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शराब घोटाला: CM केजरीवाल को नहीं मिली राहत, अदालत ने फिर बढ़ाई न्यायिक हिरासत

 Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : Aug 20, 2024 03:23 pm IST,  Updated : Aug 20, 2024 03:48 pm IST

दिल्ली की एक अदालत ने सीबीआई द्वारा दर्ज शराब घोटाले के सिलसिले में अरविंद केजरीवाल की न्यायिक हिरासत फिर से बढ़ा दी है।

अरविंद केजरीवाल की न्यायिक हिरासत बढ़ी- India TV Hindi
अरविंद केजरीवाल की न्यायिक हिरासत बढ़ी Image Source : PTI

दिल्ली की एक अदालत ने शराब घोटाले के सिलसिले में सीबीआई की ओर से दर्ज भ्रष्टाचार के एक मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की न्यायिक हिरासत की अवधि मंगलवार को 27 अगस्त तक बढ़ा दी। विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा ने आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता केजरीवाल की न्यायिक हिरासत की अवधि समाप्त होने पर उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए अदालत के समक्ष पेश किए जाने के बाद उनकी हिरासत अवधि 27 अगस्त तक बढ़ा दी। अदालत केजरीवाल के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दाखिल पूरक आरोपपत्र पर 27 अगस्त को विचार कर सकती है।

SC ने अंतरिम जमानत देने से किया इनकार

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने शराब घोटाला केस में सीबीआई द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार मामले में अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया और गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर जांच एजेंसी से जवाब मांगा। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्जल भूइयां की पीठ के समक्ष जैसे ही सुनवाई शुरू हुई, केजरीवाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि उन्हें कथित घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में तीन बार अंतरिम जमानत मिली है और धन शोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) के तहत मामलों में जमानत दिए जाने के लिए कठोर शर्तें भी लगाई गई हैं। सिंघवी ने 20 जून को निचली अदालत द्वारा दी गई नियमित जमानत के साथ ही 10 मई और 12 जुलाई को पारित सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम जमानत आदेशों का हवाला दिया। उन्होंने पीठ को सूचित किया कि दिल्ली हाई कोर्ट ने मौखिक रूप से निचली अदालत के 20 जून के आदेश पर रोक लगा दी थी।

केजरीवाल के वकील ने दी थीं ये दलीलें

सिंघवी ने दलील दी कि जब केजरीवाल को पीएमएलए के तहत लगाई कड़ी शर्तों के बावजूद जमानत दी जा सकती है, तो उन्हें सीबीआई के मामले में नियमित जमानत देने से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि भ्रष्टाचार रोकथाम कानून में वैसे कठोर प्रावधान नहीं हैं जैसे कि धन शोधन रोधी कानून में हैं। सिंघवी ने कहा, "मुझे यह कहना अच्छा नहीं लगता, लेकिन मैंने यह बात हर जगह कही है। गिरफ्तारी के इस मामले को इंश्योरेंस अरेस्ट कहा जा सकता है। आपने 23 अप्रैल को 9 घंटे तक मुझसे पूछताछ की थी, 24 मार्च को ईडी द्वारा मुझे गिरफ्तार करने तक आपने कोई कार्रवाई नहीं की। मुझे जमानत के तीन आदेश मिले और आदेश के बाद मुझे जून में गिरफ्तार कर लिया गया।"

केजरीवाल की स्वास्थ्य चिंताओं के संदर्भ में सिंघवी ने अंतरिम जमानत का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि जमानत का अनुरोध करने वाली एक याचिका पहले ही दायर की जा चुकी है। शीर्ष अदालत ने सिंघवी से कहा, "हम कोई अंतरिम जमानत नहीं दे रहे हैं।" इसके बाद वरिष्ठ अधिवक्ता ने जल्दी सुनवाई करने का अनुरोध किया और पीठ ने अगली सुनवाई के लिए 23 अगस्त की तारीख तय कर दी। 

दिल्ली HC ने गिरफ्तारी को रखा था बरकरार

इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने केजरीवाल की गिरफ्तारी को 5 अगस्त को बरकरार रखा था और कहा था कि सीबीआई के कदमों में कोई दुर्भावना नहीं है, जिसने दिखाया है कि आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख कैसे उन गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं, जो उनकी गिरफ्तारी के बाद ही गवाही देने का साहस जुटा सकते हैं। हाई कोर्ट ने उन्हें सीबीआई मामले में नियमित जमानत के लिए निचली अदालत का रुख करने को कहा था। अदालत ने कहा था कि सीबीआई की ओर से केजरीवाल की गिरफ्तारी और प्रासंगिक साक्ष्य एकत्र करने के बाद उनके खिलाफ साक्ष्यों का चक्र बंद हो गया और यह नहीं कहा जा सकता कि यह बिना किसी उचित कारण के या अवैध था। अदालत ने कहा कि केजरीवाल कोई साधारण नागरिक नहीं हैं, बल्कि मैगसायसाय पुरस्कार विजेता और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक हैं।

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