आतंक का पनाहगार देश पाकिस्तान लगातार मुश्किलों से घिरता जा रहा है। एक ओर भारत पाकिस्तान में बैठे आतंकियों पर हमले कर रहा है तो वहीं, पाकिस्तान की सेना पर उसके ही बलूचिस्तान में लगातार हमले हो रहे हैं। बलूच लिबरेशन आर्मी यानी BLA ने पाकिस्तान की सेना पर एक बार फिर से बड़ा हमला किया है और दर्जन भर पाकिस्तानी सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया है। लेकिन बलूच लिबरेशन आर्मी और पाकिस्तानी सेना लड़ क्यों रही है? आखिर बलूचिस्तान पाकिस्तान से अलग क्यों होना चाहता है? आइए जानते हैं इन सवालों के जवाब हमारी इस खबर में।
BLA ने 12 पाकिस्तानी सैनिकों को मारा
पाकिस्तानी आर्मी के खिलाफ बलूच लिबरेशन आर्मी यानी BLA ने एक और बड़ा इंतकाम लिया है। बलूचिस्तान प्रांत के बोलन दर्रा इलाके में 12 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया है। बलूच लिबरेशन आर्मी के स्पेशल टैक्टिकल ऑपरेशंस स्क्वाड ने इस हमले को अंजाम दिया। पाकिस्तानी सेना का दस्ता मूवमेंट करते हुए आगे बढ़ रहा था। तभी रिमोट कंट्रोल के जरिए आईईडी से हमला किया गया। हमले में 12 पाकिस्तानी सैनिकों के चिथड़े उड़ गए हैं।

बलूचिस्तान में बगावत क्यों?
बलूचिस्तान में बगावत का सबसे मुख्य कारण पाकिस्तान में इस क्षेत्र और यहां की आबादी के साथ भेदभाव है। बलूचिस्तान में पाकिस्तान के सबसे ज्यादा खनिज हैं लेकिन ये आर्थिक विकास में सबसे पिछड़ा इलाका है। बलूचिस्तान से लगे ग्वादर पोर्ट को पाकिस्तान ने चीन के हवाले किया लेकिन प्रोजेक्ट से बलूचिस्तान को कोई भी फायदा नहीं हुआ। ऐसे में बलूचिस्तान में लगातार चीन के प्रोजेक्ट का विरोध विरोध होते रहता है।
पाकिस्तान से अलग क्यों होना चाहते हैं बलोच?
बलूचिस्तान का क्षेत्रफल कुल पाकिस्तान का 46 फीसदी है। हालांकि, यहां की आबादी 1.5 करोड़ है जो कि पाकिस्तान की कुल आबादी का केवल 6% प्रतिशत है। बलूचिस्तान में 70% लोग गरीबी रेखा के नीचे आते हैं। इसके अलावा बलोच मूल के लोगों को पाकिस्तान मुख्य रूप से पंजाब क्षेत्र के मुस्लिम के द्वारा भेदभाव का भी सामना करना पड़ता है। पाकिस्तानी सेना में टॉप पदों पर कभी भी बलोच लोगों की नियुक्ति नहीं की जाती है।

पाक के खिलाफ BLA की हाल की कार्रवाई
- 4 जनवरी 2025: 43 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत
- 1 फरवरी 2025: 18 अर्धसैनिक बल के जवानों की मौत
- 12 मार्च 2025: ट्रेन हाइजैक, 200 सैनिकों की हत्या
- 16 मार्च 2025- बस पर हमला, 90 सैनिकों की मौत
- 6 मई 2025- 6 सैनिकों को मार डाला
- 7 मई 2025- 12 सैनिकों की हत्या
बलूचिस्तान पर कब्जे की कहानी
ब्रिटिश शासन के दौरान कई भारतीय उपमहाद्वीप में कुछ ऐसा रियासतें थीं जहां ब्रिटिश सम्राज्य का सीधा शासन नहीं था। आजादी के समय इन रियासतों को 3 ऑप्शन दिए गए थे। भारत के साथ विलय, पाकिस्तान के साथ विलय या फिर स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में पहचान। इन्हीं रियासतों में से बलूचिस्तान भी था जिसमें कलात, खारान, लॉस बुरा और मकरान की रियासतें शामिल थीं। बलूचिस्तान ने इस दौरान स्वतंत्र रहने की इच्छा जताई। इसके बाद साल 1947 में मुस्लिम लीग और कलात के बीच एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किया जिसमें माना गया था कि कलात की अपनी एक अलग पहचान होगी। मुस्लिम लीग ने कलात की स्वतंत्रता का सम्मान करने की बात कही थी। तब बलूचिस्तान की आजादी का ऐलान भी हो गया। हालांकि, साल 1948 में पाकिस्तानी सेना ने अभियान चलाकर कलात समेत पूरे बलूचिस्तान पर कब्जा कर लिया।
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