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वो भारतीय डायरेक्टर जिन्हें सलाम ठोकता था हॉलीवुड, हर फिल्म की थी दीवानगी, आज भी हैं लेजेंड

 Written By: Shyamoo Pathak
 Published : May 02, 2025 06:00 am IST,  Updated : May 02, 2025 06:00 am IST

अपने समय के दिग्गज फिल्म मेकर रहे सत्यजीत रे की आज जयंती है। आज ही के दिन उनका जन्म हुआ था। इस खास मौके पर हम जानते हैं सत्यजीत रे की बेहतरीन फिल्मों की कहानी।

Satyajit Ray- India TV Hindi
सत्यजीत रे Image Source : INSTAGRAM

आज बॉलीवुड के महान डायरेक्टर और फिल्म मेकर रहे सत्यजीत रे की की जयंती है। आज ही के दिन सत्यजीत रे का जन्म हुआ था। सत्यजीत रे भारत के ऐसे इकलौते फिल्म मेकर रहे हैं जिन्होंने अपने काम से हॉलीवुड तक के दिग्गज मेकर्स को प्रभावित किया। इतना ही नहीं सत्यजीत रे ने अपनी फिल्मों से पूरी दुनिया में चमक बिखेरी। साल 1992 में इस दुनिया को अलविदा कहने वाले सत्यजीत रे का जन्म 1921 में कोलकाता में हुआ था। सत्यजीत रे न केवल एक निर्देशक थे, बल्कि एक पटकथा लेखक, लेखक, चित्रकार और संगीतकार भी थे। भारतीय सिनेमा में उनका योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। अपनी पहली फिल्म 'पाथेर पांचाली' (1955) के साथ रे ने वैश्विक फिल्म परिदृश्य पर धूम मचा दी थी और इंटरनेशनल स्तर पर प्रशंसा अर्जित की। इतना ही नहीं भारतीय सिनेमा को दुनिया के मानचित्र पर जगह दिलाने वाले डायरेक्टर सत्यजीत रे ने कई बेहतरीन फिल्में बनाई हैं। इन फिल्मों को आज भी पूरी दुनिया में सराहा जाता है। सत्यजीत की कुछ बेहतरीन फिल्मों में 'अपू त्रयी', 'पाथेर पांचाली', 'अपराजितो' और 'अपुर संसार' शामिल हैं। 

भावनात्मक रूप से शक्तिशाली था रे का सिनेमा

रे का सिनेमा सूक्ष्म, फिर भी भावनात्मक रूप से शक्तिशाली था, जो तमाशे से ज्यादा चरित्र और स्थिति की बारीकियों से प्रेरित था। उनकी कहानी कहने की कला भारतीय संस्कृति में गहराई से बसी थी, फिर भी सार्वभौमिक रूप से प्रासंगिक थी। अपने करियर के दौरान रे ने कई तरह के विषयों की खोज की साथ ही 'चारुलता' और 'जन अरण्य' में आधुनिकता और परंपरा के बीच टकराव से लेकर 'शतरंज के खिलाड़ी' में सत्ता की नैतिक दुविधाओं तक सारी चीजों पर पर्दे पर उकेरने का प्रयास किया। रे को कई पुरस्कार मिले, जिनमें भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न और 1992 में मानद अकादमी पुरस्कार शामिल है जो उनके निधन से कुछ ही दिन पहले उन्हें दिया गया था। अस्पताल के बिस्तर से दिए गए अपने स्वीकृति भाषण में, रे ने विनम्रतापूर्वक सिनेमा के प्रति अपने आजीवन प्रेम को दर्शाया, एक ऐसा माध्यम जिसे उन्होंने 'कई कलाओं का मिश्रण' बताया। 

तीन दशक बाद भी सिनेमा देता है प्रेरणा

उनके निधन के तीन दशक से भी ज्यादा समय बाद सत्यजीत रे का काम फिल्म निर्माताओं और सिनेमा प्रेमियों की कई पीढ़ियों को प्रेरित करता रहा है। मार्टिन स्कॉर्सेसी, अकीरा कुरोसावा और वेस एंडरसन जैसे निर्देशकों ने उनकी फिल्मों की प्रशंसा की है और उनके काम की पूर्वव्यापी समीक्षा आज भी दुनिया भर में की जाती है। उनकी कलात्मकता भावनाओं, सांस्कृतिक गहराई और सिनेमाई शुद्धता से भरपूर कहानी कहने के लिए एक बेंचमार्क बनी हुई है। आज जब हम सत्यजीत रे को याद करते हैं, तो हमें शांत, करुणामय कहानी कहने की शक्ति की याद आती है। 

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