80 और 90 के दशक में दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले धारावाहिकों का क्रेज ही कुछ ऐसा था कि जब वे टीवी पर आते थे तो सड़कें सूनी हो जाती थीं। बीआर चोपड़ा की 'महाभारत' (1988) भी एक ऐसा ही ऐतिहासिक शो था, जिसने सफलता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। इस पौराणिक सीरियल का हर एक दृश्य और हर एक पात्र दर्शकों के जेहन में हमेशा के लिए बस गया। इस शो का सबसे झकझोर देने वाला और चर्चित सीन 'द्रौपदी चीर हरण' था, जिसे देखकर उस दौर में लोगों की आंखें नम हो गई थीं। इस दृश्य में जिस खलनायक ने अपनी क्रूरता से दर्शकों के भीतर खौफ और नफरत पैदा कर दी थी, वह था 'दुशासन'। दुशासन ने जिस बेदर्दी से द्रौपदी को घसीटा और उसके बाल खींचे, उसने उस अभिनेता को रातों-रात घर-घर में मशहूर कर दिया।
परदे के दुशासन का असली नाम
परदे पर दुशासन के इस बेहद चुनौतीपूर्ण और नकारात्मक किरदार को जिस दमदार अभिनेता ने निभाया था, उनका असली नाम विनोद कपूर है। विनोद कपूर ने इस रोल को इतनी शिद्दत के साथ पर्दे पर उतारा था कि लोग असल जिंदगी में भी उन्हें सचमुच का विलेन समझने लगे थे। उनकी कड़क आवाज, बड़ी आंखें और अभिनय की बारीकियों ने दुशासन के चरित्र को अमर बना दिया। हालांकि करियर के शुरुआती दौर में इस तरह का खूंखार रोल निभाना आसान नहीं था, लेकिन विनोद कपूर ने इस किरदार के साथ पूरा न्याय किया और अपनी कला का लोहा मनवाया।
विनोद कपूर का अभिनय सफर और करियर
विनोद कपूर ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत साल 1987 में फिल्म 'उत्तर दक्षिण' और उसके बाद 1988 में आई फिल्म 'ये प्यार नहीं' से की थी, लेकिन उन्हें असली और बड़ी पहचान 'महाभारत' से ही मिली। इस शो की अपार सफलता के बाद उनके पास कई टीवी शोज के ऑफर्स की लाइन लग गई। उन्होंने बीआर चोपड़ा के ही एक और मशहूर धारावाहिक 'कानून' में इंस्पेक्टर शक्ति सिंह का एक बेहद लोकप्रिय किरदार निभाया, जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया। इसके अलावा उन्होंने 'चंद्रकांता' में बरकत खान/अमरजीत सिंह और 'युग' में रंजीत बासु जैसी यादगार भूमिकाएं कीं। इतना ही नहीं विनोद कपूर ने सिर्फ नकारात्मक ही नहीं बल्कि सकारात्मक पौराणिक किरदार भी निभाए, उन्होंने मशहूर धारावाहिक 'विष्णु पुराण' (2000) और सागर आर्ट्स की 'रामायण' (2008) में 'विभीषण' का बेहद शांत और संजीदा रोल प्ले कर दर्शकों को हैरान कर दिया था।
आज कहां हैं और क्या कर रहे हैं विनोद कपूर?
समय बदलने के साथ कई पुराने कलाकार धीरे-धीरे एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की चकाचौंध से दूर हो जाते हैं, लेकिन विनोद कपूर के मामले में ऐसा नहीं है। हालांकि वे मुख्यधारा की लाइमलाइट और पेज-3 पार्टियों से दूर एक शांत और सादगी भरी जिंदगी जीना पसंद करते हैं, लेकिन अभिनय के प्रति उनका लगाव आज भी वैसा ही है। वह आज भी पूरी तरह से एक्टिंग की दुनिया में सक्रिय हैं और टेलीविजन शोज का हिस्सा बने हुए हैं। हाल के वर्षों में उन्हें 'अलादीन-नाम तो सुना होगा' और 'कामना' जैसे शोज में देखा गया था। वहीं साल 2023 में वे 'ध्रुव तारा-समय सदी से परे' में महर्षि के किरदार में नजर आए। वर्तमान समय (2025-2026) की बात करें तो वे जी टीवी के शो 'सारू' और स्टार प्लस के नए धारावाहिक 'माना के हम यार नहीं' में बलदेव में का एक बेहद महत्वपूर्ण किरदार निभाते हुए दर्शकों का मनोरंजन कर रहे हैं। लाइमलाइट की तड़क-भड़क से दूर रहकर भी विनोद कपूर आज एक सीनियर एक्टर के तौर पर लगातार काम कर रहे हैं और अपनी एक अलग व गरिमामय जिंदगी जी रहे हैं।