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बंदूक छोड़ अब हाथों में 5G स्मार्टफोन और हुनर, आधुनिक दुनिया से जुड़े 75 पूर्व माओवादी

 Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : Dec 17, 2025 08:46 pm IST,  Updated : Dec 17, 2025 08:46 pm IST

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देशों एवं उपमुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में सुकमा के नक्सल पुनर्वास केंद्र में आत्मसमर्पित माओवादियों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई।

पूर्व माओवादियों को मिला अत्याधुनिक 5G स्मार्टफोन - India TV Hindi
पूर्व माओवादियों को मिला अत्याधुनिक 5G स्मार्टफोन Image Source : REPORTER

छत्तीसगढ़ की नक्सल पुनर्वास नीति अब केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि ज़मीनी स्तर पर भटके हुए युवाओं की तकदीर बदल रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रशासन और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में सुकमा जिला प्रशासन ने एक अनूठी पहल की है। यहां आत्मसमर्पण कर चुके 75 पूर्व माओवादियों को अत्याधुनिक 5G स्मार्टफोन और 25 युवाओं को राजमिस्त्री (मेसन) किट वितरित की गई है।

सुकमा कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव और पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आत्मसमर्पित नक्सलियों को आधुनिक दुनिया और सरकारी योजनाओं से जोड़ना है।

75 युवाओं को सैमसंग गैलेक्सी M06 5G स्मार्टफोन

कार्यक्रम के दौरान 75 पुनर्वासित युवाओं को सैमसंग गैलेक्सी M06 5G स्मार्टफोन प्रदान किए गए, जिनमें 50 मेगापिक्सल डुअल कैमरा एवं 5000 mAh फास्ट-चार्जिंग बैटरी जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन स्मार्टफोनों के माध्यम से युवा अब डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास कार्यक्रमों, सरकारी योजनाओं और देश-दुनिया की जानकारी से सहजता से जुड़ सकेंगे।

इसके साथ ही, 25 पुनर्वासित युवाओं को मेसन किट प्रदान कर निर्माण क्षेत्र में रोजगार एवं स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित किया गया। यह पहल प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण सहित अन्य विकास कार्यों के लिए कुशल श्रमशक्ति तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

हुनर से आत्मनिर्भरता की ओर कदम

जिला प्रशासन ने बताया कि नक्सल पुनर्वास को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित न रखते हुए इसे आत्मनिर्भरता, सम्मान और सामाजिक समावेशन से जोड़ा जा रहा है। 5G स्मार्टफोन के माध्यम से पुनर्वासित युवा अब ऑनलाइन प्रशिक्षण, आधुनिक कृषि तकनीकों, छोटे व्यवसायों और स्वरोजगार के नए अवसरों को समझने और अपनाने में सक्षम होंगे। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी लोगों स्वरोजगार के नए अवसरों उपलब्ध कराने सरकार संकल्पित है l 

पुनर्वासित युवाओं ने साझा किए अनुभव

पोलमपल्ली निवासी पुनर्वासित पोड़ियम भीमा ने बताया कि वे लगभग 30 वर्षों तक डीवीसी सदस्य के रूप में संगठन से जुड़े रहे। पुनर्वास के बाद उन्हें बेहतर आवास, भोजन और प्रशिक्षण की सुविधा मिल रही है। उन्होंने बताया कि वे राजमिस्त्री के साथ-साथ इलेक्ट्रीशियन और मैकेनिक का प्रशिक्षण भी प्राप्त कर चुके हैं।

पुवर्ती निवासी मुचाकी रनवती ने बताया कि वे 24 वर्षों तक एसीएम सदस्य के रूप में नक्सल संगठन से जुड़ी रहीं। पुनर्वास के बाद उन्होंने सिलाई प्रशिक्षण प्राप्त किया और वर्तमान में राजमिस्त्री प्रशिक्षण ले रही हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें अपने परिजनों से मिलने का अवसर मिला और बस्तर ओलंपिक की संभागस्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेकर प्रथम पुरस्कार भी प्राप्त किया।

डब्बमरका, सुकमा निवासी गंगा वेट्टी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि जिला प्रशासन द्वारा मोबाइल और मेसन किट मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। उन्होंने कहा कि जंगल के जीवन की तुलना में वर्तमान जीवन सुरक्षित और सम्मानजनक है। शिविर लगाकर उनका आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड एवं जॉब कार्ड बनाया गया एवं शासन की सभी योजनाओं का लाभ उन्हें मिल रहा है।

सुकमा में की गई यह पहल इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ शासन की नीति केवल नक्सलवाद से मुकाबले तक सीमित नहीं है, बल्कि भटके हुए युवाओं को विश्वास, अवसर और सम्मान के साथ नया जीवन देने की ठोस कोशिश भी है। यह मॉडल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, विकास और सामाजिक समरसता की मजबूत नींव रख रहा है। इस अवसर पर जिले के प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।

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