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अरविंद केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, शीर्ष अदालत ने 1 जून तक दी अंतरिम जमानत

 Published : May 10, 2024 07:22 am IST,  Updated : May 10, 2024 02:16 pm IST

दिल्ली के मुख्यमंत्री एवं आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को कथित एक्साइज पॉलिसी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED ने 21 मार्च को गिरफ्तार किया था।

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल। Image Source : PTI

नई दिल्ली: दिल्ली एक्साइज पॉलिसी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED की जांच का समाना कर रहे सीएम अरविंद केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट ने आज बड़ी राहत दे दी। आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल को अदालत ने 1 जून तक के लिए अंतरिम जमानत दे दी है। उससे पहले गुरुवार को ED ने केजरीवाल की जमानत अर्जी का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया था, जिसमें केंद्रीय एजेंसी ने कहा था कि चुनाव प्रचार करना मौलिक अधिकार नहीं है। वहीं, ED के हलफनामे पर केजरीवाल की लीगल टीम ने कड़ी आपत्ति जताई थी। हालांकि ED की सभी दलीलों को दरकिनार करते हुए अदालत ने केजरीवाल को अंतरिम जमानत दे दी।

ED ने अपने हलफनामे में कही थीं ये बातें

ED ने अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत के मुद्दे पर हलफनामे के जरिये सुप्रीम कोर्ट में विरोध दर्ज कराया है और कहा है कि चुनाव में प्रचार करने का अधिकार न तो मौलिक अधिकार है और न ही संवैधानिक। हलफनामे में ED ने कहा है कि ऐसे कई उदाहरण हैं जहां राजनीतिज्ञों ने न्यायिक हिरासत में रहते हुए चुनाव लड़ा और कुछ जीते भी, लेकिन चुनाव प्रचार के लिए कभी अंतरिम जमानत नहीं दी गई। केंद्रीय एजेंसी ने कहा, ‘किसी भी नेता को चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत नहीं दी गई है, भले वह चुनाव नहीं लड़ रहा हो। यहां तक कि चुनाव लड़ने वाला उम्मीदवार भी यदि हिरासत में हो तो उसे अपने खुद के प्रचार के लिए भी अंतरिम जमानत नहीं दी जाती है।’

‘चुनाव प्रचार कोई संवैधानिक या कानूनी अधिकार नहीं’

ED ने हलफनामे में कहा था, ‘इस बात को ध्यान में रखना प्रासंगिक है कि चुनाव के लिए प्रचार करने का अधिकार न तो मौलिक अधिकार है, न ही संवैधानिक, यहां तक ​​कि यह कानूनी अधिकार भी नहीं है। उपरोक्त तथ्यात्मक और कानूनी दलीलों के मद्देनजर अंतरिम जमानत के आग्रह को खारिज कर दिया जाना चाहिए क्योंकि यह कानून के स्थापित सिद्धांतों के विपरीत होगा जो संविधान की मूल विशेषता है। केवल राजनीतिक चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत देना समानता के नियम के खिलाफ होगा और भेदभावपूर्ण होगा क्योंकि प्रत्येक नागरिक का कार्य/व्यवसाय/पेशा या गतिविधि उसके लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है।’

‘जेल में बंद सभी राजनीति राहत की मांग कर सकते हैं’

ED ने कहा था कि ऐसा समझना संभव नहीं होगा कि एक छोटे किसान या व्यापारी का काम किसी उस राजनीतिक नेता के प्रचार से कम महत्वपूर्ण है जो स्वीकार करता है कि वह चुनाव नहीं लड़ रहा है। इसने कहा कि यदि केजरीवाल को उनकी पार्टी के लिए लोकसभा चुनावों में प्रचार करने के लिए एक राजनीतिज्ञ होने के कारण कोई अंतरिम राहत दी जाती है, तो इसमें कोई दो राय नहीं है कि जेल में बंद सभी राजनीतिज्ञ यह दावा करते हुए समान राहत की मांग करेंगे कि वे भी इस श्रेणी में आते हैं। ED ने अपने 44 पृष्ठ के हलफनामे में कहा कि एक राजनीतिज्ञ एक आम नागरिक से अधिक किसी विशेष दर्जे का दावा नहीं कर सकता है।

केजरीवाल की कानूनी टीम ने हलफनामे पर जताई आपत्ति

केजरीवाल की कानूनी टीम ने सुप्रीम कोर्ट में उनकी अंतरिम जमानत के विरोध में ED द्वारा दाखिल हलफनामे पर आपत्ति जताई थी। टीम ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जानकारी दी कि इस संबंध में एक औपचारिक शिकायत सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में दर्ज कराई गई थी। ED के हलफनामे को कानूनी प्रक्रियाओं की घोर अवहेलना बताते हुए विज्ञप्ति में कहा गया था कि हलफनामा सुप्रीम कोर्ट की इजाजत के बिना दाखिल किया गया और ऐसे समय में जारी किया गया जब विषय की अंतिम सुनवाई शुक्रवार को शीर्ष अदालत में होनी है। बता दें कि केजरीवाल को 21 मार्च को गिरफ्तार किया गया था और फिलहाल वह न्यायिक हिरासत के तहत तिहाड़ जेल में बंद थे।

आम आदमी पार्टी को भी आरोपी बनाएगी ED

बता दें कि कथित शराब घोटाले केस में ED आम आदमी पार्टी को भी आरोपी बनाने वाली है। रिपोर्ट्स के मुताबि,, एक्साइज पॉलिसी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के इस मामले से संबंधित अपनी चार्जशीट में ED ने AAP को भी आरोपी के रूप में नामित करने की तैयारी की है। एजेंसी की चार्जशीट में AAP के साथ-साथ इसके राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और बीआरएस नेता के कविता का भी नाम शामिल करने की रिपोर्ट्स हैं। यदि ऐसा होता है तो न सिर्फ AAP की मुश्किलें बढ़ जाएंगी, बल्कि जमानत की राह देख रहे अरविंद केजरीवाल को भी तगड़ा झटका लग सकता है।

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