दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शराब की बिक्री से जुड़े सभी सरकारी उपक्रमों के पिछले पांच वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड्स का गहन क्रॉस-वेरिफिकेशन करने के निर्देश दिए हैं। यह निर्णय उन रिपोर्टों के बाद लिया गया है, जिनमें यह सामने आया है कि कई स्थानों पर लंबे समय से खातों का मिलान नहीं किया गया है, जिससे भारी वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है।
सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि इसे सुधारने के लिए अब खातों की सख्त निगरानी होगी, हर रिकॉर्ड का ठीक से मिलान किया जाएगा और पूरी प्रक्रिया में वेरिफिकेशन और वैलिडेशन सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जांच में यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता या राजस्व को नुकसान पहुंचाने की बात सामने आती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि सभी संबंधित संस्थाओं और आबकारी विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस पूरी प्रक्रिया की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर आदेश जारी होने की तारीख से 2 महीने के भीतर वित्त विभाग को अनिवार्य रूप से सौंपें।
दिल्ली आबकारी नीति केस
वही, दिल्ली आबकारी नीति मामले में सोमवार का दिन बेहद निर्णायक होने वाला है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी (AAP) के कई दिग्गज नेताओं की निगाहें अब हाई कोर्ट की कार्यवाही पर टिकी हैं। सोमवार दोपहर 2:30 बजे जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी, लेकिन इस बार मामला नीति का नहीं, बल्कि जज को बदलने की मांग का है।
केजरीवाल खुद संभालेंगे मोर्चा
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला फैसला खुद अरविंद केजरीवाल का है। केजरीवाल ने तय किया है कि वह जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच के खिलाफ दायर अपनी याचिका पर खुद बहस करेंगे। उनकी मुख्य मांग यह है कि जस्टिस शर्मा सीबीआई (CBI) द्वारा उनके खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई न करें।
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