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क्या सपने देखने से थकान महसूस होती है, जानिए सुबह उठकर कमजोरी क्यों महसूस होती है?

 Written By: Bharti Singh @bhartinisheeth
 Published : May 28, 2026 02:01 pm IST,  Updated : May 28, 2026 02:15 pm IST

Dream Cause Of Fatigue: क्या रात को सपने देखने के बाद सुबह उठकर आपको थकान महसूस होती है। क्या सपने देखने में हमारा दिमाग एक्टिव रहता है। आइये जानते हैं क्या कहता है साइंस और रिसर्च?

सपने देखने से सुबह...- India TV Hindi
सपने देखने से सुबह थकान होती है? Image Source : INDIA TV

कभी-कभी सुबह उठने पर सिर भारी लगता है, शरीर थका-थका महसूस होता है और नींद पूरी होने के बावजूद ताजगी का अहसास नहीं होता। ऐसा लगता है मानो पूरी रात सपने देखने में शरीर एक्टिव रहा है और आराम नहीं किया है। सुबह उठकर कई बार वो सपने याद रहते हैं और कई बार हम सपने भूल जाते हैं। लेकिन इतना जरूर पता रहता है कि आज रातभर बहुत सपने देखे हैं, लेकिन क्या सचमुच ज्यादा सपने देखना आपको थका देता है? आइए समझते हैं कि विज्ञान और रिसर्च इसके बारे में क्या कहते हैं। 

दरअसल हम सभी सपने देखते हैं, लेकिन हर किसी को सारे सपने याद नहीं रहते। ज्यादातर सपने रैपिड आई मूवमेंट स्लीप के दौरान आते हैं। यह हमारी पूरी नींद का लगभग 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा होती है। पूरी रात में रैपिड आई मूवमेंट यानि आरईएम के चार से छह फेज होते हैं और सुबह आते-आते हर फेज लंबा होता जाता है। सपने सभी देखते हैं और कई बार एक से अधिक सपने आते हैं। ये सपने कई बार याद रहते हैं और कई बार हम भूल जाते हैं। अगर आपकी नींद 'आरईएम' फेज के दौरान या उसके तुरंत बाद खुलती है, तो सपने याद रहने की संभावना बढ़ जाती है। ज्यादातर भावनात्मक सपने याद रह जाते हैं। जिन लोगों की नींद हल्की होती है और बार-बार टूटती है उन्हें अक्सर सपने याद रह जाते हैं। 

सपने देखते समय मस्तिष्क में क्या होता है? 

सपने देखते वक्त दिमाग में क्या होता है?
Image Source : INDIA TVसपने देखते वक्त दिमाग में क्या होता है?

आरईएम वाले नींद के फेज में आपका दिमाग लगभग उतनी ही सक्रियता से काम करता है, जितना जागते समय करता है, जबकि शरीर पूरी तरह स्थिर रहता है। इस दौरान मांसपेशियां पूरी तरह इनएक्टिव रहती हैं। जिससे इंसान सपनों में हो रही गतिविधियों को रियल में न करने लगे। इसी समय मस्तिष्क के 'अमिगडाला', 'हिप्पोकैम्पस' और 'थैलेमस' जैसी भावनाओं को नियंत्रित करने वाले हिस्से बेहद एक्टिव हो जाते हैं। दूसरी ओर लॉजिकल थिंकिंग करने वाला 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' कम एक्टिव रहता है। इसी वजह से सपने भी रियल लगते हैं और भावनात्मक लगते हैं। ऐसा लगता है कि जो सपने में हो रहा है वो वास्तव में हो रहा है। यह पूरी तरह सामान्य प्रक्रिया है। 

सपने कितनी देर तक याद रहते हैं?

सपने कितनी देर याद रहते हैं?
Image Source : INDIA TVसपने कितनी देर याद रहते हैं?

ज्यादातर लोग मानते हैं कि सपने बहुत छोटे और टूटे हुए होते हैं। लेकिन शोध कुछ और बताते हैं। आरईएम नींद में आने वाले सपने लगभग वास्तविक समय के हिसाब से ही आगे बढ़ते हैं। इसमें वैज्ञानिकों ने लोगों को नींद के दौरान जगाकर उनसे उनके सपनों के बारे में पूछा, तो पता चला कि जितना लंबा सपना उन्होंने देखा वास्तव में वह उतनी देर ही चला हो। अक्सर तनावपूर्ण या बहुत जीवंत सपने लंबे महसूस होते हैं और लंबे समय तक याद रहते हैं। वहीं नॉर्मल सपने आंख खुलने से पहले ही यादों से मिट जाते हैं। इसके अलावा हमें वही सपने सबसे ज्यादा याद रहते हैं, जिनके दौरान हमारी नींद खुली हो। ऐसे में जो व्यक्ति कहता है कि उसने पूरी रात सपने देखे, हो सकता है कि उसकी 'आरईएम' नींद बिल्कुल सामान्य रही हो। फर्क इतना है कि हो सकता है उसकी आंख उन भावनात्मक सपनों के दौरान खुलीं, जो दिमाग में रह गए। 

क्या सपने देखना वास्तव में थका देता है?

क्या सपने वाकई थका देते हैं?
Image Source : INDIA TVक्या सपने वाकई थका देते हैं?

जब हम आरईएम वाले फेज में होते हैं तो नींद के दौरान दिमाग को वह आराम नहीं मिलता, जो गहरी नींद में मिलता है। फिर भी दिमाग की एनर्जी खर्च होने पर किए गए रिसर्च से पता चलता है कि सिर्फ रात में सपने देखने की वजह से थकान महसूस नहीं होती। आमतौर पर सपने देखना आपकी नींद की क्वालिटी को प्रभावित नहीं करता, जब तक कि आप कोई डरावना सपना नहीं देखते हैं। इसका सीधा कारण यह है कि अगर आपको सपना याद है, तो हो सकता है कि आपकी नींद उसके दौरान खुल गई थी। ऐसी छोटी-छोटी मेमोरी भले ही आपको महसूस न हों, लेकिन गहरी नींद का समय कम कर देती हैं। जिससे दिमाग को 'एडेनोसिन' नामक केमिकल को साफ करने का मौका नहीं मिलता। दिनभर में ये पदार्थ दिमाग में जमा होता रहता है और जैसे-जैसे इसकी मात्रा बढ़ती है, नींद का दबाव भी बढ़ता जाता है। नींद का एक अहम काम इसी एडेनोसिन को साफ करना है और ऐसा गहरी नींद में सबसे ज्यादा होता है। अगर नींद बीच में टूट जाती है तो आप अगले दिन ज्यादा थकान महसूस करते हैं। आरईएम  नींद से अचानक जागना शरीर के लिए हल्की नींद से जागने की तुलना में ज्यादा मुश्किल होता है। इससे 'स्लीप इनर्शिया' की स्थिति पैदा हो सकती है, जिसमें दिमाग सुस्त और धुंधला महसूस करता है और पूरी तरह सक्रिय होने में समय लेता है। यानी थकान का कारण सपने नहीं, बल्कि यह होता है कि आपकी नींद कब टूटी और आप नींद के किस फेज में कितनी बार जागे हैं। 

बार बार नींद टूटने का कारण?

बार बार नींद क्यों टूटती है?
Image Source : INDIA TVबार बार नींद क्यों टूटती है?

अपनी नींद की क्वालिटी पर ध्यान दें जब नींद पूरी नहीं होती या बार-बार बीच में खुल जाती है, तो दिमाग अगली रातों में इसकी भरपाई करने के लिए आरईएम नींद का हिस्सा बढ़ा देता है। इसे 'आरईएम रिबाउंड' कहा जाता है। ऐसा करना शरीर की एक नॉर्मल एक्टिविटी है। अगर आपकी नींद बार-बार टूटती है। आपको ज्यादातर सपने याद रहते हैं। ऐसा लगता है कि रातभर बहुत सपने आते हैं और इसके साथ ही सुबह उठने पर थकान महसूस होती है, तो ये इस बात का इशारा है कि आपकी नींद बार-बार खुली है और मस्तिष्क को उसकी जरूरत के हिसाब से गहरी नींद नहीं मिल पा रही है। लंबे समय में इसका असर दिमाग पर हो सकता है। ऐसे में एक बार डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होगा।

(The Conversation)

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