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टूटे हुए दिलों की आवाज रफी साहब के 10 बेहतरीन नग्में

 Published : Jul 31, 2015 04:55 pm IST,  Updated : Aug 03, 2015 12:17 pm IST

नई दिल्ली: मशहूर गीतकार नौशाद ने मोहम्मद रफी के निधन पर लिखा था, 'गूंजती है तेरी आवाज अमीरों के महल में, झोपड़ों के गरीबों में भी है तेरे साज, यूं तो अपने मौसिकी पर साहब

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टूटे हुए दिलों की आवाज रफी साहब के 10 बेहतरीन नग्में

नई दिल्ली: मशहूर गीतकार नौशाद ने मोहम्मद रफी के निधन पर लिखा था, 'गूंजती है तेरी आवाज अमीरों के महल में, झोपड़ों के गरीबों में भी है तेरे साज, यूं तो अपने मौसिकी पर साहब को फक्र होता है मगर ए मेरे साथी मौसिकी को भी आज तुझ पर है नाज'।

मोहम्मद रफी को दुनिया अलविदा कहे हुए आज 35 वर्ष हो चुके है। उनके सदाबहार गीतों की वजह से लोग उन्हें आज भी याद करते हैं। दुनिया भर में उनके लाखों-करोड़ों फैंस है। लेकिन उनके बारें में कम ही लोग इस बात को जानते होंगे कि रफी साहब पहले लाहौर में अपने पिता का सैलून संभाला करते थे। दरअसल 1935 में मोहम्मद रफी के वालिद लाहौर गए थे जहां उन्होंने एक सैलून खोला। उस समय रफी साहब भी उस सैलून पर काम करने लगे थे और तब उनकी उम्र मात्र 11 वर्ष थी। एक दिन उनके सैलून में लाहौर रेडियो स्‍टेशन के डायरेक्‍टर शेविंग करवाने आए। उन्होंने वहां एक फिको नाम के बच्चे को गाना गुनगुनाते हुए सुना जो उन्हें बहुत मीठा लगा। इसके बाद उन्होंने उस बच्चे को गाना गाने का मौका दिया जो आज मोहम्मद रफी के नाम से मशहूर है।

पेश हैं उनके सदाबहार नगमें-

फिल्म: जंगली

वर्ष: 1961

डायरेक्टर: सुबोध मुखर्जी 

अगली स्लाइड में देखें सुरों के शहंशाह रफी साहब के बेहतरीन गाने:-

 

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