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Explainer : खाद सब्सिडी से लेकर नई एग्री पॉलिसी और आय बढ़ाने तक, अन्नदाता को Budget से हैं बहुत उम्मीदें, क्या-क्या हैं अरमान?

 Written By: Pawan Jayaswal
 Published : Jun 21, 2024 05:54 pm IST,  Updated : Jul 16, 2024 05:32 pm IST

Budget 2024-25 : जुलाई में पेश होने वाले पूर्ण बजट से किसानों को कई उम्मीदे हैं। एग्री रिसर्च पर निवेश बढ़ाकर किसानों की आय बढ़ाने की मांग की जा रही है। साथ ही देश में नई एग्रीकल्चर पॉलिसी लाने की भी डिमांड है।

किसानों को बजट से...- India TV Hindi
किसानों को बजट से उम्मीदें Image Source : FILE

Budget 2024-25 : मोदी सरकार को लगातार तीसरी बार सत्ता में आने का मौका मिला है। प्रधानमंत्री मोदी ने पदभार संभालते ही पहला काम किसानों के लिए किया था। उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की किश्त जारी करने का काम किया था। यह दिखाता है कि किसान इस सरकार के एजेंडे में सबसे ऊपर है। यही कारण है कि अगले महीने यानी जुलाई में पेश होने वाले वित्त वर्ष 2024-25 के पूर्ण बजट से किसानों को कुछ ज्यादा ही उम्मीदें हैं। किसानों का इस समय सबसे बड़ा मुद्दा है सीमित आय। अगर सरकार इस बजट में किसानों की आय बढ़ाने पर काम करती है, तो यह पूरी अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा होगा। आज शुक्रवार को ही आई एक रिपोर्ट बताती है कि अप्रैल-जून तिमाही में FMCG कंपनियों को ग्रामीण भारत से आई डिमांड ग्रोथ शानदार रही है।

एग्री रिसर्च से बढ़ सकती है किसानों की इनकम

किसानों को बजट 2024-25 से यह उम्मीद है कि सरकार एग्रीकल्चरल रिसर्च में निवेश बढ़ाए, खाद सब्सिडी को युक्तिसंगत बनाए और क्लाइमेट चेंज के खिलाफ सेक्टर को मजबूत करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप हो। आज 21 जून को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ हुई प्री-बजट बैठक में कृषि संगठनों और एक्सपर्ट्स ने इन्हीं सब मुद्दों को उठाया है। एग्रीकल्चर सेक्टर की ग्रोथ को तेज करना है और किसानों की इनकम बढ़ानी है, तो यह बहुत जरूरी है कि एग्रीकल्चर रिसर्च और डेवलेपमेंट पर निवेश बढ़ाया जाए। यही वजह है कि इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) के बजट को 9,500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 20,000 करोड़ करने की मांग की जा रही है।

सब्सिडी के जरिए जैव-उर्वरकों को किया जाए प्रमोट

एग्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि यूरिया के अलावा जैव-उर्वरकों और पत्ते वाले उर्वरकों को भी सब्सिडी के जरिए प्रमोट करना चाहिए। भारत कृषक समाज के चेयरमैन अजय वीर जाखड़ का कहना है कि एग्रीकल्चर और रिसर्च के लिए आवंटित होने वाले फंड को अलग किया जाए। उन्होंने कहा कि अन्य निवेशों की तुलना में एग्री रिसर्च पर आर्थिक लाभ 10 गुना ज्यादा होता है। इसके बावजूद पिछले 2 दशकों से इसके बजट में इजाफा महंगाई दर से भी कम हुआ है।

लायी जाए नई एग्रीकल्चर पॉलिसी

कृषि विशेषज्ञों ने एमएसपी समिति को भंग करने की भी मांग की है। उनकी मांग है कि भारत के लिए एक नई एग्रीकल्चर पॉलिसी लायी जाए। साथ ही केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित योजनाओं में ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट के लिए फंडिंग रेश्यो को 60:40 से बदलकर 90:10 करने की भी मांग है, जिसमें केंद्र सरकार पांच साल की अवधि के लिए 90 प्रतिशत लागत को कवर करे।

जिला निर्यात केंद्रों की स्थापना हो

एग्री एक्सपर्ट्स चाहते हैं कि कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के बजट आवंटन को 80 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 800 करोड़ रुपये किया जाए। इससे कृषि निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, जिला निर्यात केंद्रों की स्थापना करने और राष्ट्रीय बकरी एवं भेड़ मिशन शुरू करने का भी सुझाव दिया गया है।

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