मुंबई: राष्ट्रीय पुरुस्कार विजेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने फिल्म 'मांझी' और 'गैंग्स ऑफ़ वासेपुर' में शानदार अभिनय के बावजूद अवार्ड न मिलने पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है। नवाजुद्दीन का कहना है कि ''व्यावसायिक अवार्ड शो में उनकी फिल्म को अगर अवार्ड नहीं मिलता तो उससे उनको कोई फर्क नहीं पड़ता।''
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अधिकतर अवॉर्ड शो के दौरान 'बजरंगी भाईजान','पीकू' और 'बाजीराव मस्तानी' जैसी फिल्मों को सराहा गया। नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने फिल्म 'मांझी' में दशरथ मांझी का किरदार निभाया था। इस फिल्म में दशरथ मांझी अपने गांव को सड़क तक मिलाने के लिए अकेले पूरा पहाड़ काटता है। इस फिल्म ने दर्शकों के दिल को जीत लिया था। हालांकि अवार्ड्स के मामले में मांझी कमाल नहीं कर पाई। मांझी को एक भी अवार्ड न मिलने पर नवाजुद्दीन बहुत नाराज हैं। नवाजुद्दीन सिद्दीकी हाल ही में 22nd Lions Gold Awards में नजर आए, वहां उनसे पूछा गया कि क्या आपको इस बात का कोई दुःख नहीं है?
इसपर बहुत प्यार से जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि ''व्यावसायिक अवार्ड शो में उनकी फिल्म को अगर अवार्ड नहीं मिलता तो उससे उनको कोई फर्क नहीं पड़ता। जिसको अवार्ड मिलता है वह खुश होता है जिसको नहीं मिलता है वह उदास हो जाता है। यही दुनिया की रीत है।'' जिस अवार्ड फंक्शन में नवाजुद्दीन पहुंचे थे उन्होंने उस अवार्ड फंक्शन के बारे में कहा कि ये फंक्शन मेरे लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां सिर्फ उन लोगों को फिल्मों को चुना गया है, जिन्होंने वास्तव में अपने अभिनय से लोगों का दिल जीता है और मैं इस बात से बहुत खुश हूं।
Lions Gold Awards के सिवा मुझे और किसी भी अवार्ड फंक्शन में मेरी फिल्म 'गैंग्स ऑफ़ वासेपुर' के लिए अवार्ड से नहीं नवाजा गया। मेने उस फिल्म में फैजल खान का जो किरदार निभाया वह बहुत प्रतिष्ठित किरदार हैं। अब मुझे मेरी फिल्म मांझी के लिए Lions Gold Awards में अवार्ड दिया जा रहा है जो किसी भी और अवार्ड शो में नहीं मिला।
केतन मेहता का कहना है कि फिल्म व्यापारिक लिहाज से ज्यादा कमाई नहीं कर पाई, लेकिन नवाजुद्दीन और राधिका के अभिनय ने लोगों को फिल्म देखने पर मजबूर कर दिया था। आखिर में नवाजुद्दीन ने कहा मुझे नाम और शोहरत से कोई फर्क नहीं पड़ता में बस एक अच्छा अभिनेता बनना चाहता हूं।