Published : Aug 04, 2025 10:35 am IST, Updated : Aug 04, 2025 11:02 am IST
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झारखंड के पूर्व सीएम शिबू सोरेन का निधन हो गया है। उन्होंने दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में अंतिम सांस ली।
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शिबू सोरेन का सर गंगा राम अस्पताल में एक महीने से अधिक समय से इलाज चल रहा था।
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शिबू सोरेन को लोग 'दिशोम गुरु' या 'गुरुजी' के नाम से भी जानते थे, लेकिन क्या आपको ये पता है कि उन्हें 'दिशोम गुरु' क्यों कहा जाता था और इसका मतलब क्या है।
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शिबू सोरेन को "गुरु" या "दिशोम गुरु" इसलिए कहा जाता था क्योंकि उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के माध्यम से आदिवासी समुदायों, खासकर संथाल और अन्य जनजातियों, के अधिकारों और स्वायत्तता के लिए लंबा संघर्ष किया।
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वे झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता थे, जिसका लक्ष्य झारखंड को एक अलग राज्य बनाना और आदिवासियों के हितों की रक्षा करना था।
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उनके नेतृत्व, सामाजिक कार्यों और आदिवासी संस्कृति व हितों के प्रति समर्पण ने उन्हें जनजातीय समुदायों में एक मार्गदर्शक और शिक्षक (गुरु) की तरह सम्मान दिलाया।
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"दिशोम गुरु" का अर्थ संथाली में "देश का गुरु" होता है, जो उनके नेतृत्व और प्रभाव को दर्शाता है।
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शिबू सोरेन और उनकी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) झारखंड के आदिवासी समुदायों के अधिकारों और क्षेत्रीय स्वायत्तता के लिए एक प्रमुख शक्ति रही है।
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4 फरवरी 1973 को शिबू सोरेन, बिनोद बिहारी महतो, और अन्य नेताओं ने मिलकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) दल की स्थापना की थी। जिसका उद्देश्य झारखंड को बिहार से अलग कर एक स्वतंत्र राज्य बनाना था। साथ ही आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा, विशेष रूप से जमीन, जंगल, और जल पर उनके पारंपरिक हकों की रक्षा करना था।
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JMM ने 1970 और 1980 के दशक में रैलियों, प्रदर्शनों, और बंद जैसे आंदोलनों के माध्यम से आदिवासी समुदायों को संगठित किया। शिबू सोरेन ने "जंगल बचाओ, जमीन बचाओ" जैसे नारों के साथ लोगों को एकजुट किया।