कार को बरामद कर लिया गया और आगे की जांच शुरू कर दी है।

टीआरएफ ने ली हमले की जिम्मेदारी

पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा का ही एक हिस्सा और प्रॉक्सी माने जाने वाले संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। सोशल मीडिया पर फैल रहे संदेशों के मुताबिक, इस समूह ने बाहरी लोगों और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों पर और हमले करने की चेतावनी दी है। खबरों के अनुसार, यही वह समूह है जिसने 22 जुलाई को अनंतनाग में पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया था। घाटी में लगभग दस दिनों के भीतर यह दूसरा बड़ा आतंकी हमला है। 22 जुलाई को आतंकवादियों ने अनंतनाग के लाल चौक इलाके में जम्मू-कश्मीर पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की बहुत करीब से गोली मारकर हत्या कर दी थी। यह हमला अमरनाथ यात्रा के रास्ते पर एक भीड़-भाड़ वाले बाज़ार इलाके में हुआ। इस घटना से पता चलता है कि टारगेटेड किलिंग (खास लोगों को निशाना बनाकर हत्या) का दौर फिर से शुरू हो गया है।

घाटी में चुनिंदा हत्याओं की घटनाएं बढ़ीं

लगातार हुए इन हमलों ने कश्मीर में सुरक्षाकर्मियों और बाहरी नागरिकों की चुनिंदा हत्याओं के फिर से शुरू होने की चिंता बढ़ा दी है। यह एक ऐसा पैटर्न है जो हाल के वर्षों में सुरक्षा अभियानों के तेज़ होने और अनुच्छेद 370 हटने के बाद कुल आतंकी घटनाओं में भारी कमी आने के कारण काफी कम हो गया था। कई वर्षों तक, घाटी में बाहरी मज़दूरों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ इस तरह की चुनिंदा हिंसा का स्तर, उग्रवाद के शुरुआती दौर की तुलना में काफी कम रहा। सुरक्षा जानकारों का कहना है कि टीआरएफ जैसे संगठन बार-बार खुद को "स्थानीय प्रतिरोध" (लोकल रेजिस्टेंस) के तौर पर पेश करने की कोशिश करते हैं, जबकि वे पाकिस्तान स्थित संगठनों के पुराने तरीकों को ही अपनाते हैं। आसान लक्ष्यों (सॉफ्ट टारगेट), भाषा से पहचाने जाने वाले बाहरी मजदूरों और सुरक्षाकर्मियों को निशाना बनाकर डर फैलाना, आर्थिक गतिविधियों में बाधा डालना और सुर्खियां बटोरना।

दोनों हमलों की जांच कर रहीं एजेंसियां

छत्तीसगढ़, बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से आए प्रवासी मजदूर कश्मीर की मौसमी मजदूर आबादी का एक अहम हिस्सा हैं, खासकर निर्माण कार्य, ईंट-भट्टों और बागवानी के क्षेत्र में। उन पर हमले बाहरी लोगों में दहशत फैलाने के मकसद से किए जाते हैं। ताजा हत्याएं इस बात को रेखांकित करती हैं कि भले ही जम्मू-कश्मीर में हिंसा का कुल स्तर पिछले दशकों की तुलना में कम रहा है, लेकिन सीमा पार से समर्थित बचा-खुचा आतंकी इकोसिस्टम सुरक्षा बलों और बाहरी निवासियों को निशाना बनाकर चुनिंदा और हाई-प्रोफाइल हमले करने की कोशिशें जारी रखे हुए है। अनंतनाग और कुलगाम, दोनों घटनाओं की जांच चल रही है और सुरक्षा एजेंसियां ​​इसके लिए जिम्मेदार मॉड्यूल को खत्म करने की कोशिश कर रही हैं।

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