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माघ मास में गलत दान बना सकता है बड़ा ग्रह दोष, राहु और शनि हो जाएंगे रुष्ट, भूलकर भी न करें इन चीजों का दान

Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
Published : Jan 06, 2026 06:59 pm IST,  Updated : Jan 06, 2026 06:59 pm IST
हिंदू पंचांग की गणना चैत्र मास से होती है और माघ इसका एक अत्यंत पवित्र महीना माना जाता है। साल 2026 में माघ मास की शुरुआत हो चुकी है। इस महीने श्रद्धालु सूर्यदेव को अर्घ्य देते हैं और मां गंगा की आराधना करते हैं। शास्त्रों के अनुसार यह समय स्नान, दान और तपस्या के लिए सबसे उत्तम माना गया है।
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हिंदू पंचांग की गणना चैत्र मास से होती है और माघ इसका एक अत्यंत पवित्र महीना माना जाता है। साल 2026 में माघ मास की शुरुआत हो चुकी है। इस महीने श्रद्धालु सूर्यदेव को अर्घ्य देते हैं और मां गंगा की आराधना करते हैं। शास्त्रों के अनुसार यह समय स्नान, दान और तपस्या के लिए सबसे उत्तम माना गया है।
सनातन धर्म में हर महीने का अपना विशेष महत्व होता है, लेकिन माघ माह को सबसे पुण्य दायी माह में गिना जाता है। इस महीने दान-पुष्य का विशेष फल मिलता है। हालांकि, शास्त्रों में यह भी बताया गया है कि माघ माह में कुछ चीजों का दान करने से लाभ की जगह दोष लग सकता है। ऐसे में माघ माह में दान करते समय वस्तुओं का चयन बहुत सोच समझकर करना चाहिए।
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सनातन धर्म में हर महीने का अपना विशेष महत्व होता है, लेकिन माघ माह को सबसे पुण्य दायी माह में गिना जाता है। इस महीने दान-पुष्य का विशेष फल मिलता है। हालांकि, शास्त्रों में यह भी बताया गया है कि माघ माह में कुछ चीजों का दान करने से लाभ की जगह दोष लग सकता है। ऐसे में माघ माह में दान करते समय वस्तुओं का चयन बहुत सोच समझकर करना चाहिए।
पद्म पुराण में वर्णन मिलता कि माघ महीने में नदियों में स्नान करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों को पापों से मुक्ति प्रदान करते हैं। विशेष रूप से प्रयागराज के संगम में स्नान करने से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। ऐसी मान्यता है कि संगम स्नान करने वाले व्यक्ति को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता।
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पद्म पुराण में वर्णन मिलता कि माघ महीने में नदियों में स्नान करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों को पापों से मुक्ति प्रदान करते हैं। विशेष रूप से प्रयागराज के संगम में स्नान करने से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। ऐसी मान्यता है कि संगम स्नान करने वाले व्यक्ति को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता।
शास्त्रों के अनुसार, माघ महीने में लोहे या इससे बनी चीजों का दान करना वर्जित माना गया है। खासतौर पर मकर संक्रांति, माघ अमावस्या और माघी पूर्णिमा में इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए। मान्यता है कि इस दौरान लोहे का दान करने से शनि ग्रह से जुड़े दोष सक्रिय हो सकते हैं, जिससे धन हानि, स्वास्थ्य समस्याएं और मानसिक तनाव बढ़ सकता है।
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शास्त्रों के अनुसार, माघ महीने में लोहे या इससे बनी चीजों का दान करना वर्जित माना गया है। खासतौर पर मकर संक्रांति, माघ अमावस्या और माघी पूर्णिमा में इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए। मान्यता है कि इस दौरान लोहे का दान करने से शनि ग्रह से जुड़े दोष सक्रिय हो सकते हैं, जिससे धन हानि, स्वास्थ्य समस्याएं और मानसिक तनाव बढ़ सकता है।
सामान्य रूप से भी शाम के समय नमक का दान करना शुभ नहीं माना जाता, लेकिन माघ माह में इसे पूरी तरह टालने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ महीने में नमक का दान करने से राहु से संबंधित दोष बढ़ सकता है। इससे राहु और शनि दोनों के अशुभ प्रभाव एक साथ जीवन में परेशानियां पैदा कर सकते हैं।
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सामान्य रूप से भी शाम के समय नमक का दान करना शुभ नहीं माना जाता, लेकिन माघ माह में इसे पूरी तरह टालने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ महीने में नमक का दान करने से राहु से संबंधित दोष बढ़ सकता है। इससे राहु और शनि दोनों के अशुभ प्रभाव एक साथ जीवन में परेशानियां पैदा कर सकते हैं।
माघ माह में चांदी का दान करना भी उचित नहीं माना जाता। मान्यता है कि इस दौरान चांदी दान करने से कुंडली में चंद्र ग्रह कमजोर हो सकता है। इसका असर मानसिक अशांति, तनाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के रूप में देखने को मिल सकता है।
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माघ माह में चांदी का दान करना भी उचित नहीं माना जाता। मान्यता है कि इस दौरान चांदी दान करने से कुंडली में चंद्र ग्रह कमजोर हो सकता है। इसका असर मानसिक अशांति, तनाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के रूप में देखने को मिल सकता है।
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