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Coronavirus: दिल्ली सरकार बढ़ा रही है बेड की संख्या, अस्पतालों में स्वास्थ्यकर्मियों की कमी

Reported by: Bhasha Published : Jun 25, 2020 07:54 pm IST, Updated : Jun 25, 2020 07:54 pm IST

ऐसे में जब राजधानी दिल्ली में निजी अस्पतालों में कोविड-19 मरीजों के लिए बेड की संख्या बढ़ायी जा रही है, कोरोना वायरस मरीजों के इलाज के लिए चिकित्सकों, नर्सों और अन्य पैरामेडिकल कर्मियों की कमी की शिकायतें आ रही हैं। 

Coronavirus: दिल्ली सरकार बढ़ा रही है बेड की संख्या, अस्पतालों में स्वास्थ्यकर्मियों की कमी- India TV Hindi
Image Source : PTI Coronavirus: दिल्ली सरकार बढ़ा रही है बेड की संख्या, अस्पतालों में स्वास्थ्यकर्मियों की कमी

नयी दिल्ली: ऐसे में जब राजधानी दिल्ली में निजी अस्पतालों में कोविड-19 मरीजों के लिए बेड की संख्या बढ़ायी जा रही है, कोरोना वायरस मरीजों के इलाज के लिए चिकित्सकों, नर्सों और अन्य पैरामेडिकल कर्मियों की कमी की शिकायतें आ रही हैं। निजी अस्पतालों का कहना है कि यह कमी इसलिए है क्योंकि कोरोना वायरस संबंधी जटिलताओं के इलाज के लिए विशेषज्ञों का अभाव है और इसलिए भी क्योंकि बड़ी संख्या में स्वास्थ्य देखभाल कर्मचारियों को पृथकवास में जाना पड़ा है।

 कई मेडिकल पेशेवरों ने संक्रमण के भय से या परिवार के दबाव के चलते नौकरियां छोड़ दीं जबकि अन्य ने अधिक पैसे और बीमा की मांग की है। हतोत्साहित कर्मचारी, सरकारी सहयोग नहीं मिलने, स्वास्थ्य कर्मियों में संक्रमण, परिवारों की अपने परिजन को कोविड-19 वार्ड में काम करने देने को लेकर अनिच्छा, मरीजों द्वारा सरकारी अस्पतालों की तुलना में निजी अस्पतालों को अधिक तरजीह देना ऐसे कुछ कारणों में शामिल हैं जिससे राष्ट्रीय राजधानी में निजी अस्पताल कर्मचारियों की कमी का सामना कर रहे हैं। 

कोरोना वायरस के मामलों में वृद्धि और सरकार द्वारा बैंक्वेट हॉल और होटलों को कोविड-19 इकाइयों में परिवर्तित करना और उन्हें अस्पतालों से सम्बद्ध करने के बीच इन अस्पतालों के प्रबंधन आंतरिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं। दिल्ली हर्ट एंड लंग इंस्टीट्यूट (डीएचएलआई) के अधिकारियों के अनुसार अस्पताल में कुछ नर्सों ने तो अस्पताल को कोविड-19 इकाई बनाने से पहले ही नौकरी छोड़ दी थी जबकि 15 प्रतिशत ने अस्पताल को कोविड-19 देखभाल इकाई बनाये जाने के बाद नौकरी छोड़ दी। इन नर्सों ने इसके लिए जो कारण बताये उनमें अभिभावकों का दबाव, निजी भय शामिल था। 

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इसी तरह से रोहिणी में सरोज सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल के एक अधिकारी ने बताया कि 40 से 50 प्रतिशत नर्सो ने अवागमन के साधनों की कमी और परिवार द्वारा उन्हें कोविड-19 ड्यूटी करने की इजाजत देने से इनकार जैसे कारण बताकर नौकरी छोड़ दी। डीएचएलआई के अध्यक्ष डा.के के सेठी ने कहा, ‘‘चिकित्सकों की कमी है। हमारे अस्पताल में एक हृदय चिकित्सा रोग इकाई है और हमारे चिकित्सक ऐसे मामलों के लिए प्रशिक्षित हैं। लेकिन इस तरह की बीमारी के लिए आपको कई तरह के विशेषज्ञों की जरुरत होती है जैसे इंटरनल मेडिसिन, रेस्पीरेटरी मेडिसिन विशेषज्ञ आदि। वे उपलब्ध नहीं हैं।’’ 

उन्होंने कहा, ‘‘रेजीडेंट चिकित्सक जो आपात इकाइयों को संभालते हैं वे काम करने से इनकार कर रहे हैं। कोई भी अस्पताल में नौकरी शुरू करने के लिए तैयार नहीं होता जब आप उन्हें यह कहते हैं उन्हें कोविड-19 वार्ड में काम करना होगा। जो काम करने के लिए तैयार भी हैं वे लगभग तीन से चार गुना अधिक वेतन मांग रहे हैं।’’ दिल्ली सरकार राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस के मामलों से निपटने के लिए बेड की क्षमता बढ़ा रही है, कोविड-19 के कुल मामले दिल्ली में अगले महीने के अंत तक बढ़कर 5.5 लाख होने की आशंका है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा मानवीय कारकों को ध्यान में रखे बिना किया जा रहा है।

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